झारखंड सामान्य स्नातक योग्यताधारी संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा (जेएसएससी-सीजीएल) पेपर लीक कांड में सीआईडी ने अदालत में केस डायरी पेश करते हुए परीक्षा माफिया और प्रिंटिंग प्रेस के नापाक गठजोड़ की परतें खोल दी हैं। सीआईडी के खुलासे के अनुसार, परीक्षा की पूरी गोपनीय प्रक्रिया संभालने वाली एजेंसी आईसीएन इंडिया प्राइवेट लिमिटेड (आईसीएन) के सीईओ सोमांश प्रकाश और प्रिंटिंग से जुड़े कर्मी राहुल कुमार ने हरियाणा के मानेसर और राजस्थान स्थित प्रिंटिंग प्रेस से प्रश्नपत्र बाहर निकाले और व्हाट्सएप के जरिए परीक्षा माफिया के अंतरराज्यीय सिंडिकेट तक पहुंचाए। सीआईडी ने अदालत को बताया कि मानेसर प्रिंटिंग प्रेस के फैक्ट्री रजिस्टर में राहुल की इंट्री दर्ज है। इसके अलावा राहुल के मोबाइल नंबर (7677958256) के कॉल डिटेल रिकॉर्ड और लोकेशन एनालिसिस ने भी साबित कर दिया कि प्रश्नपत्रों की छपाई के दौरान वह मानेसर फैक्ट्री के अंदर ही मौजूद था। सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आई है कि जो आरोपी प्रश्नपत्रों की छपाई, पैकेजिंग और निगरानी संभाल रहे थे, वे खुद भी अभ्यर्थी बनकर परीक्षा में शामिल हुए। प्रिंटिंग कार्य से जुड़े आरोपी समीर कुमार ने न केवल परीक्षा दी, बल्कि पास होकर सहायक प्रशाखा पदाधिकारी (एएसओ) भी बन गया। सीआईडी ने खुलासा किया है कि आरोपी समीर कुमार को परीक्षा से ठीक पहले झारखंड भेजा गया था। वहीं राहुल कुमार छपाई के दौरान मानेसर फैक्ट्री के अंदर मौजूद रहकर पेपर लीक कराने के साथ खुद भी परीक्षा में बैठा। सीआईडी ने सोमांश और राहुल को 27 अगस्त को रांची के हिनू स्थित होटल रॉयल से और समीर को 30 अगस्त को गिरफ्तार किया था। मानेसर और राजस्थान के प्रिंटिंग प्रेस से लीक हुआ पेपर, सीडीआर से खुली पोल सीआईडी ने अदालत को बताया कि आरोपी राहुल कुमार की मानेसर (हरियाणा) स्थित प्रिंटिंग फैसिलिटी में सीधी पहुंच थी। फैक्ट्री रजिस्टर में उसकी एंट्री दर्ज है। इसके अलावा राहुल के मोबाइल नंबर के कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) और लोकेशन एनालिसिस ने साबित कर दिया कि छपाई के वक्त वह फैक्ट्री के भीतर ही मौजूद था। परीक्षा से ठीक पहले राहुल के मोबाइल पर व्हाट्सएप से प्रश्नपत्रों के सेट आए, जिन्हें उसने आगे फॉरवर्ड किया। राहुल के जरिए प्रश्नपत्र सोमांश और फिर आरके सिंह उर्फ मिथिलेश सिंह समेत अन्य परीक्षा माफिया तक पहुंचा। पास हुए अभ्यर्थियों से दिलीप पासवान के बैंक अकाउंट में लाखों रुपए आए सितंबर-अक्टूबर 2024 के दौरान अभ्यर्थी प्रभाकर शर्मा की मां शांति देवी के बैंक खाते से दिलीप पासवान के खाते में करीब 6 लाख रुपए ट्रांसफर किए गए। रिजल्ट आने के बाद सफल अभ्यर्थी रामचरण सिंह गुर्जर के दोस्त देवनारायण गुर्जर के खाते से करीब 3.50 लाख रुपए और खुद सफल अभ्यर्थी रामचरण सिंह गुर्जर के खाते से 1.50 लाख रुपए दिलीप के खाते में भेजे गए। इसी तरह हरि सिंह गुर्जर के खाते से भी करीब 3 लाख रुपए दिलीप के खाते में आने की बात जांच के दायरे में है। आरोपी राहुल कुमार के जरिए सोमांश तक प्रश्नपत्र और उत्तरकुंजी पहुंची जांच में सामने आए तथ्यों के हवाले से सीआईडी ने अदालत को बताया कि प्रश्नपत्रों की छपाई हरियाणा के मानेसर और राजस्थान की प्रिंटिंग प्रेस में हुई थी। आरोप है कि प्रिंटिंग प्रक्रिया से जुड़े लोगों के जरिए गोपनीय सामग्री बाहर निकली। सीआईडी के मुताबिक सह-आरोपी राहुल कुमार के जरिए सोमांश तक प्रश्नपत्र पहुंची और इसके बाद डिजिटल माध्यम से यह सामग्री आरके सिंह उर्फ मिथिलेश सिंह समेत परीक्षा माफिया के नेटवर्क तक गई। जांच एजेंसी का दावा है कि यही नेटवर्क अभ्यर्थियों से रकम लेकर उन्हें परीक्षा से पहले प्रश्न और उत्तर उपलब्ध कराने की व्यवस्था कर रहा था। दुर्गापुर स्थित सीतुलपुर के क्वार्टर में 35 अभ्यर्थियों को उत्तर रटवाए गए थे नेटवर्क में बिचौलिए व एजेंट की भूमिका निभाने वाले आरोपी दिलीप कुमार पासवान ने अपने इकबालिया बयान में सरगना दिलीप यादव से रिश्तों की बात कबूली है। सीआईडी के अनुसार: {पश्चिम बंगाल के दुर्गापुर स्थित सीतुलपुर के एक क्वार्टर में 30 से 35 अभ्यर्थियों को जुटाया गया था, जहां उन्हें परीक्षा से पहले प्रश्न-उत्तर रटवाए गए। {इस गिरोह ने नेपाल के बीरगंज सेंटर की तर्ज पर सीतुलपुर, दुग्दा (बोकारो), नियामतपुर (आसनसोल) व पटना में सुरक्षित ठिकाने बनाकर अभ्यर्थियों को इकट्ठा करने का मॉडस ऑपरेंडी तैयार किया था। जेएसएससी को अंधेरे में रख बिना सहमति के हुआ सब-कॉन्ट्रैक्ट सीआईडी की ओर से कोर्ट को सौंपे गए केस डायरी के आधार पर सोमांश प्रकाश और राहुल की इस मामले में अहम भूमिका बताई गई है। जांच एजेंसी के अनुसार, सीजीएल-2023 परीक्षा की एंड-टू-एंड गोपनीय जिम्मेदारी मूल रूप से वेबेल एजेंसी को सौंपी गई थी। आरोप है कि वेबेल ने जेएसएससी की जानकारी और सहमति के बिना यह संवेदनशील काम मेसर्स आईसीएन इंडिया प्राइवेट लिमिटेड को सब-कॉन्ट्रैक्ट कर दिया। सोमांश प्रकाश इसी आईसीएन कंपनी का सीईओ था, जिसके पास प्रश्नपत्र सेटिंग, ओएमआर शीट व पर्चों की छपाई, परीक्षा संचालन, मूल्यांकन और रिजल्ट तैयार करने जैसी अत्यंत गोपनीय जिम्मेदारियां थीं।
पत्नी और बहन को भी सिंडिकेट में उतारा
जांच में यह चौंकाने वाला तथ्य भी सामने आया है कि दिलीप पासवान ने अभ्यर्थी प्रभाकर शर्मा के साथ-साथ अपनी पत्नी अस्मिता करुणा और अपनी बहन विजेता को भी इस अवैध सेटिंग गिरोह और एजेंटों से मिलवाया था। सीआईडी को दिलीप पासवान और उसकी पत्नी अस्मिता करुणा के बीच परीक्षा से ठीक पहले हुई व्हाट्सएप चैट हाथ लगी है। इस चैट में लीक प्रश्नपत्र, प्रश्न-उत्तर सामग्री और उत्तरों को याद करने (रटने) को लेकर सीधी बातचीत दर्ज है। यह इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य साबित करता है कि दिलीप केवल एक सामान्य मददगार नहीं, बल्कि धांधली की अग्रिम साजिश में परिवार समेत पूरी तरह लिप्त था। इसके अलावा उसके मोबाइल नंबर (7063414831) के तकनीकी विश्लेषण और लोकेशन से साबित हुआ कि वह परीक्षा के दौरान और बाद में कई सफल और असफल अभ्यर्थियों के लगातार संपर्क में था। झारखंड सामान्य स्नातक योग्यताधारी संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा (जेएसएससी-सीजीएल) पेपर लीक कांड में सीआईडी ने अदालत में केस डायरी पेश करते हुए परीक्षा माफिया और प्रिंटिंग प्रेस के नापाक गठजोड़ की परतें खोल दी हैं। सीआईडी के खुलासे के अनुसार, परीक्षा की पूरी गोपनीय प्रक्रिया संभालने वाली एजेंसी आईसीएन इंडिया प्राइवेट लिमिटेड (आईसीएन) के सीईओ सोमांश प्रकाश और प्रिंटिंग से जुड़े कर्मी राहुल कुमार ने हरियाणा के मानेसर और राजस्थान स्थित प्रिंटिंग प्रेस से प्रश्नपत्र बाहर निकाले और व्हाट्सएप के जरिए परीक्षा माफिया के अंतरराज्यीय सिंडिकेट तक पहुंचाए। सीआईडी ने अदालत को बताया कि मानेसर प्रिंटिंग प्रेस के फैक्ट्री रजिस्टर में राहुल की इंट्री दर्ज है। इसके अलावा राहुल के मोबाइल नंबर (7677958256) के कॉल डिटेल रिकॉर्ड और लोकेशन एनालिसिस ने भी साबित कर दिया कि प्रश्नपत्रों की छपाई के दौरान वह मानेसर फैक्ट्री के अंदर ही मौजूद था। सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आई है कि जो आरोपी प्रश्नपत्रों की छपाई, पैकेजिंग और निगरानी संभाल रहे थे, वे खुद भी अभ्यर्थी बनकर परीक्षा में शामिल हुए। प्रिंटिंग कार्य से जुड़े आरोपी समीर कुमार ने न केवल परीक्षा दी, बल्कि पास होकर सहायक प्रशाखा पदाधिकारी (एएसओ) भी बन गया। सीआईडी ने खुलासा किया है कि आरोपी समीर कुमार को परीक्षा से ठीक पहले झारखंड भेजा गया था। वहीं राहुल कुमार छपाई के दौरान मानेसर फैक्ट्री के अंदर मौजूद रहकर पेपर लीक कराने के साथ खुद भी परीक्षा में बैठा। सीआईडी ने सोमांश और राहुल को 27 अगस्त को रांची के हिनू स्थित होटल रॉयल से और समीर को 30 अगस्त को गिरफ्तार किया था। मानेसर और राजस्थान के प्रिंटिंग प्रेस से लीक हुआ पेपर, सीडीआर से खुली पोल सीआईडी ने अदालत को बताया कि आरोपी राहुल कुमार की मानेसर (हरियाणा) स्थित प्रिंटिंग फैसिलिटी में सीधी पहुंच थी। फैक्ट्री रजिस्टर में उसकी एंट्री दर्ज है। इसके अलावा राहुल के मोबाइल नंबर के कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) और लोकेशन एनालिसिस ने साबित कर दिया कि छपाई के वक्त वह फैक्ट्री के भीतर ही मौजूद था। परीक्षा से ठीक पहले राहुल के मोबाइल पर व्हाट्सएप से प्रश्नपत्रों के सेट आए, जिन्हें उसने आगे फॉरवर्ड किया। राहुल के जरिए प्रश्नपत्र सोमांश और फिर आरके सिंह उर्फ मिथिलेश सिंह समेत अन्य परीक्षा माफिया तक पहुंचा। पास हुए अभ्यर्थियों से दिलीप पासवान के बैंक अकाउंट में लाखों रुपए आए सितंबर-अक्टूबर 2024 के दौरान अभ्यर्थी प्रभाकर शर्मा की मां शांति देवी के बैंक खाते से दिलीप पासवान के खाते में करीब 6 लाख रुपए ट्रांसफर किए गए। रिजल्ट आने के बाद सफल अभ्यर्थी रामचरण सिंह गुर्जर के दोस्त देवनारायण गुर्जर के खाते से करीब 3.50 लाख रुपए और खुद सफल अभ्यर्थी रामचरण सिंह गुर्जर के खाते से 1.50 लाख रुपए दिलीप के खाते में भेजे गए। इसी तरह हरि सिंह गुर्जर के खाते से भी करीब 3 लाख रुपए दिलीप के खाते में आने की बात जांच के दायरे में है। आरोपी राहुल कुमार के जरिए सोमांश तक प्रश्नपत्र और उत्तरकुंजी पहुंची जांच में सामने आए तथ्यों के हवाले से सीआईडी ने अदालत को बताया कि प्रश्नपत्रों की छपाई हरियाणा के मानेसर और राजस्थान की प्रिंटिंग प्रेस में हुई थी। आरोप है कि प्रिंटिंग प्रक्रिया से जुड़े लोगों के जरिए गोपनीय सामग्री बाहर निकली। सीआईडी के मुताबिक सह-आरोपी राहुल कुमार के जरिए सोमांश तक प्रश्नपत्र पहुंची और इसके बाद डिजिटल माध्यम से यह सामग्री आरके सिंह उर्फ मिथिलेश सिंह समेत परीक्षा माफिया के नेटवर्क तक गई। जांच एजेंसी का दावा है कि यही नेटवर्क अभ्यर्थियों से रकम लेकर उन्हें परीक्षा से पहले प्रश्न और उत्तर उपलब्ध कराने की व्यवस्था कर रहा था। दुर्गापुर स्थित सीतुलपुर के क्वार्टर में 35 अभ्यर्थियों को उत्तर रटवाए गए थे नेटवर्क में बिचौलिए व एजेंट की भूमिका निभाने वाले आरोपी दिलीप कुमार पासवान ने अपने इकबालिया बयान में सरगना दिलीप यादव से रिश्तों की बात कबूली है। सीआईडी के अनुसार: {पश्चिम बंगाल के दुर्गापुर स्थित सीतुलपुर के एक क्वार्टर में 30 से 35 अभ्यर्थियों को जुटाया गया था, जहां उन्हें परीक्षा से पहले प्रश्न-उत्तर रटवाए गए। {इस गिरोह ने नेपाल के बीरगंज सेंटर की तर्ज पर सीतुलपुर, दुग्दा (बोकारो), नियामतपुर (आसनसोल) व पटना में सुरक्षित ठिकाने बनाकर अभ्यर्थियों को इकट्ठा करने का मॉडस ऑपरेंडी तैयार किया था। जेएसएससी को अंधेरे में रख बिना सहमति के हुआ सब-कॉन्ट्रैक्ट सीआईडी की ओर से कोर्ट को सौंपे गए केस डायरी के आधार पर सोमांश प्रकाश और राहुल की इस मामले में अहम भूमिका बताई गई है। जांच एजेंसी के अनुसार, सीजीएल-2023 परीक्षा की एंड-टू-एंड गोपनीय जिम्मेदारी मूल रूप से वेबेल एजेंसी को सौंपी गई थी। आरोप है कि वेबेल ने जेएसएससी की जानकारी और सहमति के बिना यह संवेदनशील काम मेसर्स आईसीएन इंडिया प्राइवेट लिमिटेड को सब-कॉन्ट्रैक्ट कर दिया। सोमांश प्रकाश इसी आईसीएन कंपनी का सीईओ था, जिसके पास प्रश्नपत्र सेटिंग, ओएमआर शीट व पर्चों की छपाई, परीक्षा संचालन, मूल्यांकन और रिजल्ट तैयार करने जैसी अत्यंत गोपनीय जिम्मेदारियां थीं।
पत्नी और बहन को भी सिंडिकेट में उतारा
जांच में यह चौंकाने वाला तथ्य भी सामने आया है कि दिलीप पासवान ने अभ्यर्थी प्रभाकर शर्मा के साथ-साथ अपनी पत्नी अस्मिता करुणा और अपनी बहन विजेता को भी इस अवैध सेटिंग गिरोह और एजेंटों से मिलवाया था। सीआईडी को दिलीप पासवान और उसकी पत्नी अस्मिता करुणा के बीच परीक्षा से ठीक पहले हुई व्हाट्सएप चैट हाथ लगी है। इस चैट में लीक प्रश्नपत्र, प्रश्न-उत्तर सामग्री और उत्तरों को याद करने (रटने) को लेकर सीधी बातचीत दर्ज है। यह इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य साबित करता है कि दिलीप केवल एक सामान्य मददगार नहीं, बल्कि धांधली की अग्रिम साजिश में परिवार समेत पूरी तरह लिप्त था। इसके अलावा उसके मोबाइल नंबर (7063414831) के तकनीकी विश्लेषण और लोकेशन से साबित हुआ कि वह परीक्षा के दौरान और बाद में कई सफल और असफल अभ्यर्थियों के लगातार संपर्क में था।

