झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) की कंबाइंड ग्रेजुएट लेवल (सीजीएल) परीक्षा-2023 में हुई कथित धांधली व पेपर लीक मामले की जांच कर रही सीआईडी की विशेष जांच दल (एसआईटी) ने अब सीधे अभ्यर्थियों और आम जनता से साक्ष्य जुटाने की पहल की है। सीआईडी ने अपील की है कि यदि किसी के पास भी इस परीक्षा में हुई गड़बड़ी या अनियमितता से जुड़ी कोई ठोस जानकारी, ऑडियो-वीडियो, दस्तावेज या चैट उपलब्ध हैं, तो वे सीधे एसआईटी को उपलब्ध कराएं। जांच एजेंसी ने भरोसा दिलाया है कि सूचना देने वाले व्यक्ति की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी। सीआईडी इस मामले में इसलिए रेस हो गई है क्योंकि हाल ही में सीआईडी ने 14वीं जेपीएससी परीक्षा में हुए अनियमितता मामले की जांच शुरू की तो एक आरोपी अभय तिवारी गिरफ्तार हुआ। अभय तिवारी को जब सीआईडी ने रिमांड पर लेकर पूछताछ शुरू की तो उसने कई चौकाने वाले खुलासे किए। अभय तिवारी भी जेएसएससी सीजीएल परीक्षा में सफल हुआ था और नौकरी कर रहा था। उसकी पत्नी को भी इस परीक्षा में सफलता मिली थी। अब सीआईडी यह जांच कर रही है कि आखिर अभय तिवारी ने कैसे सफलता हासिल की। क्योंकि अभय तिवारी ने न सिर्फ एक प्रतियोगिता परीक्षा बल्कि दर्जन भर प्रतियोगिता परीक्षाओं में सफलता हासिल की है। इस वजह से अब सीआईडी यह जानना चाह रही है कि उसने सीजीएल में सफलता पाने के लिए क्या किया। 37 संदिग्धों से की जा चुकी है पूछताछ सीआईडी ने इस मामले में 37 संदिग्धों को नोटिस देकर पूछताछ की है। मामले में सीआईडी ने जनवरी 2025 में कांड संख्या 1/2025 दर्ज कर छानबीन शुरू की थी। इस दौरान सीआईडी को जांच में जानकारी मिली कि मामला पूरी तरह से फर्जीवाड़े व ठगी का था। प्रश्न पत्र देने के नाम पर कुछ आरोपियों ने अभ्यर्थियों से पैसे ऐंठे और उन्हें गेस पेपर देकर उनके साथ ठगी की। कोर्ट में भी सीआईडी ने यही जानकारी दी। जिसके आधार पर कोर्ट में भी प्रश्न पत्र लीक का यह मामला नहीं टिक सका। अब एक बार फिर जब इस मामले में छात्रों ने जांच की मांग उठाई और सरकार ने इस मामले में सीआईडी को फिर से जांच का निर्देश दिया तो अनुसंधान तेज हो गया है। यहां दें सूचना… मोबाइल नंबर : 9771432118, वाट्सएप नंबर: 9771432118 और ईमेल आईडी: cglinfo@jhpolice.gov.in
– गड़बड़ी या अनियमितता से जुड़ी कोई ठोस जानकारी सीआईडी ने मांगी, सूचना देने वाले की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी। सुप्रीम कोर्ट पहुंचा जेपीएससी परीक्षा में गड़बड़ी का मामला, सीबीआई जांच की मांग, 24 को सुनवाई जेपीएससी की 14वीं सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा-2025 में गड़बड़ी का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। सामाजिक कार्यकर्ता हरिशरण देवगन ने अधिवक्ता सत्यम सिंह राजपूत के माध्यम से याचिका दाखिल की है। सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जायमाला बागची और जस्टिस वी मोहना की अदालत में 24 अगस्त को मामले की सुनवाई होगी। याचिकाकर्ता ने परीक्षा को अविलंब रद करते हुए नए सिरे से परीक्षा आयोजित करने और पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच सीबीआई से कराने की मांग की गई है। याचिकाकर्ता ने सीबीआई जांच के विकल्प के रूप में झारखंड के बाहर के किसी हाईकोर्ट के सेवानिवृत जज की अध्यक्षता में जांच कमेटी बनाकर पूरे मामले की जांच कराने का आग्रह किया है। याचिकाकर्ता ने सीबीआई से जांच कराने के पीछे तर्क दिया है कि सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा के संचालन, प्रश्नपत्रों की सुरक्षा, ओएमआर शीट की कस्टडी और मूल्यांकन प्रक्रिया में गंभीर अनियमितता बरती गई। परीक्षा का परिणाम जारी होने के बाद एक सफल अभ्यर्थी की ओएमआर कार्बन कॉपी वायरल हुई। अभ्यर्थी ने पहले पेपर में 100 में से केवल 48 प्रश्नों के उत्तर दिए थे, फिर भी उसे सफल घोषित किया गया। झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) की कंबाइंड ग्रेजुएट लेवल (सीजीएल) परीक्षा-2023 में हुई कथित धांधली व पेपर लीक मामले की जांच कर रही सीआईडी की विशेष जांच दल (एसआईटी) ने अब सीधे अभ्यर्थियों और आम जनता से साक्ष्य जुटाने की पहल की है। सीआईडी ने अपील की है कि यदि किसी के पास भी इस परीक्षा में हुई गड़बड़ी या अनियमितता से जुड़ी कोई ठोस जानकारी, ऑडियो-वीडियो, दस्तावेज या चैट उपलब्ध हैं, तो वे सीधे एसआईटी को उपलब्ध कराएं। जांच एजेंसी ने भरोसा दिलाया है कि सूचना देने वाले व्यक्ति की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी। सीआईडी इस मामले में इसलिए रेस हो गई है क्योंकि हाल ही में सीआईडी ने 14वीं जेपीएससी परीक्षा में हुए अनियमितता मामले की जांच शुरू की तो एक आरोपी अभय तिवारी गिरफ्तार हुआ। अभय तिवारी को जब सीआईडी ने रिमांड पर लेकर पूछताछ शुरू की तो उसने कई चौकाने वाले खुलासे किए। अभय तिवारी भी जेएसएससी सीजीएल परीक्षा में सफल हुआ था और नौकरी कर रहा था। उसकी पत्नी को भी इस परीक्षा में सफलता मिली थी। अब सीआईडी यह जांच कर रही है कि आखिर अभय तिवारी ने कैसे सफलता हासिल की। क्योंकि अभय तिवारी ने न सिर्फ एक प्रतियोगिता परीक्षा बल्कि दर्जन भर प्रतियोगिता परीक्षाओं में सफलता हासिल की है। इस वजह से अब सीआईडी यह जानना चाह रही है कि उसने सीजीएल में सफलता पाने के लिए क्या किया। 37 संदिग्धों से की जा चुकी है पूछताछ सीआईडी ने इस मामले में 37 संदिग्धों को नोटिस देकर पूछताछ की है। मामले में सीआईडी ने जनवरी 2025 में कांड संख्या 1/2025 दर्ज कर छानबीन शुरू की थी। इस दौरान सीआईडी को जांच में जानकारी मिली कि मामला पूरी तरह से फर्जीवाड़े व ठगी का था। प्रश्न पत्र देने के नाम पर कुछ आरोपियों ने अभ्यर्थियों से पैसे ऐंठे और उन्हें गेस पेपर देकर उनके साथ ठगी की। कोर्ट में भी सीआईडी ने यही जानकारी दी। जिसके आधार पर कोर्ट में भी प्रश्न पत्र लीक का यह मामला नहीं टिक सका। अब एक बार फिर जब इस मामले में छात्रों ने जांच की मांग उठाई और सरकार ने इस मामले में सीआईडी को फिर से जांच का निर्देश दिया तो अनुसंधान तेज हो गया है। यहां दें सूचना… मोबाइल नंबर : 9771432118, वाट्सएप नंबर: 9771432118 और ईमेल आईडी: cglinfo@jhpolice.gov.in
– गड़बड़ी या अनियमितता से जुड़ी कोई ठोस जानकारी सीआईडी ने मांगी, सूचना देने वाले की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी। सुप्रीम कोर्ट पहुंचा जेपीएससी परीक्षा में गड़बड़ी का मामला, सीबीआई जांच की मांग, 24 को सुनवाई जेपीएससी की 14वीं सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा-2025 में गड़बड़ी का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। सामाजिक कार्यकर्ता हरिशरण देवगन ने अधिवक्ता सत्यम सिंह राजपूत के माध्यम से याचिका दाखिल की है। सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जायमाला बागची और जस्टिस वी मोहना की अदालत में 24 अगस्त को मामले की सुनवाई होगी। याचिकाकर्ता ने परीक्षा को अविलंब रद करते हुए नए सिरे से परीक्षा आयोजित करने और पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच सीबीआई से कराने की मांग की गई है। याचिकाकर्ता ने सीबीआई जांच के विकल्प के रूप में झारखंड के बाहर के किसी हाईकोर्ट के सेवानिवृत जज की अध्यक्षता में जांच कमेटी बनाकर पूरे मामले की जांच कराने का आग्रह किया है। याचिकाकर्ता ने सीबीआई से जांच कराने के पीछे तर्क दिया है कि सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा के संचालन, प्रश्नपत्रों की सुरक्षा, ओएमआर शीट की कस्टडी और मूल्यांकन प्रक्रिया में गंभीर अनियमितता बरती गई। परीक्षा का परिणाम जारी होने के बाद एक सफल अभ्यर्थी की ओएमआर कार्बन कॉपी वायरल हुई। अभ्यर्थी ने पहले पेपर में 100 में से केवल 48 प्रश्नों के उत्तर दिए थे, फिर भी उसे सफल घोषित किया गया।

