सहरसा में सोमवार को किसान, मजदूर, छात्र, युवा और महिलाओं ने केंद्र तथा बिहार सरकार की कथित जनविरोधी नीतियों के विरोध में राष्ट्रव्यापी ‘जेल भरो आंदोलन’ के तहत प्रदर्शन किया। अखिल भारतीय किसान सभा (AIKS), खेतिहर एवं ग्रामीण मजदूर यूनियन (AIAW) और सीटू (CITU) के संयुक्त आह्वान पर बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं ने समाहरणालय का घेराव किया। प्रदर्शनकारियों ने करीब दो घंटे तक केंद्र और राज्य सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। इस प्रदर्शन में एसएफआई (SFI), डीवाईएफआई (DYFI) और एडवा (AIDWA) सहित कई अन्य जनसंगठनों के कार्यकर्ता भी शामिल हुए। जिले के विभिन्न प्रखंडों से आए प्रदर्शनकारी सुबह लगभग 11 बजे डीबी रोड स्थित जिला परिषद परिसर में एकत्र हुए। देखें, मौके से आई तस्वीरें… संविदा कर्मियों को स्थायी करने की मांग जिला परिषद परिसर में एक सभा आयोजित की गई, जिसके बाद सभी प्रदर्शनकारी जुलूस की शक्ल में जिला मुख्यालय की ओर बढ़े। जुलूस के समाहरणालय पहुंचने पर कलेक्ट्रेट का घेराव किया गया। आंदोलनकारियों ने सरकार के समक्ष 20 से अधिक मांगें प्रस्तुत कीं। इनमें रसोइया, आशा, ममता, आंगनबाड़ी और कूरियर कार्यकर्ताओं सहित सभी संविदा कर्मियों को स्थायी करने और उन्हें न्यूनतम 26 हजार रुपए मासिक वेतन देने की मांग प्रमुख थी। बेरोजगार युवाओं को 5 हजार रुपए भत्ता मिले इसके अतिरिक्त, किसान और मजदूर विरोधी बताए जा रहे चारों लेबर कोड को रद्द करने तथा बेरोजगार युवाओं को प्रतिमाह 5 हजार रुपए बेरोजगारी भत्ता प्रदान करने की भी मांग की गई। प्रदर्शनकारियों ने सहरसा नगर निगम क्षेत्र में जल निकासी और पेयजल की बेहतर व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की। उन्होंने पूर्वी कोसी तटबंध के बाहर जलजमाव के स्थायी समाधान तथा मखाना और मछली पालन के लिए ठोस नीति बनाने पर भी जोर दिया। बाढ़ और सूखे की समस्या के स्थायी समाधान के लिए वराह क्षेत्र में हाईडैम के निर्माण की मांग भी आंदोलनकारियों द्वारा उठाई गई। अन्य मांगों में बिजली के निजीकरण और प्रीपेड/स्मार्ट मीटर लगाने पर रोक लगाना, किसानों को सिंचाई के लिए मुफ्त बिजली उपलब्ध कराना, विभिन्न करों को वापस लेना और पेट्रोलियम पदार्थों की कीमतें कम करना शामिल था। आंदोलनकारियों ने शिक्षा और स्वास्थ्य के निजीकरण पर रोक लगाकर इन्हें सभी के लिए मुफ्त करने की भी मांग की। सहरसा में सोमवार को किसान, मजदूर, छात्र, युवा और महिलाओं ने केंद्र तथा बिहार सरकार की कथित जनविरोधी नीतियों के विरोध में राष्ट्रव्यापी ‘जेल भरो आंदोलन’ के तहत प्रदर्शन किया। अखिल भारतीय किसान सभा (AIKS), खेतिहर एवं ग्रामीण मजदूर यूनियन (AIAW) और सीटू (CITU) के संयुक्त आह्वान पर बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं ने समाहरणालय का घेराव किया। प्रदर्शनकारियों ने करीब दो घंटे तक केंद्र और राज्य सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। इस प्रदर्शन में एसएफआई (SFI), डीवाईएफआई (DYFI) और एडवा (AIDWA) सहित कई अन्य जनसंगठनों के कार्यकर्ता भी शामिल हुए। जिले के विभिन्न प्रखंडों से आए प्रदर्शनकारी सुबह लगभग 11 बजे डीबी रोड स्थित जिला परिषद परिसर में एकत्र हुए। देखें, मौके से आई तस्वीरें… संविदा कर्मियों को स्थायी करने की मांग जिला परिषद परिसर में एक सभा आयोजित की गई, जिसके बाद सभी प्रदर्शनकारी जुलूस की शक्ल में जिला मुख्यालय की ओर बढ़े। जुलूस के समाहरणालय पहुंचने पर कलेक्ट्रेट का घेराव किया गया। आंदोलनकारियों ने सरकार के समक्ष 20 से अधिक मांगें प्रस्तुत कीं। इनमें रसोइया, आशा, ममता, आंगनबाड़ी और कूरियर कार्यकर्ताओं सहित सभी संविदा कर्मियों को स्थायी करने और उन्हें न्यूनतम 26 हजार रुपए मासिक वेतन देने की मांग प्रमुख थी। बेरोजगार युवाओं को 5 हजार रुपए भत्ता मिले इसके अतिरिक्त, किसान और मजदूर विरोधी बताए जा रहे चारों लेबर कोड को रद्द करने तथा बेरोजगार युवाओं को प्रतिमाह 5 हजार रुपए बेरोजगारी भत्ता प्रदान करने की भी मांग की गई। प्रदर्शनकारियों ने सहरसा नगर निगम क्षेत्र में जल निकासी और पेयजल की बेहतर व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की। उन्होंने पूर्वी कोसी तटबंध के बाहर जलजमाव के स्थायी समाधान तथा मखाना और मछली पालन के लिए ठोस नीति बनाने पर भी जोर दिया। बाढ़ और सूखे की समस्या के स्थायी समाधान के लिए वराह क्षेत्र में हाईडैम के निर्माण की मांग भी आंदोलनकारियों द्वारा उठाई गई। अन्य मांगों में बिजली के निजीकरण और प्रीपेड/स्मार्ट मीटर लगाने पर रोक लगाना, किसानों को सिंचाई के लिए मुफ्त बिजली उपलब्ध कराना, विभिन्न करों को वापस लेना और पेट्रोलियम पदार्थों की कीमतें कम करना शामिल था। आंदोलनकारियों ने शिक्षा और स्वास्थ्य के निजीकरण पर रोक लगाकर इन्हें सभी के लिए मुफ्त करने की भी मांग की।


