संतकबीरनगर जिले के दक्षिणी छोर पर सरयू नदी का जलस्तर बढ़ने से पौली और हैंसर ब्लॉक के तटवर्ती गांवों में बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। बिड़हरघाट में सरयू का जलस्तर पिछले 24 घंटे से स्थिर बना हुआ है। नदी खतरे के निशान 79.400 मीटर से महज पांच सेंटीमीटर नीचे 79.350 मीटर पर बह रही है। करीब एक दर्जन गांव बाढ़ के पानी से घिर गए हैं, जबकि प्रशासन ने आठ गांवों को मैरुंड घोषित किया है। सरयू का पानी रामपुर मकदूमपुर से मकदूमपुर-बहराडाड़ी एमबीडी बांध तक पहुंच गया है। कई गांवों में पानी घुसने लगा है। बाढ़ की आशंका को देखते हुए कुछ ग्रामीण घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों और तटबंधों की ओर जाने लगे हैं। केंद्रीय जल आयोग के अनुसार गुरुवार शाम नदी का जलस्तर 79.350 मीटर दर्ज किया गया था, जो शुक्रवार सुबह और शाम तक स्थिर रहा। गायघाट दक्षिणी गांव में बढ़ा बाढ़ का दबाव हैंसर ब्लॉक के करीब दो हजार आबादी वाले गायघाट दक्षिणी गांव को बाढ़ से बचाने के लिए प्रशासन और ग्रामीणों ने रिंग बांध बनाए थे। हालांकि, बाढ़ के बढ़ते दबाव के कारण मिट्टी की बोरियां टूटने लगी हैं और पानी गांव की ओर बढ़ रहा है। गांव के चारों तरफ पानी पहुंचने से ग्रामीणों की मुश्किलें बढ़ गई हैं।
ग्रामीणों के मुताबिक घरों में पानी घुसने का खतरा बना हुआ है। कई लोग जरूरी सामान और पशुओं को लेकर सुरक्षित स्थानों की ओर जाने लगे हैं। बाढ़ के पानी में फसल और हरा चारा डूब गया है। गांव से बाहर निकलने वाले रास्ते भी जलमग्न हो गए हैं। गांव निवासी चंदन, सुरेश, शंभू, हरिकेश, परमात्मा और नंदू आदि ने बताया कि बाढ़ का दबाव लगातार बढ़ रहा है। तमाम प्रयासों के बावजूद पानी गांव में पहुंचना शुरू हो गया है। घरों में रखा खाद्यान्न और अन्य सामान भी पानी में डूबने की आशंका है। ग्रामीण जरूरी सामान और पशुओं को लेकर एमबीडी तटबंध पर पहुंच रहे हैं।
राप्ती का जलस्तर घटा, लोगों ने ली राहत की सांस वहीं, सिंचाई विभाग के अनुसार राप्ती नदी के जलस्तर में शुक्रवार को 37 सेंटीमीटर की गिरावट दर्ज की गई। नदी अब खतरे के निशान 79.50 मीटर से नीचे 76.19 मीटर पर बह रही है। गुरुवार को जलस्तर 76.56 मीटर था। जलस्तर लगातार घटने से खेतों और निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति में सुधार होने लगा है। ड्रेनेज खंड के अधिकारी नदियों के जलस्तर पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। तहसीलदार धनघटा रामजी ने बताया कि बाढ़ प्रभावित गांवों में नावें लगा दी गई हैं। बाढ़ से घिर रहे गांवों की निगरानी बढ़ा दी गई है और सभी हल्का लेखपालों को आवश्यक निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन पूरी तरह अलर्ट है।

