सरकार की अपील-बिजली सब्सिडी छोड़ें सक्षम लोग, विकास में साथ दें

सरकार की अपील-बिजली सब्सिडी छोड़ें सक्षम लोग, विकास में साथ दें

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने राज्य के सक्षम, समृद्ध और आयकरदाता नागरिकों से अपील की है कि वे बिजली सब्सिडी छोड़ें और बिहार के विकास में हिस्सेदार बनें। मुख्यमंत्री ने 125 यूनिट मुफ्त बिजली का लाभ स्वेच्छा से छोड़ने का आह्वान किया है। पटना में रविवार को आयोजित दो दिवसीय ‘पाटलिपुत्र राष्ट्रीय युवा संसद-2.0’ को संबोधित करते हुए उन्होंने यह बात कही। उन्होंने कहा कि संपन्न लोग इस छूट का त्याग कर राज्य के विकास और नव-निर्माण में अपनी भागीदारी निभाएं। उनके सब्सिडी छोड़ने के बाद मिले पैसे विकास कार्य में लगाए जाएंगे। वर्तमान में राज्य सरकार बिना किसी भेदभाव के अमीर और गरीब सभी परिवारों को 125 यूनिट मुफ्त बिजली दे रही है। इस कारण प्रति परिवार प्रतिवर्ष 8 से 10 हजार रुपए बिजली सब्सिडी में सरकार के खर्च हो रहे हैं। सिर्फ बिजली सब्सिडी के मद में ही बिहार सरकार हर साल लगभग 23 हजार करोड़ रुपए खर्च कर रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि उच्च शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना चलाई जा रही है। इसके तहत मेडिकल और इंजीनियरिंग समेत उच्च शिक्षा के छात्रों को 4 लाख रुपए तक की सहायता दी जा रही है। इस पर सरकार का सालाना करीब 18000 करोड़ रुपए खर्च हो रहा है। तकनीक आधारित शिक्षा को मजबूत करने के लिए राज्य के सभी 534 प्रखंडों में स्थापित 700 मॉडल स्कूलों (सरस्वती विद्या निकेतन) के 3.5 लाख विद्यार्थियों के लिए ‘विद्यार्थी साथी ऐप’ की व्यवस्था की गई है। देर रात 1 बजे भी पढ़ाई के दौरान समस्या होने पर महज 1 मिनट के अंदर शिक्षक जुड़कर शंका दूर कर रहे हैं। बिहार में खेलों के विकास के लिए जिलों में 20 नए खेल कॉम्प्लेक्स बनेंगे राज्य में खेलों को बढ़ावा देने और स्पोर्ट्स इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत करने के लिए 20 नए खेल कॉम्प्लेक्स बनाए जा रहे हैं। इससे राज्य के खिलाड़ियों को बेहतर और आधुनिक खेल सुविधाएं मिलेंगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि इन सुविधाओं के दम पर बिहार राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के खेल आयोजनों के प्रमुख केंद्र के रूप में उभरेगा। सभी पंचायतों में खुलेंगे ‘जीविका-सुधा बिक्री केंद्र’, 3,200 ‘सुधा सखी’ बनेंगी जीविका के सहयोग से अगले वर्ष 31 मार्च तक राज्य की सभी 8,053 पंचायतों में ‘जीविका-सुधा बिक्री केंद्र’ स्थापित किए जाएंगे। इसके साथ ही 3,200 ’सुधा सखी’’ तैयार होंगी। हर गांव में दुग्ध उत्पादक सहयोग समिति गठित की जा रही है। कॉम्फेड के कार्यक्रम में सीएम ने कहा कि मार्च तक प्रतिदिन 50 लाख लीटर दूध उत्पादन का लक्ष्य है। अपील की जरूरत क्यों पड़ी?
वर्तमान में 125 यूनिट फ्री बिजली का लाभ अमीर और गरीब सभी को एक समान मिल रहा है। सीमित सरकारी संसाधनों पर इस व्यापक सब्सिडी का बहुत बड़ा वित्तीय दबाव पड़ रहा है। सक्षम नागरिकों के सहयोग से बचाई गई राशि का उपयोग केवल जरूरतमंदों और विकास कार्यों में करने के लिए यह अपील की गई है। सब्सिडी छोड़ने से सरकार को फायदा सक्षम वर्ग द्वारा छूट छोड़ने से सरकारी खजाने पर से हजारों करोड़ रुपये का वित्तीय भार घटेगा। इस राशि का उपयोग राज्य में शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के नए अवसर पैदा करने में होगा। यह बचत की गई राशि बुनियादी ढांचे, सड़कों और बेहतर नागरिक सुविधाओं के निर्माण में लगाई जा सकेगी। सब्सिडी से सरकार पर कितना बोझ? मुख्यमंत्री ने कहा-सब्सिडी के बचे पैसे राज्य के विकास कार्य में लगाए जाएंगे रही है। इस पर सरकार का सालाना करीब 18000 करोड़ रुपए खर्च हो रहा है। तकनीक आधारित शिक्षा को मजबूत करने के लिए राज्य के सभी 534 प्रखंडों में स्थापित 700 मॉडल स्कूलों (सरस्वती विद्या निकेतन) के 3.5 लाख विद्यार्थियों के लिए ‘विद्यार्थी साथी ऐप’ की व्यवस्था की गई है। देर रात 1 बजे भी पढ़ाई के दौरान समस्या होने पर महज 1 मिनट के अंदर शिक्षक जुड़कर शंका दूर कर रहे हैं। 18000 करोड़ रुपए छात्र क्रेडिट कार्ड योजना पर सालाना खर्च हो रहे हैं। 8 से 10 हजार रुपए प्रति परिवार प्रतिवर्ष तक बिजली सब्सिडी में सरकार के जा रहे हैं। 23 हजार करोड़ रुपए बिजली सब्सिडी मद में बिहार सरकार हर साल खर्च कर रही है। बिहार सरकार बिजली और शिक्षा जैसी कल्याणकारी योजनाओं पर सालाना 41 हजार करोड़ रुपए से अधिक खर्च कर रही है। यदि आयकरदाता और संपन्न वर्ग स्वेच्छा से 125 यूनिट मुफ्त बिजली छोड़ते हैं, तो राज्य खजाने को बड़ा संबल मिलेगा। बचा हुआ बजट और सब्सिडी से बचा पैसा बुनियादी ढांचे और रोजगार में लगेगा, जिससे बिहार के नवनिर्माण की रफ्तार तेज होगी। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने राज्य के सक्षम, समृद्ध और आयकरदाता नागरिकों से अपील की है कि वे बिजली सब्सिडी छोड़ें और बिहार के विकास में हिस्सेदार बनें। मुख्यमंत्री ने 125 यूनिट मुफ्त बिजली का लाभ स्वेच्छा से छोड़ने का आह्वान किया है। पटना में रविवार को आयोजित दो दिवसीय ‘पाटलिपुत्र राष्ट्रीय युवा संसद-2.0’ को संबोधित करते हुए उन्होंने यह बात कही। उन्होंने कहा कि संपन्न लोग इस छूट का त्याग कर राज्य के विकास और नव-निर्माण में अपनी भागीदारी निभाएं। उनके सब्सिडी छोड़ने के बाद मिले पैसे विकास कार्य में लगाए जाएंगे। वर्तमान में राज्य सरकार बिना किसी भेदभाव के अमीर और गरीब सभी परिवारों को 125 यूनिट मुफ्त बिजली दे रही है। इस कारण प्रति परिवार प्रतिवर्ष 8 से 10 हजार रुपए बिजली सब्सिडी में सरकार के खर्च हो रहे हैं। सिर्फ बिजली सब्सिडी के मद में ही बिहार सरकार हर साल लगभग 23 हजार करोड़ रुपए खर्च कर रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि उच्च शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना चलाई जा रही है। इसके तहत मेडिकल और इंजीनियरिंग समेत उच्च शिक्षा के छात्रों को 4 लाख रुपए तक की सहायता दी जा रही है। इस पर सरकार का सालाना करीब 18000 करोड़ रुपए खर्च हो रहा है। तकनीक आधारित शिक्षा को मजबूत करने के लिए राज्य के सभी 534 प्रखंडों में स्थापित 700 मॉडल स्कूलों (सरस्वती विद्या निकेतन) के 3.5 लाख विद्यार्थियों के लिए ‘विद्यार्थी साथी ऐप’ की व्यवस्था की गई है। देर रात 1 बजे भी पढ़ाई के दौरान समस्या होने पर महज 1 मिनट के अंदर शिक्षक जुड़कर शंका दूर कर रहे हैं। बिहार में खेलों के विकास के लिए जिलों में 20 नए खेल कॉम्प्लेक्स बनेंगे राज्य में खेलों को बढ़ावा देने और स्पोर्ट्स इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत करने के लिए 20 नए खेल कॉम्प्लेक्स बनाए जा रहे हैं। इससे राज्य के खिलाड़ियों को बेहतर और आधुनिक खेल सुविधाएं मिलेंगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि इन सुविधाओं के दम पर बिहार राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के खेल आयोजनों के प्रमुख केंद्र के रूप में उभरेगा। सभी पंचायतों में खुलेंगे ‘जीविका-सुधा बिक्री केंद्र’, 3,200 ‘सुधा सखी’ बनेंगी जीविका के सहयोग से अगले वर्ष 31 मार्च तक राज्य की सभी 8,053 पंचायतों में ‘जीविका-सुधा बिक्री केंद्र’ स्थापित किए जाएंगे। इसके साथ ही 3,200 ’सुधा सखी’’ तैयार होंगी। हर गांव में दुग्ध उत्पादक सहयोग समिति गठित की जा रही है। कॉम्फेड के कार्यक्रम में सीएम ने कहा कि मार्च तक प्रतिदिन 50 लाख लीटर दूध उत्पादन का लक्ष्य है। अपील की जरूरत क्यों पड़ी?
वर्तमान में 125 यूनिट फ्री बिजली का लाभ अमीर और गरीब सभी को एक समान मिल रहा है। सीमित सरकारी संसाधनों पर इस व्यापक सब्सिडी का बहुत बड़ा वित्तीय दबाव पड़ रहा है। सक्षम नागरिकों के सहयोग से बचाई गई राशि का उपयोग केवल जरूरतमंदों और विकास कार्यों में करने के लिए यह अपील की गई है। सब्सिडी छोड़ने से सरकार को फायदा सक्षम वर्ग द्वारा छूट छोड़ने से सरकारी खजाने पर से हजारों करोड़ रुपये का वित्तीय भार घटेगा। इस राशि का उपयोग राज्य में शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के नए अवसर पैदा करने में होगा। यह बचत की गई राशि बुनियादी ढांचे, सड़कों और बेहतर नागरिक सुविधाओं के निर्माण में लगाई जा सकेगी। सब्सिडी से सरकार पर कितना बोझ? मुख्यमंत्री ने कहा-सब्सिडी के बचे पैसे राज्य के विकास कार्य में लगाए जाएंगे रही है। इस पर सरकार का सालाना करीब 18000 करोड़ रुपए खर्च हो रहा है। तकनीक आधारित शिक्षा को मजबूत करने के लिए राज्य के सभी 534 प्रखंडों में स्थापित 700 मॉडल स्कूलों (सरस्वती विद्या निकेतन) के 3.5 लाख विद्यार्थियों के लिए ‘विद्यार्थी साथी ऐप’ की व्यवस्था की गई है। देर रात 1 बजे भी पढ़ाई के दौरान समस्या होने पर महज 1 मिनट के अंदर शिक्षक जुड़कर शंका दूर कर रहे हैं। 18000 करोड़ रुपए छात्र क्रेडिट कार्ड योजना पर सालाना खर्च हो रहे हैं। 8 से 10 हजार रुपए प्रति परिवार प्रतिवर्ष तक बिजली सब्सिडी में सरकार के जा रहे हैं। 23 हजार करोड़ रुपए बिजली सब्सिडी मद में बिहार सरकार हर साल खर्च कर रही है। बिहार सरकार बिजली और शिक्षा जैसी कल्याणकारी योजनाओं पर सालाना 41 हजार करोड़ रुपए से अधिक खर्च कर रही है। यदि आयकरदाता और संपन्न वर्ग स्वेच्छा से 125 यूनिट मुफ्त बिजली छोड़ते हैं, तो राज्य खजाने को बड़ा संबल मिलेगा। बचा हुआ बजट और सब्सिडी से बचा पैसा बुनियादी ढांचे और रोजगार में लगेगा, जिससे बिहार के नवनिर्माण की रफ्तार तेज होगी।  

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