सरई बायपास का निर्माण सात साल बाद भी अधूरा:17KM सड़क पर 10 करोड़ खर्च, जमीन मालिकों के 40 करोड़ रुपए के मुआवजे का इंतजार

सरई बायपास का निर्माण सात साल बाद भी अधूरा:17KM सड़क पर 10 करोड़ खर्च, जमीन मालिकों के 40 करोड़ रुपए के मुआवजे का इंतजार

सिंगरौली के सरई में बाजार को जाम से राहत देने के लिए प्रस्तावित बायपास सड़क का निर्माण सात साल बाद भी पूरा नहीं हुआ है। 17 किलोमीटर लंबी सड़क पर अब तक 10 करोड़ रुपए से ज्यादा खर्च हो चुके हैं, लेकिन जमीन अधिग्रहण और मुआवजे का मामला अटकने से काम बंद है। लोक निर्माण विभाग के मुताबिक, निर्माण आगे बढ़ाने के लिए जमीन मालिकों को करीब 40 करोड़ रुपए मुआवजा देना होगा। 2019 में मिली थी निर्माण की मंजूरी सरई बायपास को 2019 में मंजूरी मिली थी। उस समय 17 किलोमीटर सड़क बनाने के लिए करीब 19 करोड़ रुपए का प्रस्ताव तैयार किया गया था। शुरुआत में पुलिया और कई जगह डब्ल्यूबीएम सड़क बनाई गई। इसके बाद सड़क चौड़ी करने के लिए जमीन अधिग्रहण और मुआवजे की जरूरत सामने आई। इसी वजह से निर्माण रुक गया। अब विभाग ने संशोधित प्राक्कलन मंजूरी के लिए वरिष्ठ कार्यालय भेजा है। बताया जा रहा है कि परियोजना पूरी करने के लिए करीब 45 करोड़ रुपए के बजट की जरूरत पड़ सकती है। मुआवजे की राशि मंजूर होने के बाद ही आगे का काम शुरू होगा। बायपास नहीं बनने से बाजार में जाम की समस्या सरई निवासी अनिल द्विवेदी ने बताया कि बायपास पूरा होने का इंतजार करते हुए छह साल से ज्यादा समय बीत गया है। निर्माण कब पूरा होगा, इसकी स्पष्ट जानकारी नहीं मिल रही। उन्होंने कहा कि सरकार की उदासीनता के कारण स्थानीय लोगों को परेशानी हो रही है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व सरपंच रामबालक द्विवेदी ने कहा कि बायपास नहीं बनने से कोल वाहनों के कारण बाजार में रोज जाम लगता है। सड़क हादसों का खतरा भी बना रहता है। कांग्रेस नेता डॉ. भाईलाल शर्मा ने कहा कि 17 किलोमीटर सड़क बनाने में वर्षों लगना सरकार के दावों पर सवाल खड़े करता है। मुआवजे के लिए 40 करोड़ रुपए की जरूरत लोक निर्माण विभाग की कार्यपालन यंत्री तेजस्विनी शुक्ला ने बताया कि निर्माणाधीन सड़क का संशोधित प्राक्कलन मंजूरी के लिए वरिष्ठ कार्यालय भेजा गया है। जमीन मालिकों को मुआवजा देने के लिए करीब 40 करोड़ रुपए की जरूरत है। डीपीआर तैयार करते समय जमीन का अधिग्रहण नहीं हो पाया था। राशि मंजूर होने के बाद निर्माण फिर शुरू कराया जाएगा।

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