समस्तीपुर शहर के 12 पत्थर स्थित शिव काली दुर्गा मंदिर में दुर्गा पूजा को लेकर काफी उत्साह है। मंदिर परिसर में बेलवा निमंत्रण कार्यक्रम हुआ। ढोल-नगाड़ों, मंत्रोच्चारण और जय माता दी के जयकारों के बीच श्रद्धालुओं ने मां दुर्गा को आमंत्रित किया। बड़ी संख्या में भक्तों ने इसमें हिस्सा लिया। आयोजन समिति के अध्यक्ष शिवानंद बम-बम कुमार ने बताया कि मंदिर में 2001 से दुर्गा पूजा हो रही है। इसकी शुरुआत एक दृष्टिबाधित व्यक्ति से जुड़ी मान्यता से हुई थी, जिसकी आंखों की रोशनी मां दुर्गा के आशीर्वाद से लौट आई थी। हर साल पूजा को भव्य बनाने के लिए खास तैयारी होती है। इस बार भी मंदिर में आकर्षक सजावट और अनुष्ठानों की व्यवस्था की जा रही है। इस आयोजन पर करीब 20 से 25 लाख रुपये खर्च किए जाते हैं। आयोजन का उद्देश्य धार्मिक परंपराओं को आगे बढ़ाने के साथ श्रद्धालुओं को मां दुर्गा की आराधना के लिए बेहतर वातावरण उपलब्ध कराना है। दरभंगा से आते हैं पूजा कराने वाले आचार्य मंदिर में दुर्गा पूजा संपन्न कराने के लिए दरभंगा से आचार्य आते हैं। आचार्य ब्रजकिशोर झा ने बताया कि धार्मिक परंपरा के अनुसार बेलवा निमंत्रण कार्यक्रम आयोजित किया गया है। इसके बाद अगले दिन सुबह मां दुर्गा का आगमन होगा। श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए सुबह नौ बजे से माता का पट खोल दिया जाएगा। इसके बाद भक्त मां दुर्गा का दर्शन कर पूजा-अर्चना कर सकेंगे। आचार्य ने बताया कि दुर्गा पूजा के दौरान विधि-विधान और वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ सभी धार्मिक अनुष्ठान संपन्न कराए जाएंगे। बेलवा निमंत्रण कार्यक्रम को माता के आगमन से पहले की महत्वपूर्ण परंपरा माना जाता है। इसमें श्रद्धालु मां दुर्गा को पूजा में शामिल होने के लिए प्रतीकात्मक रूप से आमंत्रित करते हैं। इस परंपरा के निर्वहन के साथ ही पूजा का उत्साह और बढ़ गया है। हाथी पर आगमन और हाथी पर ही विदाई की मान्यता आचार्य ब्रजकिशोर झा ने बताया कि इस वर्ष मां दुर्गा का आगमन हाथी पर हुआ है और विदाई भी हाथी पर ही होने की मान्यता है। धार्मिक मान्यताओं में हाथी को सुख, शांति, समृद्धि और खुशहाली का प्रतीक माना जाता है। ऐसे में श्रद्धालु इसे शुभ संकेत के रूप में देख रहे हैं। भक्तों को उम्मीद है कि मां दुर्गा की कृपा से समाज और परिवारों में सुख-समृद्धि आएगी तथा लोगों के जीवन में शांति बनी रहेगी। बेलवा निमंत्रण कार्यक्रम के दौरान मंदिर परिसर में भक्ति और उत्साह का माहौल देखने को मिला। ढोल-नगाड़ों के साथ निकले श्रद्धालुओं ने पारंपरिक रीति-रिवाजों का पालन करते हुए माता को निमंत्रण दिया। अब सभी की निगाहें मां दुर्गा के आगमन और सुबह नौ बजे से शुरू होने वाले दर्शन पर टिकी हैं। मंदिर समिति को उम्मीद है कि पूजा के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचेंगे और पूरा इलाका भक्तिमय वातावरण में डूबा रहेगा। समस्तीपुर शहर के 12 पत्थर स्थित शिव काली दुर्गा मंदिर में दुर्गा पूजा को लेकर काफी उत्साह है। मंदिर परिसर में बेलवा निमंत्रण कार्यक्रम हुआ। ढोल-नगाड़ों, मंत्रोच्चारण और जय माता दी के जयकारों के बीच श्रद्धालुओं ने मां दुर्गा को आमंत्रित किया। बड़ी संख्या में भक्तों ने इसमें हिस्सा लिया। आयोजन समिति के अध्यक्ष शिवानंद बम-बम कुमार ने बताया कि मंदिर में 2001 से दुर्गा पूजा हो रही है। इसकी शुरुआत एक दृष्टिबाधित व्यक्ति से जुड़ी मान्यता से हुई थी, जिसकी आंखों की रोशनी मां दुर्गा के आशीर्वाद से लौट आई थी। हर साल पूजा को भव्य बनाने के लिए खास तैयारी होती है। इस बार भी मंदिर में आकर्षक सजावट और अनुष्ठानों की व्यवस्था की जा रही है। इस आयोजन पर करीब 20 से 25 लाख रुपये खर्च किए जाते हैं। आयोजन का उद्देश्य धार्मिक परंपराओं को आगे बढ़ाने के साथ श्रद्धालुओं को मां दुर्गा की आराधना के लिए बेहतर वातावरण उपलब्ध कराना है। दरभंगा से आते हैं पूजा कराने वाले आचार्य मंदिर में दुर्गा पूजा संपन्न कराने के लिए दरभंगा से आचार्य आते हैं। आचार्य ब्रजकिशोर झा ने बताया कि धार्मिक परंपरा के अनुसार बेलवा निमंत्रण कार्यक्रम आयोजित किया गया है। इसके बाद अगले दिन सुबह मां दुर्गा का आगमन होगा। श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए सुबह नौ बजे से माता का पट खोल दिया जाएगा। इसके बाद भक्त मां दुर्गा का दर्शन कर पूजा-अर्चना कर सकेंगे। आचार्य ने बताया कि दुर्गा पूजा के दौरान विधि-विधान और वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ सभी धार्मिक अनुष्ठान संपन्न कराए जाएंगे। बेलवा निमंत्रण कार्यक्रम को माता के आगमन से पहले की महत्वपूर्ण परंपरा माना जाता है। इसमें श्रद्धालु मां दुर्गा को पूजा में शामिल होने के लिए प्रतीकात्मक रूप से आमंत्रित करते हैं। इस परंपरा के निर्वहन के साथ ही पूजा का उत्साह और बढ़ गया है। हाथी पर आगमन और हाथी पर ही विदाई की मान्यता आचार्य ब्रजकिशोर झा ने बताया कि इस वर्ष मां दुर्गा का आगमन हाथी पर हुआ है और विदाई भी हाथी पर ही होने की मान्यता है। धार्मिक मान्यताओं में हाथी को सुख, शांति, समृद्धि और खुशहाली का प्रतीक माना जाता है। ऐसे में श्रद्धालु इसे शुभ संकेत के रूप में देख रहे हैं। भक्तों को उम्मीद है कि मां दुर्गा की कृपा से समाज और परिवारों में सुख-समृद्धि आएगी तथा लोगों के जीवन में शांति बनी रहेगी। बेलवा निमंत्रण कार्यक्रम के दौरान मंदिर परिसर में भक्ति और उत्साह का माहौल देखने को मिला। ढोल-नगाड़ों के साथ निकले श्रद्धालुओं ने पारंपरिक रीति-रिवाजों का पालन करते हुए माता को निमंत्रण दिया। अब सभी की निगाहें मां दुर्गा के आगमन और सुबह नौ बजे से शुरू होने वाले दर्शन पर टिकी हैं। मंदिर समिति को उम्मीद है कि पूजा के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचेंगे और पूरा इलाका भक्तिमय वातावरण में डूबा रहेगा।

