सपा को एमएलसी चुनाव में धांधली की आशंका:बलिया के डीएम, एडीएम पर आचार संहिता उल्लंघन का आरोप, ECI से की शिकायत

सपा को एमएलसी चुनाव में धांधली की आशंका:बलिया के डीएम, एडीएम पर आचार संहिता उल्लंघन का आरोप, ECI से की शिकायत

उत्तर प्रदेश में शिक्षक विधान परिषद चुनाव को लेकर समाजवादी पार्टी ने भाजपा और प्रदेश सरकार पर चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश करने का आरोप लगाया है। सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के निर्देश पर पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष श्याम लाल पाल ने मुख्य निर्वाचन अधिकारी को ज्ञापन सौंपकर आगरा खंड-शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में मतदान की निष्पक्षता सुनिश्चित करने की मांग की है। पार्टी का आरोप है कि 23 अक्टूबर को होने वाले मतदान के लिए भाजपा प्रत्याशी हरी किशोर तिवारी के समर्थक माने जाने वाले इंजीनियरों को पीठासीन अधिकारी नियुक्त किया जा रहा है। सपा ने ऐसे अधिकारियों को हटाकर निष्पक्ष अधिकारियों की तैनाती, मतदान प्रक्रिया की वीडियो रिकॉर्डिंग और संवेदनशील मतदान केंद्रों पर स्वतंत्र केंद्रीय पर्यवेक्षक नियुक्त करने की मांग की है। डीएम, एडीएम और डीआईओएस पर आचार संहिता के उल्लंघन का आरोप सपा ने अपने ज्ञापन में बलिया के जिलाधिकारी, अपर जिलाधिकारी (राजस्व), जिला विद्यालय निरीक्षक (डीआईओएस) और जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) सहित अन्य संबंधित अधिकारियों के खिलाफ भी आदर्श आचार संहिता के उल्लंघन के आरोपों में कठोर कार्रवाई की मांग की है। पार्टी का कहना है कि चुनाव में सरकारी मशीनरी का कथित इस्तेमाल लोकतांत्रिक प्रक्रिया और मतदान की गोपनीयता के लिए गंभीर चिंता का विषय है। डिप्लोमा इंजीनियर्स संघ से जुड़े अधिकारियों की तैनाती पर सवाल सपा ने आरोप लगाया है कि आगरा खंड-शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में मतदान कराने के लिए डिप्लोमा इंजीनियर्स संघ से जुड़े इंजीनियरों को पीठासीन अधिकारी बनाया जा रहा है। पार्टी ने अपने ज्ञापन में कहा है कि भाजपा प्रत्याशी हरी किशोर तिवारी लंबे समय तक डिप्लोमा इंजीनियर्स संघ के अध्यक्ष और राज्य कर्मचारियों के नेता रहे हैं। ऐसे में संघ से जुड़े अधिकारियों की मतदान प्रक्रिया में तैनाती से निष्पक्षता पर सवाल खड़े हो सकते हैं। पार्टी का दावा है कि प्रदेश सरकार और भाजपा के दबाव में रिटर्निंग ऑफिसर (आरओ) तथा असिस्टेंट रिटर्निंग ऑफिसर (एआरओ) के माध्यम से कथित तौर पर भाजपा समर्थक माने जाने वाले अधिकारियों को पीठासीन अधिकारी बनाया जा रहा है। सपा ने आशंका जताई है कि इससे मतदान केंद्रों के भीतर चुनाव प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है और फर्जी मतदान की आशंका बढ़ सकती है। ज्ञापन में इसे ‘साइलेंट बूथ कैप्चरिंग’ की आशंका से जोड़ते हुए कहा गया है कि मतदान केंद्रों के भीतर किसी भी प्रकार की अनियमितता रोकने के लिए पहले से प्रभावी व्यवस्था की जानी चाहिए। हालांकि, ये आरोप सपा की ओर से लगाए गए हैं। इनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और ज्ञापन में संबंधित अधिकारियों या निर्वाचन प्राधिकरण का पक्ष शामिल नहीं है। सभी संदिग्ध पीठासीन अधिकारियों को हटाने की मांग समाजवादी पार्टी ने मांग की है कि डिप्लोमा इंजीनियर्स संघ से जुड़े या भाजपा प्रत्याशी के प्रभाव में बताए जा रहे सभी पीठासीन अधिकारियों को तत्काल हटाया जाए। उनके स्थान पर ऐसे केंद्र और राज्य सरकार के अधिकारियों की नियुक्ति की जाए, जिनकी निष्पक्षता पर कोई विवाद न हो। पार्टी का कहना है कि शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में मतदान करने वाले मतदाताओं को यह भरोसा मिलना चाहिए कि उनका वोट पूरी तरह गोपनीय रहेगा और मतदान प्रक्रिया किसी राजनीतिक दल के प्रभाव में संचालित नहीं होगी। सपा ने मतदान की पूरी प्रक्रिया की वीडियो रिकॉर्डिंग कराने की मांग भी उठाई है। इसके साथ ही संवेदनशील मतदान केंद्रों के भीतर स्वतंत्र केंद्रीय पर्यवेक्षक नियुक्त करने की मांग की गई है, ताकि मतदान के दौरान होने वाली गतिविधियों पर निगरानी रखी जा सके और किसी शिकायत की स्थिति में साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई संभव हो। पार्टी ने निर्वाचन अधिकारियों से यह सुनिश्चित करने को कहा है कि मतदान कर्मियों की नियुक्ति निष्पक्षता के मानकों के अनुरूप हो और किसी अधिकारी की राजनीतिक निकटता के आधार पर चुनाव प्रक्रिया प्रभावित न होने पाए। विद्यालय प्रबंधकों पर दबाव बनाने का आरोप सपा ने अपने ज्ञापन में बलिया जिले में चुनाव को प्रभावित करने के लिए सरकारी अधिकारियों पर दबाव बनाने और विद्यालयों के प्रबंधकों तथा शिक्षकों को कथित तौर पर डराने-धमकाने का आरोप लगाया है। पार्टी के अनुसार, जिले के डीएम और एडीएम (राजस्व) प्रदेश सरकार के मंत्रियों तथा भाजपा नेताओं के दबाव में वाराणसी खंड-शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र की चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित कर रहे हैं। ज्ञापन में दावा किया गया है कि 19 अक्टूबर 2026 को जिला विद्यालय निरीक्षक ने कई विद्यालयों के प्रबंधकों को बुलाकर बैठक की। सपा का आरोप है कि इस बैठक में भाजपा प्रत्याशी के पक्ष में मतदान करने के लिए अनुचित दबाव बनाया गया। पार्टी ने बलिया जिले के नगरा ब्लॉक में वित्तविहीन विद्यालयों के प्रबंधकों को बुलाकर बैठक किए जाने पर भी सवाल उठाए हैं। सपा का कहना है कि वित्तविहीन विद्यालयों के शिक्षकों को कैशलेस इलाज की सुविधा में शामिल नहीं किए जाने के मुद्दे का इस्तेमाल कथित तौर पर दबाव बनाने और उत्पीड़न के लिए किया जा रहा है। पार्टी ने भाजपा नेताओं के साथ ऐसी बैठकों को भी आदर्श आचार संहिता के उल्लंघन से जोड़ते हुए जांच की मांग की है। ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि शिक्षा विभाग के अधिकारियों के माध्यम से विद्यालय प्रबंधकों, प्रधानाचार्यों और शिक्षकों पर दबाव बनाया जा रहा है। पार्टी ने अग्निशमन विभाग, विद्युत विभाग और माध्यमिक शिक्षा परिषद के अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। सपा का दावा है कि इन विभागों के कुछ अधिकारियों के जरिए शिक्षण संस्थानों से जुड़े लोगों को प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है। अंतिम मतदाता सूची के दोबारा सत्यापन पर भी आपत्ति समाजवादी पार्टी ने बलिया के जिला विद्यालय निरीक्षक की ओर से विधान परिषद चुनाव के लिए जारी अंतिम मतदाता सूची का दोबारा सत्यापन कराने की प्रक्रिया पर भी आपत्ति जताई है। ज्ञापन के अनुसार, डीआईओएस ने पत्र जारी कर अंतिम मतदाता सूची के पुनः सत्यापन की प्रक्रिया शुरू की है। सपा ने इसे नियमों के विरुद्ध बताते हुए आरोप लगाया है कि चुनाव से ठीक पहले इस तरह की प्रक्रिया शिक्षकों और अन्य मतदाताओं के लिए अनावश्यक परेशानी पैदा कर सकती है। पार्टी ने निर्वाचन नियमों के अनुरूप मतदाता सूची से संबंधित सभी कार्यवाही कराने और किसी भी मतदाता को अनुचित रूप से परेशान नहीं करने की मांग की है। पार्टी का कहना है कि मतदाता सूची, मतदान कर्मियों की नियुक्ति और मतदान केंद्रों की निगरानी जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर किसी भी तरह की संदिग्ध गतिविधि चुनाव की निष्पक्षता को प्रभावित कर सकती है। इसलिए निर्वाचन अधिकारियों को सभी शिकायतों की जांच कर आवश्यक कदम उठाने चाहिए। सपा ने निर्वाचन आयोग की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। पार्टी का कहना है कि चुनाव की गोपनीयता और निष्पक्षता से जुड़े गंभीर मुद्दों पर आयोग को मूकदर्शक बने रहने के बजाय तत्काल हस्तक्षेप करना चाहिए। पार्टी ने मांग की है कि शिकायतों की समयबद्ध जांच कराई जाए और मतदान से पहले आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाए जाएं। चुनाव से पहले निष्पक्षता सुनिश्चित करने पर जोर 23 अक्टूबर को प्रस्तावित मतदान से पहले समाजवादी पार्टी ने निर्वाचन व्यवस्था में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने की मांग तेज कर दी है। पार्टी का कहना है कि मतदान कर्मियों की तैनाती से लेकर मतदाता सूची के सत्यापन तक सभी प्रक्रियाएं नियमों के अनुसार होनी चाहिए। मतदान केंद्रों पर वीडियो रिकॉर्डिंग और स्वतंत्र पर्यवेक्षकों की मौजूदगी से अनियमितताओं की आशंका कम की जा सकती है। मुख्य निर्वाचन अधिकारी को ज्ञापन सौंपने वाले सपा प्रतिनिधिमंडल में केके श्रीवास्तव, डॉ. हरिश्चन्द्र सिंह यादव और राधेश्याम सिंह शामिल रहे।

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