सदर अस्पताल में आधा ब्लड चढ़ने के बाद ड्रिप हटाई:जमुई में स्वास्थ्यकर्मी ने प्लाज्मा को पानी बताया, डॉक्टर ने बचा ब्लड दोबारा चढ़ाया

सदर अस्पताल में आधा ब्लड चढ़ने के बाद ड्रिप हटाई:जमुई में स्वास्थ्यकर्मी ने प्लाज्मा को पानी बताया, डॉक्टर ने बचा ब्लड दोबारा चढ़ाया

जमुई सदर अस्पताल में मंगलवार देर शाम एक मरीज के साथ लापरवाही का मामला सामने आया है। महिसौड़ी निवासी नीतू वर्णवाल को आधा यूनिट ब्लड चढ़ाने के बाद स्वास्थ्यकर्मी ने ड्रिप हटा दी और बचे हुए प्लाज्मा को पानी बता दिया। इस घटना के बाद पीड़िता नीतू वर्णवाल ने सिविल सर्जन के पास शिकायत दर्ज कराई। शिकायत मिलने पर स्वास्थ्यकर्मियों के बीच हड़कंप मच गया। इसके बाद इमरजेंसी में तैनात डॉक्टर नवीन गुप्ता ने दोबारा बचा हुआ ब्लड चढ़ाया। डॉक्टर ने ब्लड चढ़ाने की दी थी सलाह पीड़िता नीतू वर्णवाल ने बताया कि उन्हें खून की कमी थी, जिसके लिए डॉक्टर ने ब्लड चढ़ाने की सलाह दी थी। उनकी बेटी निकिता कुमारी ने ब्लड डोनेट किया था, जिसे दोपहर एक बजे के बाद चढ़ाना शुरू किया गया था। नीतू के अनुसार, करीब आधा यूनिट ब्लड चढ़ने के बाद एक स्वास्थ्यकर्मी ने आकर ड्रिप हटा दी और कहा कि ब्लड खत्म हो गया है, अब सिर्फ पानी बचा है। उन्होंने स्वास्थ्यकर्मियों पर लापरवाही का आरोप लगाया और बताया कि ब्लड लगाने के बाद किसी ने उन्हें कोई दिशा-निर्देश नहीं दिए थे। ब्लड को कुछ टाइम बाद हिलाना चाहिए था वहीं, स्वास्थ्यकर्मियों का कहना था कि ब्लड को कुछ समय के अंतराल पर हिलाना चाहिए था ताकि सीरम के साथ ब्लड भी चढ़ जाए। ऐसा न करने पर सीरम बच गया, जो पानी जैसा दिख रहा था। पीड़िता ने कहा कि उन्हें इस बारे में कोई जानकारी नहीं थी और उन्हें पहले बताया जाना चाहिए था। सदर अस्पताल जमुई के प्रभारी उपाधीक्षक डॉक्टर थनीष कुमार ने मामले की जानकारी होने की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि ब्लड बचा हुआ था और प्लाज्मा को पानी समझकर महिला जानकारी के अभाव में शिकायत करने गई थी। डॉक्टर थनीष कुमार ने यह भी कहा कि इमरजेंसी ड्यूटी में डॉक्टर मौजूद थे और अगर कोई शिकायत थी तो डॉक्टर को बताना चाहिए था। उन्होंने आश्वासन दिया कि ब्लड किसने खोला है, इसकी जांच की जा रही है। जमुई सदर अस्पताल में मंगलवार देर शाम एक मरीज के साथ लापरवाही का मामला सामने आया है। महिसौड़ी निवासी नीतू वर्णवाल को आधा यूनिट ब्लड चढ़ाने के बाद स्वास्थ्यकर्मी ने ड्रिप हटा दी और बचे हुए प्लाज्मा को पानी बता दिया। इस घटना के बाद पीड़िता नीतू वर्णवाल ने सिविल सर्जन के पास शिकायत दर्ज कराई। शिकायत मिलने पर स्वास्थ्यकर्मियों के बीच हड़कंप मच गया। इसके बाद इमरजेंसी में तैनात डॉक्टर नवीन गुप्ता ने दोबारा बचा हुआ ब्लड चढ़ाया। डॉक्टर ने ब्लड चढ़ाने की दी थी सलाह पीड़िता नीतू वर्णवाल ने बताया कि उन्हें खून की कमी थी, जिसके लिए डॉक्टर ने ब्लड चढ़ाने की सलाह दी थी। उनकी बेटी निकिता कुमारी ने ब्लड डोनेट किया था, जिसे दोपहर एक बजे के बाद चढ़ाना शुरू किया गया था। नीतू के अनुसार, करीब आधा यूनिट ब्लड चढ़ने के बाद एक स्वास्थ्यकर्मी ने आकर ड्रिप हटा दी और कहा कि ब्लड खत्म हो गया है, अब सिर्फ पानी बचा है। उन्होंने स्वास्थ्यकर्मियों पर लापरवाही का आरोप लगाया और बताया कि ब्लड लगाने के बाद किसी ने उन्हें कोई दिशा-निर्देश नहीं दिए थे। ब्लड को कुछ टाइम बाद हिलाना चाहिए था वहीं, स्वास्थ्यकर्मियों का कहना था कि ब्लड को कुछ समय के अंतराल पर हिलाना चाहिए था ताकि सीरम के साथ ब्लड भी चढ़ जाए। ऐसा न करने पर सीरम बच गया, जो पानी जैसा दिख रहा था। पीड़िता ने कहा कि उन्हें इस बारे में कोई जानकारी नहीं थी और उन्हें पहले बताया जाना चाहिए था। सदर अस्पताल जमुई के प्रभारी उपाधीक्षक डॉक्टर थनीष कुमार ने मामले की जानकारी होने की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि ब्लड बचा हुआ था और प्लाज्मा को पानी समझकर महिला जानकारी के अभाव में शिकायत करने गई थी। डॉक्टर थनीष कुमार ने यह भी कहा कि इमरजेंसी ड्यूटी में डॉक्टर मौजूद थे और अगर कोई शिकायत थी तो डॉक्टर को बताना चाहिए था। उन्होंने आश्वासन दिया कि ब्लड किसने खोला है, इसकी जांच की जा रही है।  

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