सतना में बारिश के मौसम के साथ सतना जिले में मच्छरजनित और वायरल बीमारियों का प्रकोप बढ़ता दिखाई दे रहा है। जनवरी से अगस्त तक जिले में डेंगू के 44 और मलेरिया के 40 मरीज सामने आ चुके हैं। इनमें से ज्यादातर मामले बारिश के सीजन में सामने आए हैं। अकेले अगस्त में अब तक डेंगू के 2 और मलेरिया के 7 नए मरीज मिले हैं। बारिश के बाद शहर के कई इलाकों में जलभराव की स्थिति बनी हुई है। लंबे समय से जमा पानी में मच्छरों के लार्वा पनपने की आशंका है। दूसरी ओर जिला अस्पताल की मेडिसिन ओपीडी में भी बुखार और वायरल इंफेक्शन के मरीजों की संख्या बढ़ी है। अगस्त में डेंगू के 2, मलेरिया के 7 मरीज मलेरिया विभाग के आंकड़ों के अनुसार, जनवरी से अगस्त तक मिले 44 डेंगू मरीजों में 29 सतना और 15 मैहर क्षेत्र से हैं। वहीं जिले में सामने आए 40 मलेरिया मरीजों में 37 सतना और 3 मैहर क्षेत्र से संबंधित हैं। अगस्त में अब तक डेंगू के 2 और मलेरिया के 7 मरीज मिलने से स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ी है। बारिश के बाद मच्छरों की संख्या बढ़ने के साथ आने वाले दिनों में मरीजों की संख्या और बढ़ने की आशंका भी बनी हुई है। सतना और मैहर में मरीजों की स्थिति मुंबई से लौटे युवक में मिला मलेरिया हाल ही में उचेहरा ब्लॉक के पोंडी अंतर्गत वीरपुर गांव निवासी 26 वर्षीय डेविड कुमार दहायत मलेरिया पीवी पॉजिटिव पाए गए हैं। बुखार की शिकायत के बाद वे जिला अस्पताल पहुंचे थे। जांच में मलेरिया की पुष्टि होने के बाद डेविड को जिला अस्पताल के पुरुष मेडिकल वार्ड में भर्ती किया गया है। बताया गया कि डेविड हाल ही में मुंबई से लौटे थे। शहर की बस्तियों और खाली प्लॉटों में जमा पानी बारिश के बाद शहर के कई इलाकों में पानी जमा है। धवारी, केशव नगर, टिकुरिया टोला, बजरहा टोला, राजेंद्रनगर और सिंधी कैंप सहित कई क्षेत्रों में जलभराव की स्थिति बनी हुई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि कई स्थानों पर पानी लंबे समय से जमा है। ऐसे स्थान मच्छरों के प्रजनन के लिए अनुकूल बन सकते हैं। रहवासियों ने जलभराव वाले इलाकों में लार्वा विनिष्टीकरण, कीटनाशक छिड़काव और फॉगिंग बढ़ाने की मांग की है। रोज 250 से ज्यादा मरीज पहुंच रहे जिला अस्पताल बारिश के साथ जिला अस्पताल की मेडिसिन ओपीडी में बुखार के मरीजों की संख्या भी बढ़ी है। अस्पताल में रोजाना 250 से अधिक मरीज बुखार की शिकायत लेकर पहुंच रहे हैं। चिकित्सकों के अनुसार, लक्षण और स्थिति के आधार पर मरीजों की खून की जांच कराई जा रही है। कुछ मरीजों में प्लेटलेट्स कम मिलने पर उन्हें निगरानी में रखा जा रहा है, जबकि गंभीर स्थिति वाले मरीजों को अस्पताल में भर्ती कर उपचार दिया जा रहा है। 100 में करीब 50 मरीज वायरल इंफेक्शन से पीड़ित डॉ. बद्री विशाल सिंह, एमडी मेडिसिन के मुताबिक, मेडिसिन ओपीडी में वायरल इंफेक्शन के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ी है। उन्होंने बताया कि करीब 200 मरीजों में औसतन 100 मरीज वायरल इंफेक्शन से प्रभावित मिल रहे हैं। इनमें से करीब 20 से 30 मरीजों को भर्ती करने की जरूरत पड़ रही है, जबकि लगभग 5 मरीजों की स्थिति ऐसी होती है कि उन्हें आईसीयू में रखना पड़ता है। वायरल के साथ ब्रोंकाइटिस और निमोनिया के केस भी डॉ. अखिलेश सिंह, मेडिसिन स्पेशलिस्ट ने बताया कि निजी क्लीनिकों में भी वायरल इंफेक्शन के मरीजों की संख्या बढ़ी है। एक्यूट वायरल के साथ ब्रोंकाइटिस और निमोनिया के मामले भी सामने आ रहे हैं। उन्होंने लोगों को सलाह दी है कि बुखार को सामान्य समझकर नजरअंदाज न करें। लक्षण बने रहने पर चिकित्सकीय जांच कराएं और बिना डॉक्टर की सलाह के घर पर खुद से इलाज शुरू न करें। जमा पानी बना चिंता का कारण बारिश के बाद शहर में कई जगह पानी जमा होने और उसकी पर्याप्त निकासी नहीं होने से मच्छरों के पनपने का खतरा बढ़ गया है। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग और स्थानीय प्रशासन के सामने जलभराव वाले क्षेत्रों में नियमित फॉगिंग, लार्वा नियंत्रण और कीटनाशक छिड़काव सुनिश्चित करने की चुनौती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक, बारिश के मौसम में बुखार, शरीर में दर्द, सिरदर्द, ठंड लगना या अत्यधिक कमजोरी जैसे लक्षण दिखाई देने पर इसे केवल सामान्य वायरल मानकर इलाज नहीं करना चाहिए। डेंगू-मलेरिया की आशंका होने पर समय पर जांच कराना जरूरी है।

