संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय का पूर्वी द्वार दो महीनों में बनकर तैयार हो जाएगा। विश्वविद्यालय में 78 लाख रुपए की लागत से पूर्वी और दक्षिणी दो द्वार बनाए जाने हैं। पूर्वी गेट का निर्माण करीब छह महीने से चल रहा है, लेकिन अभी तक पूरा नहीं हो सका है। अब विश्वविद्यालय प्रशासन ने इसे अगले दो महीने में पूरा करने का लक्ष्य रखा है। इसके बाद दक्षिणी द्वार का निर्माण शुरू किया जाएगा। छह महीने से चल रहा निर्माण विश्वविद्यालय अभियंता राम विजय सिंह ने बताया कि गेट निर्माण के लिए कुल 78 लाख रुपए का बजट है। परियोजना के तहत दो गेट बनाए जाने हैं- पूर्वी द्वार और दक्षिणी द्वार। एक गेट का निर्माण करीब छह महीने से चल रहा है। निर्धारित समय के मुकाबले काम थोड़ा पीछे चल रहा है। अब इसे अगले दो महीने में पूरा करने की योजना है। पहले गेट के बाद दूसरे का काम अभियंता के अनुसार, मौजूदा गेट का निर्माण पूरा होने के बाद दूसरे गेट का निर्माण शुरू किया जाएगा। दूसरे गेट को भी करीब दो महीने में तैयार करने की योजना है। यानी दोनों गेटों का निर्माण चरणबद्ध तरीके से किया जाएगा। पहले निर्माणाधीन गेट को पूरा किया जाएगा और इसके बाद दूसरे गेट का काम शुरू होगा। 78 लाख में तैयार होंगे दोनों द्वार पूरी परियोजना के लिए 78 लाख रुपए का बजट निर्धारित है। इसमें विश्वविद्यालय के दो प्रवेश द्वार तैयार किए जाने हैं। हालांकि अभी एक गेट के निर्माण में ही करीब छह महीने लग चुके हैं और काम तय समय से पीछे चल रहा है। विश्वविद्यालय प्रशासन अब अगले दो महीने में मौजूदा गेट का निर्माण पूरा करने की बात कह रहा है। बाउंड्री के बाद अलग से मिला गेट निर्माण का टेंडर विश्वविद्यालय अभियंता राम विजय सिंह ने बताया कि गेट निर्माण की देरी की एक वजह काम का अलग-अलग चरणों में टेंडर होना है। पहले एजेंसी को बाउंड्री निर्माण का टेंडर दिया गया था। इसके बाद गेट निर्माण के लिए अलग से टेंडर जारी किया गया। इसी वजह से गेट का काम बाद में शुरू हुआ और इसमें देरी हुई। राम विजय सिंह के अनुसार, अगर बाउंड्री और गेट का काम एक साथ कराया जाता तो गेट का निर्माण भी बाउंड्री के साथ ही पूरा हो गया होता। पहले बाउंड्री का काम कराया गया और उसके बाद गेट निर्माण की प्रक्रिया शुरू हुई। इसी वजह से दोनों काम एक साथ पूरा नहीं हो सके।

