श्यामा माई मंदिर में नाबालिग की शादी रुकवाई:रजिस्ट्रेशन काउंटर से लौटा परिवार, मंदिर के पीछे नाबालिग की शादी कराने की कोशिश

श्यामा माई मंदिर में नाबालिग की शादी रुकवाई:रजिस्ट्रेशन काउंटर से लौटा परिवार, मंदिर के पीछे नाबालिग की शादी कराने की कोशिश

दरभंगा के श्यामा माई मंदिर परिसर में मंगलवार देर रात नाबालिग लड़की की शादी होने से बच गई। लड़की की उम्र कम होने की आशंका पर मंदिर के रजिस्ट्रेशन काउंटर से विवाह की अनुमति नहीं मिली। जिसके बाद परिजन मंदिर के पिछले हिस्से में गुपचुप तरीके से शादी कराने की कोशिश कर रहे थे। इसी दौरान बाल विवाह का विरोध करने वाली संस्था प्रयास के प्रतिनिधि जगन्नाथ झा को इसकी जानकारी मिली। उन्होंने मौके पर पहुंचकर विवाह रुकवाने की कोशिश की। परिजनों के नहीं मानने पर उन्होंने विश्वविद्यालय थाना पुलिस को सूचना दी। इसके बाद पुलिस मौके पर पहुंची और लड़का-लड़की को थाने ले गई। लड़की की उम्र 16 साल है जगन्नाथ झा ने बताया कि मंदिर में विवाह के लिए रजिस्ट्रेशन कराने पहुंचे दोनों पक्षों से आधार कार्ड मांगा गया था, लेकिन उन्होंने दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए। लड़की की उम्र कम होने की आशंका पर मंदिर प्रबंधन ने रजिस्ट्रेशन करने से मना कर दिया था। इसके बाद दोनों पक्ष मंदिर के पिछले हिस्से में जाकर विवाह कराने लगे।
जगन्नाथ झा के अनुसार, मौके पर पहुंचने के बाद उन्होंने विवाह करा रहे पंडित को समझाया कि लड़की नाबालिग है और इस उम्र में शादी कराना कानूनन अपराध है। उन्होंने लड़का-लड़की और उनके परिजनों को भी विवाह नहीं कराने के लिए समझाया, लेकिन वे लोग नहीं माने। इसके बाद उन्होंने पुलिस को सूचना दी। उन्होंने बताया कि लड़की की उम्र करीब 16 साल है, जबकि लड़के की उम्र लगभग 20 वर्ष है।
दोनों परिवार शादी के लिए राजी थे विवाह करने पहुंचे युवक और उसकी मां ने बताया कि दोनों परिवारों की सहमति से शादी कराई जा रही थी। युवक के अनुसार, मंदिर के रजिस्ट्रेशन काउंटर पर लड़की की उम्र देखकर विवाह की अनुमति नहीं दी गई। इसके बाद एक पंडित मिले, जिन्होंने शादी कराने की बात कही थी। युवक ने बताया कि दोनों परिवार आर्थिक रूप से कमजोर हैं और धूमधाम से शादी करने में सक्षम नहीं थे। इसी कारण वे श्यामा माई मंदिर परिसर में विवाह करने पहुंचे थे। उसने दावा किया कि लड़की के आधार कार्ड में उम्र 16 वर्ष दर्ज है और उसके पास लड़की की उम्र साबित करने वाला कोई शैक्षणिक प्रमाणपत्र नहीं है, क्योंकि वह पढ़ी-लिखी नहीं है। युवक ने अपनी उम्र करीब 20 वर्ष बताई। मंदिर प्रबंधन ने नाबालिग की शादी से किया इनकार श्यामा माई मंदिर के मैनेजर रामनाथ झा ने बताया कि लड़की के नाबालिग होने की आशंका के कारण मंदिर में विवाह का रजिस्ट्रेशन नहीं किया गया था। उन्होंने कहा कि मंदिर में विवाह के लिए निर्धारित प्रक्रिया का पालन किया जाता है और कम उम्र की लड़कियों की शादी कराने की अनुमति नहीं दी जाती है। उन्होंने बताया कि मंदिर के पिछले हिस्से में विवाह कराने की बात सामने आई है। हालांकि, उनके अनुसार, वहां विवाह कराने वाला व्यक्ति मंदिर का पुजारी नहीं था और संभव है कि वह बाहर से आया पंडित हो। उन्होंने स्पष्ट किया कि श्यामा माई ट्रस्ट नाबालिग लड़कियों का विवाह कराने की अनुमति नहीं देता है। पुलिस ने थाने में पूछताछ के बाद परिजनों को सौंपा विश्वविद्यालय थानाध्यक्ष सुधीर कुमार ने बताया कि सूचना मिलने के बाद पुलिस लड़का-लड़की को थाने लेकर आई। पूछताछ और आवश्यक प्रक्रिया पूरी करने के बाद नाबालिग लड़की से संबंधित बंधपत्र भरवाया गया और उसे उसके माता-पिता के साथ भेज दिया गया। युवक के परिजनों को भी वापस भेज दिया गया।
थानाध्यक्ष ने बताया कि लड़की के परिजनों को स्पष्ट निर्देश दिया गया है कि नाबालिग की शादी किसी भी परिस्थिति में नहीं कराई जाए। दरभंगा के श्यामा माई मंदिर परिसर में मंगलवार देर रात नाबालिग लड़की की शादी होने से बच गई। लड़की की उम्र कम होने की आशंका पर मंदिर के रजिस्ट्रेशन काउंटर से विवाह की अनुमति नहीं मिली। जिसके बाद परिजन मंदिर के पिछले हिस्से में गुपचुप तरीके से शादी कराने की कोशिश कर रहे थे। इसी दौरान बाल विवाह का विरोध करने वाली संस्था प्रयास के प्रतिनिधि जगन्नाथ झा को इसकी जानकारी मिली। उन्होंने मौके पर पहुंचकर विवाह रुकवाने की कोशिश की। परिजनों के नहीं मानने पर उन्होंने विश्वविद्यालय थाना पुलिस को सूचना दी। इसके बाद पुलिस मौके पर पहुंची और लड़का-लड़की को थाने ले गई। लड़की की उम्र 16 साल है जगन्नाथ झा ने बताया कि मंदिर में विवाह के लिए रजिस्ट्रेशन कराने पहुंचे दोनों पक्षों से आधार कार्ड मांगा गया था, लेकिन उन्होंने दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए। लड़की की उम्र कम होने की आशंका पर मंदिर प्रबंधन ने रजिस्ट्रेशन करने से मना कर दिया था। इसके बाद दोनों पक्ष मंदिर के पिछले हिस्से में जाकर विवाह कराने लगे।
जगन्नाथ झा के अनुसार, मौके पर पहुंचने के बाद उन्होंने विवाह करा रहे पंडित को समझाया कि लड़की नाबालिग है और इस उम्र में शादी कराना कानूनन अपराध है। उन्होंने लड़का-लड़की और उनके परिजनों को भी विवाह नहीं कराने के लिए समझाया, लेकिन वे लोग नहीं माने। इसके बाद उन्होंने पुलिस को सूचना दी। उन्होंने बताया कि लड़की की उम्र करीब 16 साल है, जबकि लड़के की उम्र लगभग 20 वर्ष है।
दोनों परिवार शादी के लिए राजी थे विवाह करने पहुंचे युवक और उसकी मां ने बताया कि दोनों परिवारों की सहमति से शादी कराई जा रही थी। युवक के अनुसार, मंदिर के रजिस्ट्रेशन काउंटर पर लड़की की उम्र देखकर विवाह की अनुमति नहीं दी गई। इसके बाद एक पंडित मिले, जिन्होंने शादी कराने की बात कही थी। युवक ने बताया कि दोनों परिवार आर्थिक रूप से कमजोर हैं और धूमधाम से शादी करने में सक्षम नहीं थे। इसी कारण वे श्यामा माई मंदिर परिसर में विवाह करने पहुंचे थे। उसने दावा किया कि लड़की के आधार कार्ड में उम्र 16 वर्ष दर्ज है और उसके पास लड़की की उम्र साबित करने वाला कोई शैक्षणिक प्रमाणपत्र नहीं है, क्योंकि वह पढ़ी-लिखी नहीं है। युवक ने अपनी उम्र करीब 20 वर्ष बताई। मंदिर प्रबंधन ने नाबालिग की शादी से किया इनकार श्यामा माई मंदिर के मैनेजर रामनाथ झा ने बताया कि लड़की के नाबालिग होने की आशंका के कारण मंदिर में विवाह का रजिस्ट्रेशन नहीं किया गया था। उन्होंने कहा कि मंदिर में विवाह के लिए निर्धारित प्रक्रिया का पालन किया जाता है और कम उम्र की लड़कियों की शादी कराने की अनुमति नहीं दी जाती है। उन्होंने बताया कि मंदिर के पिछले हिस्से में विवाह कराने की बात सामने आई है। हालांकि, उनके अनुसार, वहां विवाह कराने वाला व्यक्ति मंदिर का पुजारी नहीं था और संभव है कि वह बाहर से आया पंडित हो। उन्होंने स्पष्ट किया कि श्यामा माई ट्रस्ट नाबालिग लड़कियों का विवाह कराने की अनुमति नहीं देता है। पुलिस ने थाने में पूछताछ के बाद परिजनों को सौंपा विश्वविद्यालय थानाध्यक्ष सुधीर कुमार ने बताया कि सूचना मिलने के बाद पुलिस लड़का-लड़की को थाने लेकर आई। पूछताछ और आवश्यक प्रक्रिया पूरी करने के बाद नाबालिग लड़की से संबंधित बंधपत्र भरवाया गया और उसे उसके माता-पिता के साथ भेज दिया गया। युवक के परिजनों को भी वापस भेज दिया गया।
थानाध्यक्ष ने बताया कि लड़की के परिजनों को स्पष्ट निर्देश दिया गया है कि नाबालिग की शादी किसी भी परिस्थिति में नहीं कराई जाए।  

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