शाजापुर में गोगा नवमी पर निकलीं पांच परंपरागत छड़ियां:40 दिन की उपासना हुई पूरी, उत्साह से मना गोगादेव महाराज का जन्मोत्सव

शाजापुर में गोगा नवमी पर निकलीं पांच परंपरागत छड़ियां:40 दिन की उपासना हुई पूरी, उत्साह से मना गोगादेव महाराज का जन्मोत्सव

शाजापुर में वाल्मीकि समाज ने शनिवार देर रात गोगा नवमी का पर्व श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया। गोगादेव महाराज के जन्मोत्सव पर शहर में गाजे-बाजे और ढोल-ढमाकों के साथ पांच परंपरागत छड़ियां का जुलूस निकाला गया। समाज के लोग अपने-अपने मोहल्लों से छड़ी-निशान लेकर जुलूस में शामिल हुए। जुलूस में घोड़े भी थे, जिन्होंने नाचकर लोगों का ध्यान खींचा। यह जुलूस शहर के कई मोहल्लों और खास रास्तों से होकर आजाद चौक बाजार पहुंचा। यहां समाज के बड़े-बुजुर्गों का सम्मान किया गया। इस मौके पर बड़ी संख्या में समाज के लोग मौजूद थे। जुलूस में शामिल श्रद्धालु भक्ति गीत गाते और जयकारे लगाते हुए गोगादेव महाराज की पूजा करते हुए आगे बढ़ रहे थे। पूरे कार्यक्रम में धार्मिक उत्साह का माहौल था। इसके बाद सभी पांच छड़ियां एक साथ चीलर नदी पहुंची। यहां समाज के लोगों ने गोगादेव महाराज की विधि-विधान से पूजा की। श्रद्धालुओं ने अपने परिवार और समाज की सुख-समृद्धि और खुशहाली की दुआ मांगी। पूजा के बाद परंपरा के हिसाब से छड़ियों का विसर्जन किया गया। इसी के साथ गोगा नवमी के मुख्य कार्यक्रम का समापन हुआ। समाज के संजय गिरजे ने बताया कि वाल्मीकि समाज में गोगा नवमी की खास धार्मिक और सामाजिक परंपरा है। गोगा नवमी से पहले समाज के लोग करीब 40 दिन तक नंगे पैर रहकर उपवास करते हैं और गोगादेव महाराज की उपासना करते हैं। इस दौरान ज्योत जलाकर छड़ी की पूजा की जाती है। परंपरा के हिसाब से गोगादेव महाराज की छड़ी को घर-घर ले जाया जाता है। श्रद्धालु अपने घर पर छड़ी की पूजा करके गोगादेव महाराज से परिवार की सुख-शांति और समृद्धि की दुआ मांगते हैं। तस्वीरें देखिए…

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