मुजफ्फरपुर में शरद पूर्णिमा पर रविवार को बाबा गरीबनाथ धाम में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। सुबह से ही भक्त बाबा के दर्शन और जलाभिषेक के लिए पहुंचने लगे। मंदिर का पट सुबह 5 बजे आम श्रद्धालुओं के लिए खोला गया। पूजा-अर्चना के दौरान मंदिर परिसर हर-हर महादेव, ओम नम: शिवाय और बोल बम के जयघोष से गूंज उठा। श्र सुख-समृद्धि की कामना लेकर पहुंचे श्रद्धालु शरद पूर्णिमा पर श्रद्धालुओं ने बाबा गरीबनाथ का जलाभिषेक कर सुख, शांति और समृद्धि की कामना की। धार्मिक मान्यता के अनुसार, शरद पूर्णिमा की रात चंद्रमा अपनी 16 कलाओं से परिपूर्ण होता है और उसकी किरणों को अमृतमयी माना जाता है। इसी वजह से इस रात चंद्रमा की रोशनी में खीर रखने की परंपरा है। मान्यता है कि खीर को रातभर चंद्रमा की रोशनी में रखने के बाद अगले दिन सुबह प्रसाद के रूप में ग्रहण किया जाता है। इस अवसर पर भगवान की आराधना के साथ मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा भी की जाती है। चंद्रमा की रोशनी में खीर रखने की परंपरा बाबा गरीबनाथ धाम के प्रधान पुजारी पंडित विनय पाठक ने बताया कि शरद पूर्णिमा की रात चंद्रमा की पूजा और खीर का भोग लगाने की परंपरा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस रात दूध या खीर को चंद्रमा की रोशनी में रखने के बाद प्रसाद के रूप में ग्रहण किया जाता है। शरद पूर्णिमा पर मां लक्ष्मी-भगवान गणेश की आराधना के साथ श्रीसूक्त, कनकधारा स्तोत्र और विष्णुसहस्रनाम का पाठ करना शुभ माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि इससे घर में सुख-समृद्धि आती है और मां लक्ष्मी की कृपा बनी रहती है। पूजा-अर्चना से मनोकामना पूरी होने की मान्यता शरद पूर्णिमा को धार्मिक दृष्टि से विशेष महत्व दिया जाता है। इस दिन श्रद्धालु मंदिरों में पूजा-अर्चना करते हैं और घरों में भी विशेष अनुष्ठान किए जाते हैं। बाबा गरीबनाथ धाम में पहुंचे भक्तों ने जलाभिषेक कर परिवार की सुख-शांति और समृद्धि की कामना की। मुजफ्फरपुर में शरद पूर्णिमा पर रविवार को बाबा गरीबनाथ धाम में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। सुबह से ही भक्त बाबा के दर्शन और जलाभिषेक के लिए पहुंचने लगे। मंदिर का पट सुबह 5 बजे आम श्रद्धालुओं के लिए खोला गया। पूजा-अर्चना के दौरान मंदिर परिसर हर-हर महादेव, ओम नम: शिवाय और बोल बम के जयघोष से गूंज उठा। श्र सुख-समृद्धि की कामना लेकर पहुंचे श्रद्धालु शरद पूर्णिमा पर श्रद्धालुओं ने बाबा गरीबनाथ का जलाभिषेक कर सुख, शांति और समृद्धि की कामना की। धार्मिक मान्यता के अनुसार, शरद पूर्णिमा की रात चंद्रमा अपनी 16 कलाओं से परिपूर्ण होता है और उसकी किरणों को अमृतमयी माना जाता है। इसी वजह से इस रात चंद्रमा की रोशनी में खीर रखने की परंपरा है। मान्यता है कि खीर को रातभर चंद्रमा की रोशनी में रखने के बाद अगले दिन सुबह प्रसाद के रूप में ग्रहण किया जाता है। इस अवसर पर भगवान की आराधना के साथ मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा भी की जाती है। चंद्रमा की रोशनी में खीर रखने की परंपरा बाबा गरीबनाथ धाम के प्रधान पुजारी पंडित विनय पाठक ने बताया कि शरद पूर्णिमा की रात चंद्रमा की पूजा और खीर का भोग लगाने की परंपरा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस रात दूध या खीर को चंद्रमा की रोशनी में रखने के बाद प्रसाद के रूप में ग्रहण किया जाता है। शरद पूर्णिमा पर मां लक्ष्मी-भगवान गणेश की आराधना के साथ श्रीसूक्त, कनकधारा स्तोत्र और विष्णुसहस्रनाम का पाठ करना शुभ माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि इससे घर में सुख-समृद्धि आती है और मां लक्ष्मी की कृपा बनी रहती है। पूजा-अर्चना से मनोकामना पूरी होने की मान्यता शरद पूर्णिमा को धार्मिक दृष्टि से विशेष महत्व दिया जाता है। इस दिन श्रद्धालु मंदिरों में पूजा-अर्चना करते हैं और घरों में भी विशेष अनुष्ठान किए जाते हैं। बाबा गरीबनाथ धाम में पहुंचे भक्तों ने जलाभिषेक कर परिवार की सुख-शांति और समृद्धि की कामना की।

