चंपत राय के पास एक डायरी मिली है। उसमें राम मंदिर में चढ़ावे की रकम चोरी की घटना को लेकर कई महत्वपूर्ण बातों का जिक्र किया गया हैं। डायरी के मुताबिक, चंपत राय ने तुरंत एफआईआर इसलिए नहीं कराई, क्योंकि उन्हें आशंका थी कि पुलिस जांच शुरू होने के बाद मामला लंबा खिंच सकता है और इसका असर उत्तर प्रदेश के आगामी विधानसभा चुनाव पर पड़ सकता है। इस डायरी में डायरी में नृपेंद्र मिश्रा की भूमिका को लेकर भी सवाल खड़े किये गए हैं। डायरी में यहां तक लिखा है कि एक संत ने नृपेंद्र मिश्रा को खलनायक तक बता दिया है। इसके अलावा अखिलेश यादव तक ये मामला कैसे पहुंचा, असली भेदिया कौन है। इन बातों का भी जिक्र किया गया है। आइए विस्तार से डायरी में दर्ज एक-बातों को सिलेसिलेवार ढंग से बताते हैं। चंपत राय ने नृपेंद्र मिश्र को बताई थी पूरी बात डायरी के अनुसार, 8 जून को मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र और अनूप मित्तल अयोध्या पहुंचे थे। यहां चंपत राय, डॉ. अनिल मिश्र और गोपाल राव ने उन्हें 4 जून से शुरू हुए पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी। नृपेंद्र मिश्र ने पूछा कि पुलिस में एफआईआर क्यों नहीं कराई गई। इस पर चंपत राय ने कहा कि अगर पुलिस को मामला सौंप दिया जाता तो पूछताछ और कार्रवाई के सभी अधिकार पुलिस के पास चले जाते। उन्हें आशंका थी कि मामला कितना लंबा चलेगा और उसका क्या परिणाम होगा, यह कहना मुश्किल था। इसका असर आगामी विधानसभा चुनाव पर भी पड़ सकता था। 6 से 8 जून तक लगातार बैठकर रकम वापस कराई चंपत राय ने डायरी में लिखा है कि 6, 7 और 8 जून को लगातार करीब 11-11 घंटे बैठकर उन्होंने अन्य लोगों के साथ मिलकर देवोत्तर राशि का काफी हिस्सा वापस प्राप्त किया। इसी दौरान उनके मन में यह सवाल भी उठा कि मामले की जानकारी सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव तक किस माध्यम से पहुंची और संगठन के भीतर से जानकारी बाहर कौन पहुंचा रहा है। संतों को भी दी गई मामले की जानकारी डायरी के मुताबिक, चंपत राय ने मामले की जानकारी संतों को भी दी थी। उन्होंने कई संतों से फोन पर बात की। कुछ संत अयोध्या से बाहर थे, जबकि 11 संत शाम करीब 6 बजे मंदिर परिसर में शेषावतार मंदिर के पास पहुंचे। चंपत राय के अनुसार, वहां संतों को पूरे मामले की जानकारी दी गई। उन्होंने प्रचार माध्यमों में चल रही खबरों को निराधार बताते हुए संतों से उन पर ध्यान नहीं देने की अपील की। संतों ने उनकी बात स्वीकार की। नृपेंद्र मिश्र के बयानों पर उठाए सवाल डायरी में चंपत राय ने नृपेंद्र मिश्र के मीडिया में दिए बयानों का भी जिक्र किया है। उनके अनुसार, नृपेंद्र मिश्र ने दिल्ली में करीब चार दिनों में 14 टेलीविजन चैनलों से बातचीत की। शुरुआत में उन्होंने कहा कि उनका दायित्व मंदिर निर्माण तक सीमित है, लेकिन बाद में उनके बयानों में बदलाव आया और चोरी के लिए ‘डकैती’ शब्द का इस्तेमाल किया गया। चंपत राय ने लिखा कि इससे समाज में खराब संदेश गया। 23 जून के बाद नृपेंद्र मिश्र के बयान अचानक आना बंद हो गए। डायरी में उन्होंने लिखा कि इसका कारण तलाशना होगा। संत ने नृपेंद्र मिश्र को बताया ‘खलनायक’ चंपत राय के मुताबिक, जुलाई के पहले सप्ताह में एक संत ने उनसे कहा कि क्या नृपेंद्र मिश्र खलनायक की भूमिका निभा रहे हैं। चंपत राय ने लिखा कि उनके पास इसका कोई जवाब नहीं था। इसके बाद 11, 12 और 13 जुलाई को नृपेंद्र मिश्र और अनूप मित्तल मंदिर निर्माण समिति की बैठक के लिए अयोध्या आए। शाम को नृपेंद्र मिश्र उनसे मिलने भी पहुंचे और करीब दो घंटे बातचीत हुई। 14 जुलाई को अनूप मित्तल से की अकेले में बात चंपत राय के अनुसार, 14 जुलाई को उन्होंने अनूप मित्तल से अकेले मिलने को कहा। करीब एक घंटे की बातचीत में उन्होंने पूछा कि नृपेंद्र मिश्र जैसे अनुभवी व्यक्ति ने चार दिनों में 14 चैनलों से बातचीत क्यों की और किसकी प्रेरणा से की। चंपत राय ने यह भी सवाल उठाया कि नृपेंद्र मिश्र ने पिछले छह वर्षों में मंदिर निर्माण समिति की बैठकों के दौरान मंदिर की दूसरी व्यवस्थाओं या हिसाब-किताब पर कभी चर्चा नहीं की, तो अब इन व्यवस्थाओं पर बोलने का उनका क्या अधिकार है। डायरी के अनुसार, अनूप मित्तल ने माना कि मंदिर की दूसरी व्यवस्थाओं या हिसाब-किताब पर कभी सामूहिक रूप से एक घंटे भी चर्चा नहीं हुई। 6 जुलाई की बैठक में नहीं पहुंचे नृपेंद्र मिश्र चंपत राय ने लिखा कि नृपेंद्र मिश्र को 6 जुलाई की ट्रस्ट बैठक के लिए अयोध्या आना था। टिकट भी बन चुका था और चालक को भी सूचना दी गई थी, लेकिन 4 जुलाई को अचानक उनकी यात्रा रद्द होने का संदेश आया। वह बैठक में नहीं पहुंचे। डायरी में चंपत राय ने इसके कारण पर भी सवाल उठाया है। तबीयत खराब होने के बावजूद लखनऊ पहुंचे डायरी के अनुसार, 9 जून को चंपत राय की तबीयत बिगड़ने लगी थी। इसके बावजूद वह करीब 10 घंटे पीएफसी भवन में बैठे रहे। 10 जून को वह बिस्तर से उठ नहीं सके। उसी रात गोपाल राव को भैयाजी जोशी का फोन आया और तीनों को 11 जून की शाम तक लखनऊ पहुंचने के लिए कहा गया। गोपाल राव ने चंपत राय की तबीयत खराब होने की बात कही। इस पर चंपत राय ने कहा कि वह भी लखनऊ जाएंगे, ताकि मामले से जुड़ी सभी बातें सही रूप में सामने आ सकें।

