वाराणसी में 6 दिनों की गिरावट के बाद फिर बढ़ा गंगा का जलस्तर, 4 सेमी प्रति घंटे की रफ्तार से बढ़ोतरी, नदी में दिखी डॉल्फिन

वाराणसी में 6 दिनों की गिरावट के बाद फिर बढ़ा गंगा का जलस्तर, 4 सेमी प्रति घंटे की रफ्तार से बढ़ोतरी, नदी में दिखी डॉल्फिन

Flood in Varanasi: वाराणसी में 6 दिनों में जलस्तर में गिरावट के बाद गंगा नदी का जलस्तर एक बार फिर से बढ़ने लगा है। केंद्रीय जल आयोग के मुताबिक, रविवार सुबह तक गंगा नदी का जलस्तर करीब 69 मीटर दर्ज किया गया है। बताया जा रहा है कि इस दौरान गंगा नदी का जलस्तर में 4 सेंटीमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। बीते 24 घंटे में 0.74 मीटर की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। वहीं, गंगा नदी में चौबेपुर इलाके में डॉल्फिन भी देखी गई है। इसके बाद स्थानीय प्रशासन ने मछुआरों को सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं और डॉल्फिन को किसी प्रकार से नुकसान ना हो उसके लिए गाइडलाइन जारी किया गया है।

गंगा के किनारे बढ़ाई गई सतर्कता

गंगा नदी के जलस्तर में 4 सेंटीमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से बढ़ोतरी होने के कारण घाटों पर जल भराव का दायरा एक बार फिर से बढ़ने लगा है। बढ़ते जलस्तर का असर दशाश्वमेध घाट, अस्सी घाट समेत कई प्रमुख घाटों पर दिखाई दे रहा है। घाटों की निचली सीढ़ियां पानी में डूब चुकी हैं। वहीं, जल पुलिस चौकी के पास भी पानी भरने लगा है। जिला प्रशासन और जल पुलिस लगातार घाटों पर निगरानी कर रहा है। प्रशासन ने लोगों से गहरे पानी में जाने से बचने की अपील की है। इसके साथ ही जलस्तर में लगातार वृद्धि के चलते गंगा नदी के किनारे वाले क्षेत्रों में सतर्कता बढ़ा दी गई है।

पिछले 24 घंटे में काशी में रुक-रुक कर हुई बारिश से मौसम का मिजाज बदला हुआ नजर आ रहा है। शनिवार की सुबह 15 मिनट की तेज बारिश के बाद शाम तक वाराणसी के अलग-अलग इलाकों में हल्की और तेज बारिश हुई। इस वजह से लोगों को उमस से राहत मिली है। शुक्रवार को वाराणसी का अधिकतम तापमान 33.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जबकि न्यूनतम तापमान 26.3 डिग्री सेल्सियस रहा। काशी हिंदू विश्वविद्यालय के मौसम में वैज्ञानिक प्रोफेसर मनोज श्रीवास्तव ने बताया कि सितंबर के पहले सप्ताह में मानसून की सक्रियता वाराणसी में देखने को मिलेगी।

सहायक नदियों की तरफ बढ़ रहीं डॉल्फिन

वहीं, गंगा नदी में जलस्तर बढ़ने के कारण गंगेय डॉल्फिन मुख्य धारा से नदी के किनारे और सहायक नदियों की तरफ बढ़ रही हैं। इस स्थिति को देखते हुए वन विभाग, भारतीय वन्य जीव संस्थान और डॉल्फिन मित्रों ने चौबेपुर क्षेत्र के ढाका गांव और गंगा-गोमती संगम में नविको, मछुआरों और ग्रामीणों के लिए विशेष जागरूकता अभियान चलाया है। डॉल्फिन मित्र और वन अधिकारियों ने मछुआरों को निर्देश दिया है कि मछली पकड़ने के दौरान कोई डॉल्फिन गलती से जाल में फंस जाए तो बिना देर किए जाल को काटकर उसे तुरंत बाहर निकाल दें, ताकि उसकी जान बचाई जा सके। अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि आपात स्थिति में तुरंत वन विभाग या गंगा प्रहरियों को सूचना दिया जाए। सूचना मिलते ही रेस्क्यू टीम मौके पर पहुंचकर डॉल्फिन का उपचार करेगी।

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