बक्सर में वामन द्वादशी के मौके पर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के संभावित दौरे को लेकर जिला प्रशासन ने तैयारियां तेज कर दी हैं। मुख्यमंत्री 23 सितंबर को भगवान वामन के दर्शन-पूजन और रथ यात्रा में शामिल होने के लिए बक्सर आ सकते हैं। उनके कार्यक्रम को देखते हुए हवाई अड्डा खेल मैदान में हेलीपैड तैयार किया जा रहा है। यहां से मुख्यमंत्री सड़क मार्ग से मंदिर पहुंच कर पूजा-अर्चना कर सकते हैं। जिला प्रशासन के अधिकारी लगातार जगहों का निरीक्षण कर जरूरी निर्देश दे रहे हैं। किनारों की सफाई और वॉल पेंटिंग का काम जारी मुख्यमंत्री के आने-जाने वाले रास्ते को भी साफ-सुथरा करने का काम तेज कर दिया गया है। केंद्रीय कारा के आसपास से अतिक्रमण हटाया जा रहा है और साफ-सफाई की जा रही है। ज्योति चौक से सिंडिकेट तक लंबे समय से खराब पड़ी सड़क के निर्माण में भी तेजी लाई गई है। इसके अलावा, ज्योति चौक से नाथ बाबा तक मृत नहर की सफाई, उसके किनारों की सफाई और वॉल पेंटिंग का काम भी चल रहा है। प्रशासन चाहता है कि मुख्यमंत्री के दौरे से पहले शहर का मुख्य मार्ग व्यवस्थित और साफ दिखे। बड़ी संख्या में पहुंचते हैं श्रद्धालु बता दें कि मुख्यमंत्री बनने के बाद सम्राट चौधरी पहली बार 23 मई 2026 को बक्सर आए थे। तब उन्होंने वामन भगवान मंदिर को केंद्रीय कारा परिसर से अलग करने का ऐलान किया था। बाद में राज्य कैबिनेट ने भी इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी थी। अब 23 सितंबर को मुख्यमंत्री के संभावित दूसरे बक्सर दौरे के लिए प्रशासन तैयारियों में लगा है। वामन द्वादशी पर हर साल बक्सर में एक बड़ा मेला लगता है। गंगा स्नान के बाद बड़ी संख्या में श्रद्धालु भगवान वामन के मंदिर पहुंचते हैं। मंदिर परिसर में श्रद्धालु लिट्टी-गुड़ बनाकर उसे प्रसाद के तौर पर खाते हैं। रामेश्वर नाथ मंदिर से भगवान वामन की रथ यात्रा निकाली जाती है। प्रसाद पर प्रतिबंध लगाए जाने की संभावना यह यात्रा शहर के अलग-अलग रास्तों से होते हुए वामन भगवान मंदिर परिसर पहुंचती है। इसके बाद श्रद्धालुओं के बीच महाप्रसाद बांटा जाता है। हालांकि इस बार मुख्यमंत्री के संभावित कार्यक्रम को लेकर मंदिर परिसर के आसपास दुकान लगाने वाले दुकानदारों और श्रद्धालुओं में भी असमंजस है। सुरक्षा और प्रोटोकॉल को देखते हुए मंदिर परिसर में लिट्टी-गुड़ बनाकर प्रसाद के रूप में ग्रहण करने पर प्रतिबंध लगाए जाने की संभावना है। इससे मेले में आने वाले श्रद्धालुओं और स्थानीय दुकानदारों पर असर पड़ने की चिंता भी जताई जा रही है। बक्सर में वामन द्वादशी के मौके पर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के संभावित दौरे को लेकर जिला प्रशासन ने तैयारियां तेज कर दी हैं। मुख्यमंत्री 23 सितंबर को भगवान वामन के दर्शन-पूजन और रथ यात्रा में शामिल होने के लिए बक्सर आ सकते हैं। उनके कार्यक्रम को देखते हुए हवाई अड्डा खेल मैदान में हेलीपैड तैयार किया जा रहा है। यहां से मुख्यमंत्री सड़क मार्ग से मंदिर पहुंच कर पूजा-अर्चना कर सकते हैं। जिला प्रशासन के अधिकारी लगातार जगहों का निरीक्षण कर जरूरी निर्देश दे रहे हैं। किनारों की सफाई और वॉल पेंटिंग का काम जारी मुख्यमंत्री के आने-जाने वाले रास्ते को भी साफ-सुथरा करने का काम तेज कर दिया गया है। केंद्रीय कारा के आसपास से अतिक्रमण हटाया जा रहा है और साफ-सफाई की जा रही है। ज्योति चौक से सिंडिकेट तक लंबे समय से खराब पड़ी सड़क के निर्माण में भी तेजी लाई गई है। इसके अलावा, ज्योति चौक से नाथ बाबा तक मृत नहर की सफाई, उसके किनारों की सफाई और वॉल पेंटिंग का काम भी चल रहा है। प्रशासन चाहता है कि मुख्यमंत्री के दौरे से पहले शहर का मुख्य मार्ग व्यवस्थित और साफ दिखे। बड़ी संख्या में पहुंचते हैं श्रद्धालु बता दें कि मुख्यमंत्री बनने के बाद सम्राट चौधरी पहली बार 23 मई 2026 को बक्सर आए थे। तब उन्होंने वामन भगवान मंदिर को केंद्रीय कारा परिसर से अलग करने का ऐलान किया था। बाद में राज्य कैबिनेट ने भी इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी थी। अब 23 सितंबर को मुख्यमंत्री के संभावित दूसरे बक्सर दौरे के लिए प्रशासन तैयारियों में लगा है। वामन द्वादशी पर हर साल बक्सर में एक बड़ा मेला लगता है। गंगा स्नान के बाद बड़ी संख्या में श्रद्धालु भगवान वामन के मंदिर पहुंचते हैं। मंदिर परिसर में श्रद्धालु लिट्टी-गुड़ बनाकर उसे प्रसाद के तौर पर खाते हैं। रामेश्वर नाथ मंदिर से भगवान वामन की रथ यात्रा निकाली जाती है। प्रसाद पर प्रतिबंध लगाए जाने की संभावना यह यात्रा शहर के अलग-अलग रास्तों से होते हुए वामन भगवान मंदिर परिसर पहुंचती है। इसके बाद श्रद्धालुओं के बीच महाप्रसाद बांटा जाता है। हालांकि इस बार मुख्यमंत्री के संभावित कार्यक्रम को लेकर मंदिर परिसर के आसपास दुकान लगाने वाले दुकानदारों और श्रद्धालुओं में भी असमंजस है। सुरक्षा और प्रोटोकॉल को देखते हुए मंदिर परिसर में लिट्टी-गुड़ बनाकर प्रसाद के रूप में ग्रहण करने पर प्रतिबंध लगाए जाने की संभावना है। इससे मेले में आने वाले श्रद्धालुओं और स्थानीय दुकानदारों पर असर पड़ने की चिंता भी जताई जा रही है।

