प्रयागराज में शिक्षक भर्ती की पुरानी नियमावली और पुराने परीक्षा पैटर्न को बहाल करने की मांग को लेकर प्रदर्शन लगातार जारी है। पिछले 15 दिन से चार अभ्यर्थी आमरण अनशन पर हैं। वहीं 19 दिन से सैकड़ो छात्र धरना दे रहे हैं। जिसको लेकर युवा मंच के प्रदेश अध्यक्ष अनिल सिंह ने वीडियो संदेश जारी कर कहा कि 11 जून से प्रयागराज और लखनऊ सहित विभिन्न स्थानों पर अभ्यर्थी अपनी मांगों को लेकर संघर्ष कर रहे हैं।
आंदोलन के दौरान माध्यमिक शिक्षा मंत्री गुलाब देवी, अपर मुख्य सचिव, शिक्षा निदेशक प्रताप सिंह बघेल और अपर शिक्षा निदेशक कामता राम पाल सहित कई अधिकारियों से मुलाकात कर अभ्यर्थियों की समस्याएं रखी गईं। मुख्यमंत्री को भी पत्र के माध्यम से शिक्षक भर्ती नियमों में अचानक किए जा रहे बदलावों से प्रभावित छात्रों की स्थिति से अवगत कराया गया है। नई नियमावली से अभ्यर्थियों में नाराजगी अनिल सिंह के अनुसार, वर्ष 2025 से पहले के रिक्त पदों के आधार पर करीब 20 हजार TGT-PGT पदों पर भर्ती की उम्मीद अभ्यर्थियों को है। हालांकि, सरकार की ओर से पुरानी नियमावली के आधार पर विज्ञापन जारी नहीं करने की बात कही जा रही है। इसी बीच PGT पदों का विज्ञापन नई नियमावली के आधार पर जारी किए जाने से अभ्यर्थियों में असंतोष बढ़ गया है। उन्होंने दावा किया कि नई व्यवस्था में सामान्य अध्ययन के प्रश्नों को शामिल किया गया है। इसके अलावा स्नातक स्तर पर 50 प्रतिशत अंक की अनिवार्यता और TET उत्तीर्ण होना भी आवश्यक किए जाने की बात कही जा रही है। अभ्यर्थियों का कहना है कि इन बदलावों से बड़ी संख्या में उम्मीदवार भर्ती प्रक्रिया से बाहर हो सकते हैं। अभ्यर्थी आमरण अनशन पर युव मंच के प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि आंदोलन अब निर्णायक दौर में पहुंच गया है और चार अभ्यर्थी आमरण अनशन पर बैठे हैं। उन्होंने प्रयागराज प्रशासन पर आंदोलनकारियों को परेशान करने और कुछ सदस्यों को हाउस अरेस्ट करने का आरोप लगाया है। आंदोलन किसी एक व्यक्ति पर निर्भर नहीं है। उन्होंने अभ्यर्थियों से शांतिपूर्ण ढंग से संघर्ष जारी रखने और अधिक से अधिक लोगों तक अपनी आवाज पहुंचाने की अपील की। पुरानी नियमावली से विज्ञापन जारी करने की मांग युवा मंच ने सरकार से पुरानी नियमावली और पुराने परीक्षा पैटर्न के आधार पर TGT-PGT भर्ती का विज्ञापन जारी करने की मांग की है। साथ ही TET, CTET, एकल विषय, संगीत और प्राविधिक कला से जुड़े अभ्यर्थियों को भी भर्ती प्रक्रिया में अवसर देने की मांग उठाई गई है। अनिल सिंह ने कहा कि यह लड़ाई अभ्यर्थियों के भविष्य, करियर और सम्मान से जुड़ी है। उन्होंने सरकार से मामले को गंभीरता से लेते हुए जल्द निर्णय करने की अपील की। आंदोलनकारियों ने अपना नारा दोहराते हुए कहा, जब तक तोड़ना नहीं है, तब तक छोड़ना नहीं है।

