झाबुआ के जैन श्वेतांबर तीर्थ श्री ऋषभदेव बावन जिनालय में शनिवार को भावांजलि सभा हुई। इसमें श्री संघ की वरिष्ठ श्राविका और वर्षीतप तपस्वी स्व. प्रमिला नवीन रुनवाल को मरणोपरांत ‘तपस्वी-रत्ना’ की उपाधि से सम्मानित किया गया। सम्मान उनके परिवारजनों को प्रदान किया गया। इस दौरान समाजजनों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी। धार्मिक और सामाजिक कार्यों में योगदान स्व. प्रमिला रुनवाल ने 61 वर्ष के जीवन में प्रभु पूजा, जिनवाणी श्रवण, सामायिक-प्रतिक्रमण, तपस्या, नवकार मंत्र आराधना, जीवदया और सेवा जैसे कार्यों में योगदान दिया। श्री संघ झाबुआ ने उनके तप, त्याग, धर्मनिष्ठा और सेवाभाव को देखते हुए मरणोपरांत यह सम्मान दिया। साध्वी श्री अविचलदृष्टा की मौजूदगी में सभा भावांजलि सभा और प्रवचन साध्वी श्री शशिकलाश्री जी म.सा. की सुशिष्या विदुषी साध्वी श्री अविचलदृष्टा श्री जी म.सा. आदि ठाणा-सात की उपस्थिति में हुए। सभा स्व. प्रमिला रुनवाल की आत्मिक शांति के लिए आयोजित की गई थी। रिंकु रुनवाल ने बताया कि कार्यक्रम में बड़ी संख्या में समाज के लोग मौजूद रहे। सभी ने स्व. प्रमिला रुनवाल के तप और सेवाभावी जीवन को याद किया। धर्म और सेवा से जीवन सार्थक करने का संदेश धर्मसभा को संबोधित करते हुए विदुषी साध्वी श्री अविचलदृष्टा श्री जी म.सा. ने कहा कि मनुष्य जीवन मुश्किल से मिलता है। इसे धर्म, तप-साधना और सेवा जैसे कार्यों से सार्थक बनाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि स्व. प्रमिला रुनवाल का जीवन नियमित जिनवाणी श्रवण, प्रतिक्रमण, नवकार आराधना और सेवा जैसे कार्यों से प्रेरणादायक रहा। समाज के लोगों ने दी श्रद्धांजलि सभा में जैन श्वेतांबर श्री संघ अध्यक्ष संजय मेहता, श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ अध्यक्ष प्रदीप रुनवाल, श्री तेरापंथ महासभा अध्यक्ष मितेश गादिया, वरिष्ठ उपाध्यक्ष तेजप्रकाश कोठारी, समाजसेवी यशवंत भण्डारी और व्यापारी संघ अध्यक्ष पंकज जैन मोगरा सहित समाज के कई लोग मौजूद रहे। चेतना सराफ बदनावर और पूजा भण्डारी करवड़ सहित अन्य समाजजनों ने भी सभा में अपनी बात रखी।

