वजन बढ़ने से अलग है Lipedema? क्लीवलैंड क्लिनिक ने बताया शरीर के निचले हिस्से में जमा फैट के संकेत पहचानें

वजन बढ़ने से अलग है Lipedema? क्लीवलैंड क्लिनिक ने बताया शरीर के निचले हिस्से में जमा फैट के संकेत पहचानें

Lipedema Symptoms: अक्सर जब शरीर के निचले हिस्से यानी कूल्हों, जांघों या पिंडलियों का वजन बढ़ने लगता है, तो लोग इसे आम मोटापा मान लेते हैं। लोग डाइटिंग करने लगते हैं, घंटों जिम में पसीना बहाते हैं, लेकिन फिर भी पैरों की चर्बी कम नहीं होती। क्लीवलैंड क्लिनिक के अनुसार, पैरों में इस तरह असमान रूप से फैट जमा होना सिर्फ सामान्य वजन बढ़ना नहीं, बल्कि लिपिडिमा (Lipedema) नाम की एक मेडिकल कंडीशन हो सकती है। आइए जानते हैं कि लिपिडिमा क्या है, यह सामान्य मोटापे से कैसे अलग है और इसके क्या लक्षण हैं।

लिपिडिमा (Lipedema) क्या है?

साइंसडायरेक्ट के अनुसार, लिपिडिमा एक ऐसी स्थिति है जिसमें शरीर के निचले हिस्से (कूल्हों, जांघों, घुटनों और पिंडलियों) में असामान्य रूप से फैट जमने लगता है। कई बार यह हाथों में भी हो सकता है। यह समस्या लगभग पूरी तरह से महिलाओं में ही देखी जाती है। सबसे खास बात यह है कि यह फैट केवल पैरों या बाहों में जमती है, लेकिन पैर के पंजों (feet) और हाथों की हथेलियों पर इसका असर नहीं पड़ता। यानी पैर सूजे हुए दिखेंगे, लेकिन जूते या चप्पल सही नाप के आएंगे।

आम मोटापे और लिपिडिमा में क्या अंतर है?

1.डाइट और एक्सरसाइज का बेअसर होना- सामान्य मोटापा कम करने के लिए जब आप वर्कआउट या डाइटिंग करते हैं, तो पूरे शरीर के साथ पैरों की चर्बी भी घटती है। लेकिन लिपिडिमा का फैट एक्सरसाइज या कम खाने से आसानी से कम नहीं होता।

2. दर्द और छूने पर तकलीफ- आम वजन बढ़ने पर चर्बी में दर्द नहीं होता। लिपिडिमा में जमा फैट वाली जगह को छूने या दबाने पर दर्द होता है।

3. पंजों का नॉर्मल रहना- लिपिडिमा में पैरों में तो सूजन और भारीपन होता है, लेकिन पैर के पंजों (feet) में सूजन नहीं आती।

4. आसानी से नील पड़ना (Bruising)- लिपिडिमा से प्रभावित त्वचा पर बहुत जल्दी और हल्के से दबाव से भी नील (bruise) पड़ जाते हैं।

शरीर के निचले हिस्से में लिपिडिमा के मुख्य संकेत

  • दोनों पैरों का एक जैसा भारी होना।
  • त्वचा के नीचे गांठ जैसा महसूस होना।
  • त्वचा की बनावट बदलना।
  • पैरों में भारीपन और थकान।
  • हल्की चोट पर नील पड़ना।

यह समस्या क्यों होती है?

लिपिडिमा का सटीक कारण पूरी तरह से स्पष्ट नहीं है, लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार इसके दो मुख्य कारण हैं;

1. हार्मोनल बदलाव- यह समस्या अक्सर प्यूबर्टी (किशोरावस्था), प्रेग्नेंसी (गर्भावस्था) या मेनोपॉज (रजोनिवृत्ति) के दौरान शुरू या गंभीर होती है।

2.आनुवंशिकता (Genetics)- अगर परिवार में किसी महिला (जैसे मां या बहन) को यह समस्या रही हो, तो इसके होने की आशंका बढ़ जाती है।

इससे राहत पाने के लिए क्या करें?

हालांकि लिपिडिमा का कोई एक पक्का इलाज नहीं है, लेकिन सही समय पर पहचान करके इसे बढ़ने से रोका जा सकता है;

  • डॉक्टर की सलाह से खास मोजे पहनने से दर्द और सूजन में आराम मिलता है।
  • हल्का व्यायाम और स्विमिंग।
  • एंटी-इंफ्लेमेटरी डाइट।
  • यदि पैरों का दर्द या सूजन ज्यादा बढ़ रही हो, तो वैस्कुलर स्पेशलिस्ट या डॉक्टर से मिलकर सही सलाह लें।

डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।

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