महाराष्ट्र के नांदेड जिले में 40 साल के किसान चंद्रकांत शिंदे का शव मिला है। शव निजी फाइनेंस कंपनी के ऑफिस में मिला। परिवार और ग्रामीणों का आरोप है कि लोन की किस्त नहीं चुकाने पर रिकवरी एजेंट्स ने चंद्रकांत को किडनैप किया था। तीन दिन बाद उनका शव मिला। चंद्रकांत शिंदे नांदेड जिले के मुदखेड़ तहसील के मलकोठा गांव के रहने वाले थे। चंद्रकांत की मौत किन परिस्थितियों में हुई, इसकी जांच चल रही है। पुलिस ने अभी यह नहीं बताया है कि मामला आत्महत्या का है या हत्या का। नांदेड SP के मुताबिक पुलिस ने मामले में पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इनमें फाइनेंस ऑपरेशन चलाने वाला मुख्य आरोपी असलम भी शामिल है। मामले की जांच के लिए 9 सदस्यों की स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) बनाई गई। फाइनेंस कंपनी का ऑफिस सील कर दिया गया है और तीन जगह छापेमारी की गई है। सूखा प्रभावित गांवों में कर्ज की परेशानी यह घटना नांदेड जिले के कुछ हिस्सों में किसानों की आर्थिक परेशानी के बीच हुई है। जिले के कई गांवों में सूखे जैसी स्थिति बताई जा रही है। SP से पूछा गया कि क्या सूखा प्रभावित इलाकों में किसानों से लोन वसूली को लेकर फाइनेंस कंपनियों के लिए कोई खास गाइडलाइन जारी की गई है। उन्होंने कहा कि ऐसी कोई आधिकारिक गाइडलाइन जारी नहीं की गई है। हालांकि, जिला कलेक्टर के साथ बैठक की गई है। SP ने कहा, “अगर कहीं गैरकानूनी तरीके से लोन वसूली हो रही है, तो नागरिक सामने आएं। उचित कार्रवाई की जाएगी।” मुख्य आरोपी के फरार होने का दावा गलत बताया रिकवरी एजेंटों की गिरफ्तारी और मुख्य आरोपी के फरार होने के दावे पर SP ने इसे गलत बताया। उन्होंने कहा कि SIT सभी लोगों को गिरफ्तार करने की कोशिश कर रही है। जब SP से पूछा गया कि शिंदे की मौत आत्महत्या है या हत्या, तो उन्होंने जानकारी देने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि इस बारे में विवरण नहीं दिया जा सकता। चंद्रकांत शिंदे के परिवार में उनकी पत्नी, दो बेटियां, दो बेटे और मां हैं। मामले में आगे की जांच जारी है। किसान आत्महत्या के मामले में महाराष्ट्र पहले नंबर पर किसान आत्महत्या के मामले में महाराष्ट्र देश में पहले नंबर पर है। NCRB के डेटा के मुताबिक 2023 में पूरे भारत में खेती-किसानी से जुड़े कुल 10,786 आत्महत्या के मामले सामने आए थे। इसमें से अकेले महाराष्ट्र में 4,151 केस थे। इनमें 4690 किसान थे और 6096 खेत मजदूर थे। NCRB कारण के आधार पर डेटा नहीं देता, पर महाराष्ट्र सरकार की रेवेन्यू डिपार्टमेंट की रिपोर्ट कहती है विदर्भ-मराठवाड़ा (यवतमाल, अमरावती, नांदेड़, बीड) में 80% से ज्यादा केस में आत्महत्या का कारण फसल खराब होना, निजी साहूकार/फाइनेंस कंपनी का कर्ज होता है। किसानों की कैश क्रॉप (कपास, सोयाबीन) पर निर्भरता है, यानी इनकी इनपुट कॉस्ट ज्यादा, इसलिए साहूकार से 24-36% ब्याज पर लोन लेते हैं। महाराष्ट्र में अवैध साहूकारी और जबरन वसूली के केस 2023 में 1247 थे। नांदेड़ जिले में ही पिछले 2 साल में 9 किसान लोन रिकवरी एजेंटों द्वारा मारपीट/बंधक बनाने की FIR हुई हैं।
लोन की किस्त नहीं चुकाई, एजेंट्स ने किसान को उठाया:3 दिन बाद फाइनेंस कंपनी के ऑफिस में लाश मिली; 5 गिरफ्तार

