लावारिस शव दफनाने पहुंची पुलिस का ग्रामीणों ने किया विरोध:वापस लौटना पड़ा, 6 दिन पहले मदार नदी से मिला था अज्ञात का शव

लावारिस शव दफनाने पहुंची पुलिस का ग्रामीणों ने किया विरोध:वापस लौटना पड़ा, 6 दिन पहले मदार नदी से मिला था अज्ञात का शव

औरंगाबाद जिले के मदनपुर प्रखंड के सलैया थाना क्षेत्र में सोमवार को लावारिस शव को दफनाने पहुंची पुलिस को ग्रामीणों के भारी विरोध का सामना करना पड़ा। ग्रामीणों के विरोध के कारण पुलिस को शव को बिना दफनाए ही वापस लेकर लौटना पड़ा। बाद में प्रशासन ने वैकल्पिक स्थान का चयन करते हुए चाल्हो पहाड़ के पास अज्ञात शव को दफनाकर नियमानुसार अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी कराई। मदार नदी से बरामद हुआ था अज्ञात शव जानकारी के अनुसार, सलैया थाना पुलिस ने एक सितंबर को थाना क्षेत्र के मंचानी गांव के पास मदार नदी से एक अज्ञात पुरुष का शव बरामद किया था। शव मिलने की सूचना के बाद पुलिस ने आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी करते हुए उसे पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा था। पोस्टमॉर्टम के बाद शव को पहचान के लिए सदर अस्पताल स्थित शवगृह में सुरक्षित रखा गया था। पुलिस ने शव की पहचान कराने के लिए अपने स्तर से प्रयास किया, लेकिन कई दिनों तक कोई व्यक्ति शव की पहचान करने के लिए सामने नहीं आया। निर्धारित अवधि तक पहचान नहीं होने के बाद पुलिस ने नियमानुसार शव का अंतिम संस्कार कराने का निर्णय लिया। इसी क्रम में सोमवार को पुलिस शव को लेकर सलैया थाना क्षेत्र के बेरी खेल मैदान के समीप नदी किनारे पहुंची, जहां शव को दफनाने की तैयारी की जा रही थी।
शव दफनाने की जानकारी मिलते ही जुटे ग्रामीण बेरी में पुलिस की ओर से लावारिस शव दफनाए जाने की जानकारी मिलते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर पहुंच गए। ग्रामीणों ने शव दफनाने का विरोध शुरू कर दिया। ग्रामीणों का कहना था कि जिस स्थान पर शव को दफनाने के लिए पुलिस पहुंची है, वहां पहले कभी किसी शव का अंतिम संस्कार या दफन नहीं किया गया है। ऐसे में उक्त स्थान पर लावारिस शव को दफनाने की अनुमति नहीं दी जा सकती। स्थिति को देखते हुए मौके पर मौजूद सलैया थानाध्यक्ष कन्हैया शर्मा ने ग्रामीणों को समझाने का प्रयास किया। पुलिस की ओर से ग्रामीणों को बताया गया कि शव की पहचान नहीं हो सकी है। नियमानुसार उसका अंतिम संस्कार किया जाना आवश्यक है। इसके बावजूद ग्रामीण अपनी मांग पर अड़े रहे और शव को बेरी में दफनाने का लगातार विरोध करते रहे। ग्रामीणों के बढ़ते विरोध के बीच पुलिस ने स्थिति को बिगड़ने से बचाने के लिए शव को वहां दफनाने का फैसला टाल दिया। पुलिस टीम शव को वापस लेकर मौके से लौट गई। इस दौरान काफी देर तक ग्रामीणों और पुलिस के बीच बातचीत होती रही। वैकल्पिक स्थान पर कराया गया अंतिम संस्कार बेरी में ग्रामीणों के विरोध के बाद प्रशासन ने शव को दफनाने के लिए दूसरे स्थान का चयन किया। इसके बाद शव को चाल्हो पहाड़ के समीप ले जाया गया। वहां प्रशासन और पुलिस की मौजूदगी में अज्ञात शव को नियमानुसार दफनाकर अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी कराई गई। सलैया थानाध्यक्ष कन्हैया शर्मा ने बताया कि एक सितंबर को मदार नदी से बरामद अज्ञात पुरुष के शव की पहचान नहीं हो सकी थी। शव को पहचान के लिए निर्धारित अवधि तक सुरक्षित रखा गया था। पहचान नहीं होने के बाद नियमानुसार अंतिम संस्कार की प्रक्रिया शुरू की गई थी। बेरी में ग्रामीणों के विरोध के कारण शव को वहां दफन नहीं किया जा सका। इसके बाद चाल्हो पहाड़ के पास शव को नियमानुसार दफना दिया गया। औरंगाबाद जिले के मदनपुर प्रखंड के सलैया थाना क्षेत्र में सोमवार को लावारिस शव को दफनाने पहुंची पुलिस को ग्रामीणों के भारी विरोध का सामना करना पड़ा। ग्रामीणों के विरोध के कारण पुलिस को शव को बिना दफनाए ही वापस लेकर लौटना पड़ा। बाद में प्रशासन ने वैकल्पिक स्थान का चयन करते हुए चाल्हो पहाड़ के पास अज्ञात शव को दफनाकर नियमानुसार अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी कराई। मदार नदी से बरामद हुआ था अज्ञात शव जानकारी के अनुसार, सलैया थाना पुलिस ने एक सितंबर को थाना क्षेत्र के मंचानी गांव के पास मदार नदी से एक अज्ञात पुरुष का शव बरामद किया था। शव मिलने की सूचना के बाद पुलिस ने आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी करते हुए उसे पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा था। पोस्टमॉर्टम के बाद शव को पहचान के लिए सदर अस्पताल स्थित शवगृह में सुरक्षित रखा गया था। पुलिस ने शव की पहचान कराने के लिए अपने स्तर से प्रयास किया, लेकिन कई दिनों तक कोई व्यक्ति शव की पहचान करने के लिए सामने नहीं आया। निर्धारित अवधि तक पहचान नहीं होने के बाद पुलिस ने नियमानुसार शव का अंतिम संस्कार कराने का निर्णय लिया। इसी क्रम में सोमवार को पुलिस शव को लेकर सलैया थाना क्षेत्र के बेरी खेल मैदान के समीप नदी किनारे पहुंची, जहां शव को दफनाने की तैयारी की जा रही थी।
शव दफनाने की जानकारी मिलते ही जुटे ग्रामीण बेरी में पुलिस की ओर से लावारिस शव दफनाए जाने की जानकारी मिलते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर पहुंच गए। ग्रामीणों ने शव दफनाने का विरोध शुरू कर दिया। ग्रामीणों का कहना था कि जिस स्थान पर शव को दफनाने के लिए पुलिस पहुंची है, वहां पहले कभी किसी शव का अंतिम संस्कार या दफन नहीं किया गया है। ऐसे में उक्त स्थान पर लावारिस शव को दफनाने की अनुमति नहीं दी जा सकती। स्थिति को देखते हुए मौके पर मौजूद सलैया थानाध्यक्ष कन्हैया शर्मा ने ग्रामीणों को समझाने का प्रयास किया। पुलिस की ओर से ग्रामीणों को बताया गया कि शव की पहचान नहीं हो सकी है। नियमानुसार उसका अंतिम संस्कार किया जाना आवश्यक है। इसके बावजूद ग्रामीण अपनी मांग पर अड़े रहे और शव को बेरी में दफनाने का लगातार विरोध करते रहे। ग्रामीणों के बढ़ते विरोध के बीच पुलिस ने स्थिति को बिगड़ने से बचाने के लिए शव को वहां दफनाने का फैसला टाल दिया। पुलिस टीम शव को वापस लेकर मौके से लौट गई। इस दौरान काफी देर तक ग्रामीणों और पुलिस के बीच बातचीत होती रही। वैकल्पिक स्थान पर कराया गया अंतिम संस्कार बेरी में ग्रामीणों के विरोध के बाद प्रशासन ने शव को दफनाने के लिए दूसरे स्थान का चयन किया। इसके बाद शव को चाल्हो पहाड़ के समीप ले जाया गया। वहां प्रशासन और पुलिस की मौजूदगी में अज्ञात शव को नियमानुसार दफनाकर अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी कराई गई। सलैया थानाध्यक्ष कन्हैया शर्मा ने बताया कि एक सितंबर को मदार नदी से बरामद अज्ञात पुरुष के शव की पहचान नहीं हो सकी थी। शव को पहचान के लिए निर्धारित अवधि तक सुरक्षित रखा गया था। पहचान नहीं होने के बाद नियमानुसार अंतिम संस्कार की प्रक्रिया शुरू की गई थी। बेरी में ग्रामीणों के विरोध के कारण शव को वहां दफन नहीं किया जा सका। इसके बाद चाल्हो पहाड़ के पास शव को नियमानुसार दफना दिया गया।  

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