‘रेस्टोरेंट-होटल बहुत हुआ, अब CMO की कमान दो’, संजय राउत ने IAS तुकाराम मुंढे को लेकर की बड़ी मांग

‘रेस्टोरेंट-होटल बहुत हुआ, अब CMO की कमान दो’, संजय राउत ने IAS तुकाराम मुंढे को लेकर की बड़ी मांग

IAS Tukaram Mundhe: महाराष्ट्र के खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) के आयुक्त आईएएस अधिकारी तुकाराम मुंढे इन दिनों अपनी कार्रवाई को लेकर चर्चा में हैं। नियमों का उल्लंघन करने वाले रेस्टोरेंट, होटल और अन्य प्रतिष्ठानों के खिलाफ FDA की कार्रवाई के बीच शिवसेना (UBT) सांसद संजय राउत ने मुंढे को बड़ी प्रशासनिक जिम्मेदारी देने की मांग की है। राउत ने कहा कि अब रेस्टोरेंट और होटल के खिलाफ कार्रवाई काफी हो गई, उन्हें मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) का प्रमुख बनाया जाना चाहिए।

‘दूसरे अहम विभागों की जिम्मेदारी दी जाए’

मुंबई में मीडिया से बातचीत के दौरान संजय राउत ने तुकाराम मुंढे की कार्रवाई का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने एफडीए प्रमुख का पद संभालने के बाद नियमों का उल्लंघन करने वाले प्रतिष्ठानों, रेस्टोरेंट और होटलों के खिलाफ कार्रवाई की है। राउत ने कहा कि राज्य में सूखा, पुनर्वास, राजस्व और नगर विकास जैसे कई महत्वपूर्ण विभागों में भ्रष्टाचार हो रहा है। राउत ने कहा कि मुंढे को इन क्षेत्रों से जुड़े काम की जिम्मेदारी दी जानी चाहिए।

राज्य सभा सांसद संजय राउत ने मांग की कि तुकाराम मुंढे को मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) का प्रमुख बनाया जाए।

‘लोगों को खाने दीजिए अब…’

संजय राउत ने कहा, “रेस्टोरेंट और होटलों पर कार्रवाई अब बस हुई, लोगों को खाने दीजिए। असल भ्रष्टाचार तो सूखा राहत, पुनर्वास, राजस्व और नगर विकास जैसे बड़े विभागों में हो रहा है। ऐसे में तुकाराम मुंढे को इन विभागों की जिम्मेदारी सौंपी जानी चाहिए। उन्हें मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) का प्रमुख बनाया जाना चाहिए।”

चुनाव आयोग पर भी राउत का हमला

संजय राउत ने बातचीत के दौरान चुनाव आयोग को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर सीधे आरोप लगाते हुए कहा कि उन्हें बेनकाब कर दिया गया है।

राउत ने कहा कि चुनाव आयोग इस तरह काम कर रहा है जिससे भाजपा (BJP) को सीधा फायदा पहुंचे। यह लोकतंत्र और स्वतंत्रता का हनन है। उन्होंने आरोप लगाया कि महाराष्ट्र में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के बाद मतदाता सूचियों से लगभग दो करोड़ नाम हटाए गए हैं, जो राज्य के लोकतांत्रिक ढांचे के लिए बेहद घातक है।

बता दें कि एसआईआर प्रक्रिया के दौरान जारी आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, महाराष्ट्र में 9.78 करोड़ पंजीकृत मतदाता हैं, जबकि प्रक्रिया के दौरान 2.07 करोड़ मतदाताओं से जुड़े गणना फॉर्म नहीं मिल सके। अधिकारियों ने ऐसे मामलों का कारण मतदाताओं की मृत्यु, उनका पता नहीं चल पाना, स्थायी रूप से स्थानांतरित हो जाना या एक से अधिक प्रविष्टियां होना बताया है।

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