रेवाड़ी नगर परिषद में उपप्रधान पद को लेकर सियासी घमासान शुरू हो गया है। कुर्सी हासिल करने के लिए पार्षदों की बाड़ेबंदी का दौर शुरू हो चुका है। एक-दो नहीं, बल्कि तीन से चार धड़े सक्रिय हैं। कुछ दावेदार अपने समर्थक पार्षदों को लेकर शहर से बाहर रवाना हो चुके हैं, जबकि दूसरे खेमे भी बहुमत जुटाने में लगे हैं। बताया जा रहा है कि दावेदार करीब एक दर्जन पार्षदों को लेकर शहर से रवाना हो चुके है। केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह की ओर से भी पार्षदों को एकजुट करने की कोशिश की जा रही है, लेकिन अब तक किसी भी धड़े के पास जरूरी संख्या पूरी होने की बात सामने नहीं आई है। ऐसे में उपप्रधान पद का चुनाव राजनीतिक प्रतिष्ठा का सवाल बनता नजर आ रहा है। बता दें कि दो दिन पहले ही उपप्रधान पद को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हुई थीं। केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह ने 28 नगर पार्षदों को फोन कर अपने आवास पर मिलने के लिए बुलाया था। इनमें 12 पार्षद भाजपा की टिकट पर चुनाव जीते थे, जबकि 16 पार्षद बाद में भाजपा में शामिल हुए थे। इस बैठक के बाद माना जा रहा था कि उपप्रधान पद पर सहमति बन जाएगी और चुनाव का रास्ता आसान होगा, लेकिन रविवार को समीकरण बदलते नजर आए। चेयरपर्सन के पति को सौंपी बाड़ेबंदी की जिम्मेदारी राजनीतिक चर्चाओं के अनुसार, केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह की ओर से नगर परिषद चेयरपर्सन विनीता पीपल और उनके पति नरेंद्र पीपल को पार्षदों की बाड़ेबंदी की जिम्मेदारी सौंपी गई है। राव समर्थित खेमे की ओर से निखिल मांडिया का नाम उपप्रधान पद के लिए सामने आ रहा है। उनके समर्थन में पार्षदों को एकजुट करने की कोशिश की जा रही है। इसी बीच दूसरे दावेदारों ने भी अपने-अपने समर्थकों को साथ लेकर जोड़-तोड़ शुरू कर दी है। तीन से चार धड़ों में बंटी सियासत उपप्रधान पद की दौड़ में पूनम यादव, चेतराम सैनी और सुमन सैनी के नाम भी चर्चा में हैं। पूनम यादव, संदीप यादव की पत्नी हैं, जबकि सुमन सैनी, जुगनू सैनी की पत्नी हैं। संदीप यादव और चेतराम सैनी अपने-अपने धड़ों के पार्षदों को लेकर रवाना हो चुके हैं। वहीं, सुमन सैनी के रेवाड़ी में ही मौजूद होने की बात कही जा रही है। अलग-अलग दावेदारों के सक्रिय होने से मुकाबला दिलचस्प हो गया है। सबसे बड़ा पेंच बहुमत के आंकड़े पर फंसा है। उपप्रधान बनने के लिए कम से कम 18 पार्षदों का समर्थन जरूरी है। राव समर्थित धड़े के पास 13 से 14 पार्षद बताए जा रहे हैं, जबकि विरोधी खेमे के पास 12 से 13 पार्षदों का समर्थन होने की चर्चा है। इन आंकड़ों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में किसी भी धड़े के पास स्पष्ट बहुमत होने की तस्वीर सामने नहीं आई है। राजनीतिक जानकारों के अनुसार, यदि किसी दूसरे धड़े ने जरूरी संख्या जुटा ली तो वह मुख्यमंत्री से मुलाकात कर चुनाव कराने की मांग उठा सकता है। ऐसे में उपप्रधान पद का चुनाव और भी रोचक हो सकता है। अब नजर इस बात पर है कि कौन-सा खेमा 18 पार्षदों का समर्थन जुटा पाता है और नगर परिषद की उपप्रधान की कुर्सी किसके हिस्से आती है। कांग्रेस की नजर भी चुनाव पर, ऐनवक्त पर उलटफेर की चर्चा उप प्रधान पद के चुनाव में कांग्रेस समर्थित पार्षद भी राजनीतिक समीकरण बदलने की उम्मीद लगाए हुए हैं। अंदरखाने पार्षदों को अपने पक्ष में करने के प्रयासों की चर्चा है। हालांकि, राव खेमे का दावा है कि उसके पास पर्याप्त बहुमत है। कुछ पार्षदों के बीजेपी खेमे के साथ आने से विपक्ष की रणनीति भी प्रभावित हुई है। इसके बावजूद राजनीतिक गलियारों में चुनाव के ऐनवक्त पर संभावित उलटफेर को लेकर चर्चाएं जारी हैं।

