भास्कर न्यूज|समस्तीपुर ईस्ट सेंट्रल रेलवे कर्मचारी यूनियन की आउटडोर शाखा की बैठक में कई मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई। कर्मचारियों ने समस्याओं के स्थायी समाधान की मांग उठाई।बैठक में करीब 293 रेलवे आवासों को परित्यक्त घोषित किए जाने का मामला प्रमुखता से उठा। कर्मचारियों ने सवाल किया कि मरम्मत की मांग के बावजूद इन आवासों को परित्यक्त घोषित किया गया। उन्होंने आशंका जताई कि पिछले दो वर्षों में आवासों की मरम्मत के नाम पर भुगतान की जांच होनी चाहिए।यूनियन ने मरम्मत कार्यों, संबंधित बिलों और भुगतान के अभिलेखों की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की। साथ ही, परित्यक्त घोषित आवासों पर भी किराया और बिजली बिल की वसूली जारी रहने का मुद्दा उठाया। कर्मचारियों का कहना था कि अभिलेखों की जांच कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट की जाए और अनियमितता मिलने पर नियमानुसार कार्रवाई हो। वहीं मंडलीय रेलवे अस्पताल, समस्तीपुर से बेहतर इलाज के लिए कर्मचारियों और उनके परिजनों को केंद्रीय अस्पताल, पटना रेफर किए जाने के बाद होने वाली परेशानियों पर भी चर्चा हुई। कर्मचारियों ने कहा कि पटना पहुंचने के बाद भी उन्हें कई तरह की असुविधाओं का सामना करना पड़ता है। उन्होंने चिकित्सा व्यवस्था को अधिक सुविधाजनक बनाने और रेफरल प्रक्रिया में सुधार की मांग करते हुए मंडल मंत्री मनोज कुमार को लिखित आवेदन सौंपा। समस्तीपुर के सेंट्रल पैनल में वातानुकूलन व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठाए गए। कर्मचारियों का आरोप था कि मरम्मत के नाम पर एसी हटाया गया, लेकिन बाद में नया लगाने के बजाय पुराना एसी फिर से लगा दिया गया। उनका कहना था कि यह एसी ठीक से काम नहीं कर रहा है। इसके अलावा, पैनल में काम करने वाले कर्मचारियों के लिए शुद्ध पेयजल की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने का मुद्दा भी उठाया गया। यूनियन ने दोनों समस्याओं के शीघ्र समाधान की मांग की।बैठक में परिचालन विभाग में गाड़ी नियंत्रक लिपिक का पद समाप्त किए जाने के बावजूद संबंधित काम कराए जाने पर सवाल उठाया गया। वहीं, रेलगाड़ी समूह संवर्ग के कर्मचारियों की पदोन्नति लंबे समय से लंबित रहने का मुद्दा भी उठा। यूनियन ने संबंधित मामलों की समीक्षा कर नियमानुसार समयबद्ध कार्रवाई करने की मांग की। भास्कर न्यूज|समस्तीपुर ईस्ट सेंट्रल रेलवे कर्मचारी यूनियन की आउटडोर शाखा की बैठक में कई मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई। कर्मचारियों ने समस्याओं के स्थायी समाधान की मांग उठाई।बैठक में करीब 293 रेलवे आवासों को परित्यक्त घोषित किए जाने का मामला प्रमुखता से उठा। कर्मचारियों ने सवाल किया कि मरम्मत की मांग के बावजूद इन आवासों को परित्यक्त घोषित किया गया। उन्होंने आशंका जताई कि पिछले दो वर्षों में आवासों की मरम्मत के नाम पर भुगतान की जांच होनी चाहिए।यूनियन ने मरम्मत कार्यों, संबंधित बिलों और भुगतान के अभिलेखों की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की। साथ ही, परित्यक्त घोषित आवासों पर भी किराया और बिजली बिल की वसूली जारी रहने का मुद्दा उठाया। कर्मचारियों का कहना था कि अभिलेखों की जांच कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट की जाए और अनियमितता मिलने पर नियमानुसार कार्रवाई हो। वहीं मंडलीय रेलवे अस्पताल, समस्तीपुर से बेहतर इलाज के लिए कर्मचारियों और उनके परिजनों को केंद्रीय अस्पताल, पटना रेफर किए जाने के बाद होने वाली परेशानियों पर भी चर्चा हुई। कर्मचारियों ने कहा कि पटना पहुंचने के बाद भी उन्हें कई तरह की असुविधाओं का सामना करना पड़ता है। उन्होंने चिकित्सा व्यवस्था को अधिक सुविधाजनक बनाने और रेफरल प्रक्रिया में सुधार की मांग करते हुए मंडल मंत्री मनोज कुमार को लिखित आवेदन सौंपा। समस्तीपुर के सेंट्रल पैनल में वातानुकूलन व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठाए गए। कर्मचारियों का आरोप था कि मरम्मत के नाम पर एसी हटाया गया, लेकिन बाद में नया लगाने के बजाय पुराना एसी फिर से लगा दिया गया। उनका कहना था कि यह एसी ठीक से काम नहीं कर रहा है। इसके अलावा, पैनल में काम करने वाले कर्मचारियों के लिए शुद्ध पेयजल की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने का मुद्दा भी उठाया गया। यूनियन ने दोनों समस्याओं के शीघ्र समाधान की मांग की।बैठक में परिचालन विभाग में गाड़ी नियंत्रक लिपिक का पद समाप्त किए जाने के बावजूद संबंधित काम कराए जाने पर सवाल उठाया गया। वहीं, रेलगाड़ी समूह संवर्ग के कर्मचारियों की पदोन्नति लंबे समय से लंबित रहने का मुद्दा भी उठा। यूनियन ने संबंधित मामलों की समीक्षा कर नियमानुसार समयबद्ध कार्रवाई करने की मांग की।

