मुजफ्फरनगर के दो युवकों के कथित तौर पर रूस में फंसने और रूसी सेना में भर्ती किए जाने का मामला सामने आया है। परिजनों का दावा है कि दोनों युवक रोजगार की तलाश में एजेंट के माध्यम से रूस गए थे। वीजा की अवधि समाप्त होने के बाद उन्हें भारत वापस भेजने के बजाय कथित तौर पर रूसी सेना में भर्ती कर दिया गया और उनके हाथों में हथियार थमा दिए गए। बाढ़ गांव निवासी हिमांशु शर्मा और पीपलशाह गांव निवासी शक्ति पुंडीर के परिजन अब उनकी सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं। 30 जुलाई को हुई थी आखिरी बातचीत परिजनों के मुताबिक, 30 जुलाई को दोनों युवकों से आखिरी बार फोन पर बातचीत हुई थी। इस दौरान उन्होंने अपनी स्थिति और मजबूरी के बारे में परिवार को जानकारी दी थी। इसके बाद से परिजन उनकी सकुशल वापसी का इंतजार कर रहे हैं। हिमांशु परिवार का इकलौता बेटा बाढ़ गांव निवासी हिमांशु शर्मा के परिवार की चिंता इसलिए भी बढ़ गई है, क्योंकि वह परिवार का इकलौता बेटा है। परिजनों के अनुसार, हिमांशु के पिता की कुछ दिन पहले ही मृत्यु हुई है। ऐसे में बेटे के रूस में फंसे होने की खबर से परिवार में चिंता का माहौल है। भाकियू नेता ने परिवारों से की मुलाकात भारतीय किसान यूनियन के एनसीआर अध्यक्ष विकास शर्मा ने रविवार सुबह करीब 7 बजे बाढ़ और पीपलशाह गांव पहुंचकर दोनों परिवारों से मुलाकात की। उन्होंने परिजनों से पूरे मामले की जानकारी ली और केंद्र सरकार से युवकों की सुरक्षित भारत वापसी के लिए हस्तक्षेप की मांग की। विकास शर्मा ने प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और विदेश मंत्रालय से मामले में तत्काल कार्रवाई की मांग की। उन्होंने कहा कि रोजगार के लिए युवकों को विदेश भेजने वाले एजेंटों की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए। दूतावास के जरिए स्थिति पता लगाने की मांग परिजनों की मांग है कि भारत सरकार रूस स्थित भारतीय दूतावास के माध्यम से दोनों युवकों की स्थिति की जानकारी कराए। साथ ही, यदि उन्हें उनकी इच्छा के विरुद्ध रूसी सेना में शामिल किया गया है तो राजनयिक स्तर पर कार्रवाई कर उन्हें सुरक्षित भारत वापस लाया जाए। फिलहाल परिवारों की निगाह सरकार की कार्रवाई और युवकों से दोबारा संपर्क होने पर टिकी है।

