देवघर शिवगंगा तट पर पितृ तर्पण के लिए उमड़ी भीड़:पितृ पक्ष में दूर-दराज से पहुंचे श्रद्धालु, पुरोहितों की देखरेख में किया तर्पण

देवघर शिवगंगा तट पर पितृ तर्पण के लिए उमड़ी भीड़:पितृ पक्ष में दूर-दराज से पहुंचे श्रद्धालु, पुरोहितों की देखरेख में किया तर्पण

देवघर पितृ पक्ष के मौके पर रविवार से देवघर के शिवगंगा तट पर पितरों के तर्पण के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है। दूर-दराज से पहुंचे लोग अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं। सुबह से ही श्रद्धालु शिवगंगा में स्नान के बाद पंडा समाज के पुरोहितों की देखरेख में अपने पितरों को जल अर्पित कर रहे हैं। तट पर तर्पण और धार्मिक अनुष्ठान का सिलसिला लगातार जारी है। तिल, जौ, जल और कुश से किया तर्पण पंडा समाज के पुरोहितों के अनुसार, पितृ तर्पण में तिल, जौ, जल और कुश का विशेष महत्व माना जाता है। श्रद्धालु कुश धारण कर तिल और जौ मिले जल से पितरों का स्मरण करते हुए तर्पण करते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस अनुष्ठान से पूर्वजों का आशीर्वाद प्राप्त होता है। परिवार में सुख-शांति बनी रहती है। पुरोहितों का कहना है कि पितरों के लिए वर्ष का एक दिन मनुष्यों के 365 दिनों के बराबर माना जाता है। इसी धार्मिक मान्यता के कारण पितृ पक्ष को पितरों के स्मरण और तर्पण के लिए विशेष समय माना गया है। आत्मा की शांति और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना शिवगंगा तट पर तर्पण के बाद श्रद्धालु अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना कर रहे हैं। पुरोहितों के मंत्रोच्चार के बीच लोग विधि-विधान से तर्पण कर रहे हैं। पितृ पक्ष के दौरान शिवगंगा तट पर श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ने की संभावना है, जिससे पूरे क्षेत्र में धार्मिक गतिविधियां और बढ़ गई हैं। देवघर पितृ पक्ष के मौके पर रविवार से देवघर के शिवगंगा तट पर पितरों के तर्पण के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है। दूर-दराज से पहुंचे लोग अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं। सुबह से ही श्रद्धालु शिवगंगा में स्नान के बाद पंडा समाज के पुरोहितों की देखरेख में अपने पितरों को जल अर्पित कर रहे हैं। तट पर तर्पण और धार्मिक अनुष्ठान का सिलसिला लगातार जारी है। तिल, जौ, जल और कुश से किया तर्पण पंडा समाज के पुरोहितों के अनुसार, पितृ तर्पण में तिल, जौ, जल और कुश का विशेष महत्व माना जाता है। श्रद्धालु कुश धारण कर तिल और जौ मिले जल से पितरों का स्मरण करते हुए तर्पण करते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस अनुष्ठान से पूर्वजों का आशीर्वाद प्राप्त होता है। परिवार में सुख-शांति बनी रहती है। पुरोहितों का कहना है कि पितरों के लिए वर्ष का एक दिन मनुष्यों के 365 दिनों के बराबर माना जाता है। इसी धार्मिक मान्यता के कारण पितृ पक्ष को पितरों के स्मरण और तर्पण के लिए विशेष समय माना गया है। आत्मा की शांति और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना शिवगंगा तट पर तर्पण के बाद श्रद्धालु अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना कर रहे हैं। पुरोहितों के मंत्रोच्चार के बीच लोग विधि-विधान से तर्पण कर रहे हैं। पितृ पक्ष के दौरान शिवगंगा तट पर श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ने की संभावना है, जिससे पूरे क्षेत्र में धार्मिक गतिविधियां और बढ़ गई हैं।  

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