रीवा में प्रस्तावित परमाणु बिजलीघर का विरोध, Umang Singhar ने दिया ग्रामीणों को समर्थन

रीवा में प्रस्तावित परमाणु बिजलीघर का विरोध, Umang Singhar ने दिया ग्रामीणों को समर्थन

मध्यप्रदेश के रीवा जिले में प्रस्तावित परमाणु बिजलीघर के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे आदिवासियों और ग्रामीणों को कांग्रेस ने रविवार को समर्थन दिया। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने इस मुद्दे को राज्य विधानसभा के आगामी सत्र में उठाने का आश्वासन दिया। सिंघार ने सिरमौर क्षेत्र के सरई-रोजौही गांव पहुंचकर प्रदर्शनकारी आदिवासियों और ग्रामीणों से मुलाकात की।

उन्होंने आंदोलन के दौरान बीमार पड़ने के बाद जान गंवाने वाली विमला कोल के परिवार को एक लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा भी की। नेता प्रतिपक्ष के कार्यालय की ओर से जारी बयान के अनुसार, सिंघार ने रोजौही में जल सत्याग्रह कर रहे आदिवासियों व ग्रामीणों से मुलाकात कर प्रस्तावित परियोजना के विरोध में उनका साथ देने का आश्वासन दिया। बयान में बताया गया कि कोल आंदोलन के दौरान बीमार पड़ गई थीं और बाद में उनकी मृत्यु हो गई।

सिंघार ने उनकी मौत के बाद क्षेत्र का दौरा किया, प्रदर्शनकारियों से मुलाकात की और उनकी मांगों को विधानसभा में उठाने का आश्वासन दिया। उन्होंने विमला कोल के परिवार से मुलाकात के दौरान उनकी मौत के संबंध में रिपोर्ट भेजने में देरी को लेकर प्रशासनिक अधिकारियों से सवाल किए। नेता प्रतिपक्ष ने तहसीलदार और नायब तहसीलदार से पूछा कि रिपोर्ट अब तक क्यों नहीं भेजी गई।

तहसीलदार ने बताया कि मौखिक रिपोर्ट प्रस्तुत कर दी गई है। सिंघार ने इस पर नाराजगी जताई और स्पष्ट जवाब मांगा। उन्होंने प्रशासनिक जवाबदेही तय करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।

सिंघार ने पत्रकारों से कहा, “रीवा जिले के घनी आबादी वाले क्षेत्रों में परमाणु बिजलीघर स्थापित करने का फैसला सरकार का गैर-जिम्मेदाराना कदम है। हमारा विरोध विकास से नहीं, बल्कि विकास के नाम पर विनाश से है।”
उन्होंने सवाल किया कि क्या सरकार को स्थानीय निवासियों की सुरक्षा, स्वास्थ्य और परमाणु प्रदूषण के संभावित खतरों की चिंता है। सिंघार ने आरोप लगाया कि नियमों की अनदेखी कर सरकार आदिवासियों और ग्रामीणों की जिंदगी को जोखिम में डाल रही है।

नेता प्रतिपक्ष ने कहा, “इस परियोजना से किसे फायदा पहुंचाने की मंशा है? विमला कोल अपनी जमीन, अधिकारों और अस्तित्व की रक्षा के लिए संघर्ष कर रही थीं। उनकी मौत से आंदोलन और गंभीर हो गया है।”
उन्होंने कहा कि आदिवासी समुदाय के जल, जंगल, जमीन और अस्तित्व से जुड़े मुद्दों की अनदेखी नहीं की जा सकती।

रीवा जिले के सिरमौर क्षेत्र के सरई कला और रोजौही गांवों के निवासी टाटा पावर की प्रस्तावित परमाणु बिजली परियोजना के विरोध में प्रदर्शन कर रहे हैं।

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