‘रिश्वत लेने वाला ही नहीं,देने वाला भी कानून का दोषी’:भागलपुर में IT डिपार्टमेंट ने निकाली जागरूकता रैली, वॉकथॉन कर लोगों को किया सतर्क

‘रिश्वत लेने वाला ही नहीं,देने वाला भी कानून का दोषी’:भागलपुर में IT डिपार्टमेंट ने निकाली जागरूकता रैली, वॉकथॉन कर लोगों को किया सतर्क

भागलपुर में शुक्रवार को आयकर विभाग ने जागरूकता रैली और वॉकथॉन निकाला। केंद्र सरकार एवं आयकर विभाग की ओर से 25 अक्टूबर से 1 नवंबर तक मनाए जा रहे सतर्कता जागरूकता सप्ताह के तहत यह आयोजन किया गया। इसमें आयकर विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों ने हिस्सा लिया। रैली के जरिए लोगों को भ्रष्टाचार, रिश्वतखोरी और गलत तरीके से काम कराने की प्रवृत्ति से दूर रहने की अपील की गई। साथ ही बताया गया कि ईमानदार और पारदर्शी व्यवस्था बनाने की जिम्मेदारी सिर्फ सरकारी अधिकारियों की नहीं, बल्कि हर नागरिक की है। काम जल्दी कराने के लिए रिश्वत देना भी अपराध आयकर उपनिदेशक (अन्वेषण) कुमारी सुनीता के नेतृत्व में आयोजित वॉकथॉन का उद्देश्य आम लोगों को भ्रष्टाचार के प्रति जागरूक करना था। उन्होंने कहा कि रिश्वत लेना और देना दोनों गंभीर अपराध हैं। कई बार लोग अपना काम जल्दी कराने या किसी परेशानी से बचने के लिए खुद ही रिश्वत देने को तैयार हो जाते हैं। उन्हें लगता है कि पैसे देने से उनका काम आसानी से हो जाएगा। लेकिन ऐसा करना भी कानून के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि लोगों को इस सोच से बाहर निकलना होगा। अगर कोई अधिकारी या कर्मचारी रिश्वत मांगता है, तो उसका विरोध करना चाहिए। वहीं, किसी भी काम को कराने के लिए खुद से गलत रास्ता नहीं अपनाना चाहिए। जब तक आम लोग रिश्वत देने से इनकार नहीं करेंगे, तब तक भ्रष्टाचार पर पूरी तरह रोक लगाना मुश्किल होगा। भ्रष्टाचार से कमजोर होता है समाज का भरोसा कुमारी सुनीता ने कहा कि भ्रष्टाचार केवल सरकारी व्यवस्था को कमजोर नहीं करता, बल्कि समाज में ईमानदारी और लोगों के बीच भरोसे को भी नुकसान पहुंचाता है। रिश्वत देकर काम कराने से उन लोगों के साथ अन्याय होता है, जो नियमों का पालन करते हैं और अपनी बारी का इंतजार करते हैं। इससे सभी को समान अवसर मिलने की व्यवस्था भी प्रभावित होती है। उन्होंने कहा कि जब कोई व्यक्ति अनुचित तरीके से अपना काम कराने के लिए रिश्वत देता है, तो वह भी भ्रष्टाचार को बढ़ावा देता है। इसलिए जरूरी है कि लोग न तो रिश्वत दें और न ही किसी को रिश्वत लेने का मौका दें। सिर्फ सरकारी विभाग नहीं, हर नागरिक की जिम्मेदारी आयकर उपनिदेशक ने बताया कि सतर्कता जागरूकता सप्ताह मनाने का उद्देश्य लोगों को भ्रष्टाचार के खिलाफ जागरूक करना है। यह लड़ाई किसी एक विभाग या सरकारी एजेंसी तक सीमित नहीं है। इसमें आम लोगों की भागीदारी भी जरूरी है। उन्होंने लोगों से अपील की कि सरकारी या गैर-सरकारी काम कराने के लिए गलत रास्ता न अपनाएं। नियमों का पालन करें और अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रहें। आसपास किसी तरह की अनैतिक गतिविधि दिखाई देने पर उसका विरोध करें। उन्होंने कहा कि व्यवस्था में बदलाव तभी आएगा, जब लोग खुद ईमानदारी से नियमों का पालन करेंगे। रिश्वत मांगने पर विरोध करें, देने से भी बचें वॉकथॉन के जरिए लोगों को यह संदेश दिया गया कि भ्रष्टाचार को केवल भाषण और नारों से खत्म नहीं किया जा सकता। इसके लिए व्यवहार में बदलाव लाना होगा। अगर कोई व्यक्ति रिश्वत मांगता है, तो उसे बढ़ावा देने के बजाय उसका विरोध करना चाहिए। वहीं, अपना काम जल्दी कराने के लिए पैसे देने की आदत भी छोड़नी होगी। अभियान का मुख्य संदेश यही रहा कि भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई में सरकारी अधिकारियों के साथ आम नागरिकों की भी बराबर की भूमिका है। रिश्वत लेने और देने, दोनों प्रवृत्तियों पर रोक लगेगी, तभी ईमानदार और पारदर्शी व्यवस्था बनाने की दिशा में बदलाव संभव होगा। भागलपुर में शुक्रवार को आयकर विभाग ने जागरूकता रैली और वॉकथॉन निकाला। केंद्र सरकार एवं आयकर विभाग की ओर से 25 अक्टूबर से 1 नवंबर तक मनाए जा रहे सतर्कता जागरूकता सप्ताह के तहत यह आयोजन किया गया। इसमें आयकर विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों ने हिस्सा लिया। रैली के जरिए लोगों को भ्रष्टाचार, रिश्वतखोरी और गलत तरीके से काम कराने की प्रवृत्ति से दूर रहने की अपील की गई। साथ ही बताया गया कि ईमानदार और पारदर्शी व्यवस्था बनाने की जिम्मेदारी सिर्फ सरकारी अधिकारियों की नहीं, बल्कि हर नागरिक की है। काम जल्दी कराने के लिए रिश्वत देना भी अपराध आयकर उपनिदेशक (अन्वेषण) कुमारी सुनीता के नेतृत्व में आयोजित वॉकथॉन का उद्देश्य आम लोगों को भ्रष्टाचार के प्रति जागरूक करना था। उन्होंने कहा कि रिश्वत लेना और देना दोनों गंभीर अपराध हैं। कई बार लोग अपना काम जल्दी कराने या किसी परेशानी से बचने के लिए खुद ही रिश्वत देने को तैयार हो जाते हैं। उन्हें लगता है कि पैसे देने से उनका काम आसानी से हो जाएगा। लेकिन ऐसा करना भी कानून के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि लोगों को इस सोच से बाहर निकलना होगा। अगर कोई अधिकारी या कर्मचारी रिश्वत मांगता है, तो उसका विरोध करना चाहिए। वहीं, किसी भी काम को कराने के लिए खुद से गलत रास्ता नहीं अपनाना चाहिए। जब तक आम लोग रिश्वत देने से इनकार नहीं करेंगे, तब तक भ्रष्टाचार पर पूरी तरह रोक लगाना मुश्किल होगा। भ्रष्टाचार से कमजोर होता है समाज का भरोसा कुमारी सुनीता ने कहा कि भ्रष्टाचार केवल सरकारी व्यवस्था को कमजोर नहीं करता, बल्कि समाज में ईमानदारी और लोगों के बीच भरोसे को भी नुकसान पहुंचाता है। रिश्वत देकर काम कराने से उन लोगों के साथ अन्याय होता है, जो नियमों का पालन करते हैं और अपनी बारी का इंतजार करते हैं। इससे सभी को समान अवसर मिलने की व्यवस्था भी प्रभावित होती है। उन्होंने कहा कि जब कोई व्यक्ति अनुचित तरीके से अपना काम कराने के लिए रिश्वत देता है, तो वह भी भ्रष्टाचार को बढ़ावा देता है। इसलिए जरूरी है कि लोग न तो रिश्वत दें और न ही किसी को रिश्वत लेने का मौका दें। सिर्फ सरकारी विभाग नहीं, हर नागरिक की जिम्मेदारी आयकर उपनिदेशक ने बताया कि सतर्कता जागरूकता सप्ताह मनाने का उद्देश्य लोगों को भ्रष्टाचार के खिलाफ जागरूक करना है। यह लड़ाई किसी एक विभाग या सरकारी एजेंसी तक सीमित नहीं है। इसमें आम लोगों की भागीदारी भी जरूरी है। उन्होंने लोगों से अपील की कि सरकारी या गैर-सरकारी काम कराने के लिए गलत रास्ता न अपनाएं। नियमों का पालन करें और अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रहें। आसपास किसी तरह की अनैतिक गतिविधि दिखाई देने पर उसका विरोध करें। उन्होंने कहा कि व्यवस्था में बदलाव तभी आएगा, जब लोग खुद ईमानदारी से नियमों का पालन करेंगे। रिश्वत मांगने पर विरोध करें, देने से भी बचें वॉकथॉन के जरिए लोगों को यह संदेश दिया गया कि भ्रष्टाचार को केवल भाषण और नारों से खत्म नहीं किया जा सकता। इसके लिए व्यवहार में बदलाव लाना होगा। अगर कोई व्यक्ति रिश्वत मांगता है, तो उसे बढ़ावा देने के बजाय उसका विरोध करना चाहिए। वहीं, अपना काम जल्दी कराने के लिए पैसे देने की आदत भी छोड़नी होगी। अभियान का मुख्य संदेश यही रहा कि भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई में सरकारी अधिकारियों के साथ आम नागरिकों की भी बराबर की भूमिका है। रिश्वत लेने और देने, दोनों प्रवृत्तियों पर रोक लगेगी, तभी ईमानदार और पारदर्शी व्यवस्था बनाने की दिशा में बदलाव संभव होगा।  

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