पानीपत में दशहरा महोत्सव के दौरान इस बार पानीपत में रावण दहन का नजारा कुछ अलग होगा। सेक्टर 13-17 के ग्राउंड में श्रीराम दशहरा कमेटी की ओर से पहली बार पांच पुतलों का दहन करने की तैयारी है। यहां रावण, कुंभकरण और मेघनाद के साथ खर और दूषण के पुतले भी जलाए जाएंगे। इसके अलावा दर्शकों को लंका दहन का दृश्य भी दिखाया जाएगा। आयोजकों के अनुसार, पुतलों को गंगाजल से स्नान कराया जाएगा। खर और दूषण के पुतलों को शामिल करने से इस बार का आयोजन विशेष होगा। उन्होंने बताया कि आमतौर पर दशहरे पर रावण, कुंभकरण और मेघनाद के पुतलों का ही दहन किया जाता है, लेकिन इस बार खर और दूषण का भी दहन होगा। रामायण के प्रसंग किए जाएंगे जीवंत श्रीराम दशहरा कमेटी के सदस्य सुभाष बठला ने बताया कि सेक्टर 13-17 के ग्राउंड में होने वाले आयोजन को लेकर तैयारियां की जा रही हैं। आयोजन में रामायण के उन प्रसंगों को भी दर्शाने का प्रयास होगा, जो भगवान श्रीराम और रावण के बीच हुए युद्ध की पृष्ठभूमि से जुड़े हैं। लंका दहन के दृश्य के माध्यम से हनुमान जी के लंका पहुंचने और वहां आग लगाने के प्रसंग को मंचित किया जाएगा। इससे दर्शकों को रामायण की कथा के कई महत्वपूर्ण प्रसंग एक ही आयोजन में देखने को मिलेंगे। कौन थे खर और दूषण? रामायण के अनुसार, खर और दूषण रावण के रिश्तेदार और राक्षस योद्धा थे। वे लंका के राजा रावण के परिवार से जुड़े थे और दंडकारण्य क्षेत्र में राक्षसों की शक्ति के प्रमुख प्रतिनिधियों में गिने जाते थे। खर को दंडकारण्य क्षेत्र का शक्तिशाली राक्षस शासक बताया गया है, जबकि दूषण उसका प्रमुख सहयोगी और सेनापति था। दोनों का उल्लेख रामायण के अरण्यकांड में मिलता है। भगवान राम से युद्ध करने पहुंचे थे दोनों कथा के अनुसार, पंचवटी में रावण की बहन शूर्पणखा की नाक-कान कटने की घटना के बाद खर और दूषण भगवान श्रीराम से युद्ध करने पहुंचे थे। खर-दूषण ने बड़ी राक्षस सेना के साथ श्रीराम पर हमला किया, लेकिन भगवान श्रीराम ने युद्ध में उनका वध कर दिया। इस घटना से रावण को श्रीराम की शक्ति का पता चला और आगे चलकर सीता हरण तथा राम-रावण युद्ध की घटनाओं की पृष्ठभूमि बनी।

