राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की जयंती पर बेगूसराय सहित पूरे बिहार को एक ऐतिहासिक शैक्षणिक सौगात मिली है। बिहार मंत्रिपरिषद की बैठक में बेगूसराय में रामधारी सिंह दिनकर विश्वविद्यालय की स्थापना के प्रस्ताव को औपचारिक स्वीकृति मिली है। विश्वविद्यालय की शुरुआती स्थापना, अधिकारियों और कर्मियों के वेतन के लिए राज्य सरकार की ओर से 15 करोड़ रुपए की प्रशासनिक स्वीकृति का प्रावधान किया गया है। बेगूसराय में राष्ट्रकवि दिनकर के नाम पर एक समर्पित विश्वविद्यालय स्थापित करने की मांग लंबे समय से की जा रही थी। बेगूसराय के सांसद और केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह लगातार प्रयासरत रहे। 22 जून को मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के साथ हुई बैठक में उन्होंने इस मांग को प्राथमिकता के साथ रखा था। इसके बाद 19 जुलाई को बेगूसराय के आईओसीएल स्टेडियम में आयोजित सभा में गिरिराज सिंह ने पुनः मुख्यमंत्री के सामने यह विषय उठाया। उसी मंच से मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने दिनकर जी की जन्मभूमि पर उनके नाम से विश्वविद्यालय की स्थापना करने की घोषणा की थी। 15 एकड़ भूमि चिह्नित कर रिपोर्ट भेजी स्थायी परिसर के निर्माण के लिए जिला प्रशासन ने 15 एकड़ भूमि चिह्नित कर इसकी रिपोर्ट उच्च शिक्षा विभाग को भेजी है। स्वीकृति से स्थानीय स्तर पर शैक्षणिक ढांचे को नई मजबूती मिलेगी। कैबिनेट की मंजूरी मिलने पर स्थानीय सांसद और केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का आभार जताया। गिरिराज सिंह ने कहा है कि मुख्यमंत्री जो कहते हैं, उसे निश्चित रूप से धरातल पर उतारते हैं। विश्वविद्यालय की घोषणा के कुछ ही समय बाद राष्ट्रकवि की जयंती के दिन ही कैबिनेट से स्वीकृति मिलना यह दर्शाता है कि सरकार जनभावनाओं के प्रति अत्यंत संवेदनशील है। दिनकर की जयंती पर उन्हें नमन किया गिरिराज सिंह ने बेगूसराय की जनता, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद और जिले के प्रबुद्ध वर्ग की ओर से मुख्यमंत्री का धन्यवाद-अभिनंदन किया और उनके दीर्घायु होने और बिहार के निरंतर विकास की कामना की। इसके साथ ही राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की जयंती पर उन्हें नमन उनके महान साहित्यिक एवं वैचारिक योगदान को याद किया। गिरिराज सिंह ने कहा कि राष्ट्रकवि ने लिखा था कि एक हाथ में कमल लिए और दूसरे हाथ में धर्म-दीप्त विज्ञान लेकर इस धरती पर इंसान उठने वाला है। जब दिनकर जी ने यह पंक्तियां रची थी, तब भाजपा का गठन भी नहीं हुआ था। आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश जिस प्रकार एक ओर अपनी सांस्कृतिक जड़ों और विकास (कमल) को सहेजे हुए है और दूसरी ओर विज्ञान व तकनीक के क्षेत्र में नए आयाम गढ़ रहा है। साहित्य और भारतीय चिंतन का केंद्र बनेगा प्रस्तावित रामधारी सिंह दिनकर विश्वविद्यालय आने वाले समय में उच्च शिक्षा, मौलिक शोध, साहित्य और भारतीय चिंतन का एक उत्कृष्ट केंद्र बनेगा। यह संस्थान राष्ट्रकवि दिनकर की साहित्यिक एवं वैचारिक विरासत को नई पीढ़ी तक सहेजकर पहुंचाने में अग्रणी भूमिका निभाएगा। बेगूसराय एवं आसपास के युवाओं को अपने ही क्षेत्र में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और शोध के बेहतर अवसर प्राप्त होंगे। इस विश्वविद्यालय के निर्माण से बेगूसराय की पहचान अब केवल एक औद्योगिक क्षेत्र के रूप में ही नहीं, बल्कि देश के एक प्रमुख शैक्षणिक और बौद्धिक केंद्र के रूप में भी स्थापित होगी। राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की जयंती पर बेगूसराय सहित पूरे बिहार को एक ऐतिहासिक शैक्षणिक सौगात मिली है। बिहार मंत्रिपरिषद की बैठक में बेगूसराय में रामधारी सिंह दिनकर विश्वविद्यालय की स्थापना के प्रस्ताव को औपचारिक स्वीकृति मिली है। विश्वविद्यालय की शुरुआती स्थापना, अधिकारियों और कर्मियों के वेतन के लिए राज्य सरकार की ओर से 15 करोड़ रुपए की प्रशासनिक स्वीकृति का प्रावधान किया गया है। बेगूसराय में राष्ट्रकवि दिनकर के नाम पर एक समर्पित विश्वविद्यालय स्थापित करने की मांग लंबे समय से की जा रही थी। बेगूसराय के सांसद और केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह लगातार प्रयासरत रहे। 22 जून को मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के साथ हुई बैठक में उन्होंने इस मांग को प्राथमिकता के साथ रखा था। इसके बाद 19 जुलाई को बेगूसराय के आईओसीएल स्टेडियम में आयोजित सभा में गिरिराज सिंह ने पुनः मुख्यमंत्री के सामने यह विषय उठाया। उसी मंच से मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने दिनकर जी की जन्मभूमि पर उनके नाम से विश्वविद्यालय की स्थापना करने की घोषणा की थी। 15 एकड़ भूमि चिह्नित कर रिपोर्ट भेजी स्थायी परिसर के निर्माण के लिए जिला प्रशासन ने 15 एकड़ भूमि चिह्नित कर इसकी रिपोर्ट उच्च शिक्षा विभाग को भेजी है। स्वीकृति से स्थानीय स्तर पर शैक्षणिक ढांचे को नई मजबूती मिलेगी। कैबिनेट की मंजूरी मिलने पर स्थानीय सांसद और केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का आभार जताया। गिरिराज सिंह ने कहा है कि मुख्यमंत्री जो कहते हैं, उसे निश्चित रूप से धरातल पर उतारते हैं। विश्वविद्यालय की घोषणा के कुछ ही समय बाद राष्ट्रकवि की जयंती के दिन ही कैबिनेट से स्वीकृति मिलना यह दर्शाता है कि सरकार जनभावनाओं के प्रति अत्यंत संवेदनशील है। दिनकर की जयंती पर उन्हें नमन किया गिरिराज सिंह ने बेगूसराय की जनता, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद और जिले के प्रबुद्ध वर्ग की ओर से मुख्यमंत्री का धन्यवाद-अभिनंदन किया और उनके दीर्घायु होने और बिहार के निरंतर विकास की कामना की। इसके साथ ही राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की जयंती पर उन्हें नमन उनके महान साहित्यिक एवं वैचारिक योगदान को याद किया। गिरिराज सिंह ने कहा कि राष्ट्रकवि ने लिखा था कि एक हाथ में कमल लिए और दूसरे हाथ में धर्म-दीप्त विज्ञान लेकर इस धरती पर इंसान उठने वाला है। जब दिनकर जी ने यह पंक्तियां रची थी, तब भाजपा का गठन भी नहीं हुआ था। आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश जिस प्रकार एक ओर अपनी सांस्कृतिक जड़ों और विकास (कमल) को सहेजे हुए है और दूसरी ओर विज्ञान व तकनीक के क्षेत्र में नए आयाम गढ़ रहा है। साहित्य और भारतीय चिंतन का केंद्र बनेगा प्रस्तावित रामधारी सिंह दिनकर विश्वविद्यालय आने वाले समय में उच्च शिक्षा, मौलिक शोध, साहित्य और भारतीय चिंतन का एक उत्कृष्ट केंद्र बनेगा। यह संस्थान राष्ट्रकवि दिनकर की साहित्यिक एवं वैचारिक विरासत को नई पीढ़ी तक सहेजकर पहुंचाने में अग्रणी भूमिका निभाएगा। बेगूसराय एवं आसपास के युवाओं को अपने ही क्षेत्र में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और शोध के बेहतर अवसर प्राप्त होंगे। इस विश्वविद्यालय के निर्माण से बेगूसराय की पहचान अब केवल एक औद्योगिक क्षेत्र के रूप में ही नहीं, बल्कि देश के एक प्रमुख शैक्षणिक और बौद्धिक केंद्र के रूप में भी स्थापित होगी।

