शारदीय नवरात्र के अवसर पर रामगढ़ जिले के बरकाकाना क्षेत्र अंतर्गत पोचरा के झोपड़ी टोला में रूपा देवी की नवरात्र साधना लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है। राजेश राम की पत्नी रूपा देवी करीब 12 किलोग्राम वजन की नुकीली लोहे की कीलों से बनी सेज पर लेटकर नौ दिनों तक मां दुर्गा की आराधना कर रही हैं। उनकी साधना को देखने और माता के दर्शन करने के लिए आसपास के गांवों के साथ दूर-दराज के क्षेत्रों से भी श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। पूजा स्थल पर धूप-अगरबत्ती, भजन-कीर्तन और माता के जयकारों से भक्तिमय माहौल बना हुआ है। रूपा देवी ने नवरात्र के प्रथम दिन से साधना शुरू की है। नवमी तक इसे जारी रखने का संकल्प लिया है। उनकी इस साधना को देखने के लिए महिलाओं, बुजुर्गों और युवाओं की आवाजाही बनी हुई है। पेट पर कलश स्थापित, 24 घंटे जलता रहता है दीप रूपा देवी की साधना में पेट पर पीतल का कलश स्थापित किया गया है। इस कलश पर एक दीपक लगातार 24 घंटे जल रहा है। वह नुकीली लोहे की कीलों से बनी सेज पर लेटकर मां भगवती की पूजा-अर्चना कर रही हैं। परिवार के अनुसार, यह उनका तीसरा वर्ष है, जब वह नवरात्र के दौरान इस तरह का अनुष्ठान कर रही हैं। नौ दिनों तक चलने वाली इस साधना में वह मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की आराधना करती हैं। इसके साथ ही मां मनसा देवी की भी नियमित पूजा करती हैं। नवरात्र के दौरान उनकी साधना और पूजा की व्यवस्था को लेकर परिवार के सदस्य सहयोग कर रहे हैं। पूजा स्थल पर श्रद्धालु माता के दर्शन कर सुख, शांति और समृद्धि की कामना कर रहे हैं। शादी के बाद बढ़ी पूजा-पाठ में रुचि रूपा देवी की शादी राजेश राम से करीब 13 वर्ष पहले हुई थी। उनके आठ वर्षीय बेटे आदित्य कुमार और छह वर्षीय बेटी अनन्या कुमारी हैं। बताया जाता है कि शादी के बाद से ही रूपा देवी की पूजा-पाठ और धार्मिक अनुष्ठानों में रुचि बढ़ी। इसके बाद उन्होंने नवरात्र में कठिन साधना करने की परंपरा शुरू की। वह नौ दिनों तक निर्जला उपवास रखकर मां दुर्गा की आराधना करती हैं। इस दौरान उनका अधिकतर समय पूजा-अर्चना में बीतता है। परिवार के सदस्य भी धार्मिक अनुष्ठान में सहयोग करते हैं। रूपा देवी की तीन वर्षों से जारी यह साधना झोपड़ी टोला और आसपास के क्षेत्रों में चर्चा का विषय बनी हुई है। नवरात्र के मौके पर श्रद्धालु उनके पूजा स्थल पर पहुंचकर माता के दरबार में माथा टेक रहे हैं। दूर-दराज से पहुंच रहे श्रद्धालु नवरात्र के दौरान पोचरा के झोपड़ी टोला में मां भगवती की आराधना को लेकर श्रद्धालुओं में उत्साह देखा जा रहा है। दूर-दराज के क्षेत्रों से भी लोग यहां पहुंचकर माता के दर्शन कर रहे हैं। पूजा स्थल पर प्रार्थना, भजन-कीर्तन और जयकारों के बीच धार्मिक माहौल बना हुआ है। रूपा देवी के पति राजेश राम सहित परिवार के अन्य सदस्य श्रद्धालुओं की व्यवस्था और पूजा-अर्चना में सहयोग कर रहे हैं। नौ दिनों तक चलने वाले इस अनुष्ठान का समापन नवमी के अवसर पर होगा। रूपा देवी की साधना शारदीय नवरात्र में पोचरा के झोपड़ी टोला की विशेष पहचान बनी हुई है। शारदीय नवरात्र के अवसर पर रामगढ़ जिले के बरकाकाना क्षेत्र अंतर्गत पोचरा के झोपड़ी टोला में रूपा देवी की नवरात्र साधना लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है। राजेश राम की पत्नी रूपा देवी करीब 12 किलोग्राम वजन की नुकीली लोहे की कीलों से बनी सेज पर लेटकर नौ दिनों तक मां दुर्गा की आराधना कर रही हैं। उनकी साधना को देखने और माता के दर्शन करने के लिए आसपास के गांवों के साथ दूर-दराज के क्षेत्रों से भी श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। पूजा स्थल पर धूप-अगरबत्ती, भजन-कीर्तन और माता के जयकारों से भक्तिमय माहौल बना हुआ है। रूपा देवी ने नवरात्र के प्रथम दिन से साधना शुरू की है। नवमी तक इसे जारी रखने का संकल्प लिया है। उनकी इस साधना को देखने के लिए महिलाओं, बुजुर्गों और युवाओं की आवाजाही बनी हुई है। पेट पर कलश स्थापित, 24 घंटे जलता रहता है दीप रूपा देवी की साधना में पेट पर पीतल का कलश स्थापित किया गया है। इस कलश पर एक दीपक लगातार 24 घंटे जल रहा है। वह नुकीली लोहे की कीलों से बनी सेज पर लेटकर मां भगवती की पूजा-अर्चना कर रही हैं। परिवार के अनुसार, यह उनका तीसरा वर्ष है, जब वह नवरात्र के दौरान इस तरह का अनुष्ठान कर रही हैं। नौ दिनों तक चलने वाली इस साधना में वह मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की आराधना करती हैं। इसके साथ ही मां मनसा देवी की भी नियमित पूजा करती हैं। नवरात्र के दौरान उनकी साधना और पूजा की व्यवस्था को लेकर परिवार के सदस्य सहयोग कर रहे हैं। पूजा स्थल पर श्रद्धालु माता के दर्शन कर सुख, शांति और समृद्धि की कामना कर रहे हैं। शादी के बाद बढ़ी पूजा-पाठ में रुचि रूपा देवी की शादी राजेश राम से करीब 13 वर्ष पहले हुई थी। उनके आठ वर्षीय बेटे आदित्य कुमार और छह वर्षीय बेटी अनन्या कुमारी हैं। बताया जाता है कि शादी के बाद से ही रूपा देवी की पूजा-पाठ और धार्मिक अनुष्ठानों में रुचि बढ़ी। इसके बाद उन्होंने नवरात्र में कठिन साधना करने की परंपरा शुरू की। वह नौ दिनों तक निर्जला उपवास रखकर मां दुर्गा की आराधना करती हैं। इस दौरान उनका अधिकतर समय पूजा-अर्चना में बीतता है। परिवार के सदस्य भी धार्मिक अनुष्ठान में सहयोग करते हैं। रूपा देवी की तीन वर्षों से जारी यह साधना झोपड़ी टोला और आसपास के क्षेत्रों में चर्चा का विषय बनी हुई है। नवरात्र के मौके पर श्रद्धालु उनके पूजा स्थल पर पहुंचकर माता के दरबार में माथा टेक रहे हैं। दूर-दराज से पहुंच रहे श्रद्धालु नवरात्र के दौरान पोचरा के झोपड़ी टोला में मां भगवती की आराधना को लेकर श्रद्धालुओं में उत्साह देखा जा रहा है। दूर-दराज के क्षेत्रों से भी लोग यहां पहुंचकर माता के दर्शन कर रहे हैं। पूजा स्थल पर प्रार्थना, भजन-कीर्तन और जयकारों के बीच धार्मिक माहौल बना हुआ है। रूपा देवी के पति राजेश राम सहित परिवार के अन्य सदस्य श्रद्धालुओं की व्यवस्था और पूजा-अर्चना में सहयोग कर रहे हैं। नौ दिनों तक चलने वाले इस अनुष्ठान का समापन नवमी के अवसर पर होगा। रूपा देवी की साधना शारदीय नवरात्र में पोचरा के झोपड़ी टोला की विशेष पहचान बनी हुई है।

