पूर्णिया के कला भवन में ऑल इंडिया स्टूडेंट एसोसिएशन (आइसा) और रिवोल्यूशनरी यूथ एसोसिएशन (आरवाईए) के संयुक्त तत्वावधान में ‘जेन जी राइजिंग’ के बैनर तले एक छात्र युवा संसद का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य 6 सितंबर को पटना में होने वाली राज्यस्तरीय छात्र युवा संसद के लिए सीमांचल के युवाओं और छात्रों को एकजुट करना और आमंत्रित करना था। इस छात्र-युवा संसद में सैकड़ों की संख्या में जेन जी और जेन अल्फा के छात्र-युवाओं ने भाग लिया। इसमें स्कूल से लेकर विश्वविद्यालय तक की बदहाल शिक्षा व्यवस्था, संसाधनों की कमी, सत्र की अनियमितता और नई शिक्षा नीति 2020 के कारण उत्पन्न हुई समस्याओं पर गंभीर चर्चा हुई। छात्र सड़कों पर उतरते हैं, तो सरकार को झुकना पड़ता है- अजीत सिंह
डुमरांव विधानसभा से पूर्व विधायक और आर वाई एस के राष्ट्रीय अध्यक्ष अजीत सिंह ने कहा कि सीमांचल का इलाका दशकों से उपेक्षा और पलायन का शिकार रहा है। सरकारें सरकारी नौकरियों को खत्म कर आउटसोर्सिंग कंपनियों के हवाले कर रही हैं। उन्होंने कहा कि देश भर में जेन जी युवा शिक्षा, परीक्षा सुधार और सम्मानजनक रोजगार के लिए आंदोलनरत हैं। जब जनता और छात्र सड़कों पर उतरते हैं, तो सरकार को झुकना पड़ता है। उन्होंने सीमांचल के युवाओं से 6 सितंबर को पटना पहुंचकर अपनी ताकत दिखाने की अपील की।
‘सवाल पूछने के अधिकार को खत्म करने की साजिश’
पटना यूनिवर्सिटी की छात्र संघ नेता सबा आफरीन ने केंद्र-राज्य सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि लोकतांत्रिक विरोध और सवाल पूछने की जगह को खत्म करने की साजिश की जा रही है। उन्होंने लगातार हो रहे पेपर लीक, छात्रों की संस्थागत आत्महत्याओं और बुनियादी शैक्षणिक सुविधाओं के अभाव को प्रमुख मुद्दा बताया। सबा ने कहा कि छात्रों को हासिए पर धकेलने और अपमानित करने के खिलाफ देश के युवा अब सड़क पर उतर रहे हैं। उन्होंने कहा कि छात्र-युवा जंतर-मंतर से लेकर हर शिक्षण संस्थान तक अपने अधिकारों के लिए लड़ रहे हैं और 6 सितंबर को पटना में आयोजित संसद में शिक्षा-रोजगार के असली मुद्दों को मजबूती से उठाया जाएगा। ‘राजनीति कर असल मुद्दों को भटकाया जा रहा’
भाकपा माले के पूर्व विधायक और विधायक दल के पूर्व नेता महबूब आलम ने सीमांचल में शिक्षा के पिछड़ेपन और बढ़ते पलायन पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि सीमांचल अमन-पसंद इलाका है, लेकिन इसे हमेशा बुनियादी सुविधाओं से महरूम रखा गया। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे अपने अभिभावकों के साथ स्कूलों में जाएं और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा व व्यवस्था की निगरानी करें। महबूब आलम ने कहा कि चिकन नेक या नफरत की राजनीति कर असल मुद्दों शिक्षा, स्वास्थ्य, भूमि सुधार और रोजगार से भटकाने की कोशिश की जा रही है। भाकपा-माले छात्रों-युवाओं के इस ऐतिहासिक आंदोलन के साथ पूरी मजबूती से खड़ी है।
‘छात्रों और युवाओं के सवालों को संगठित करेगा’
भाकपा माले जिला सचिव मोख्तार आलम ने कहा कि जेन जी राइजिंग अभियान बिहार के हर जिले में छात्रों और युवाओं के सवालों को संगठित करेगा। इन सवालों को आगामी 6 सितंबर को पटना में आयोजित होने वाली छात्र-युवा संसद में आइसा की राष्ट्रीय अध्यक्ष कॉमरेड नेहा बोरा की ओर से उठाया जाएगा और बिहार की शिक्षा व्यवस्था में बदलाव के लिए आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा। कार्यक्रम में कई प्रमुख हस्तियां और छात्र प्रतिनिधि उपस्थित रहे। इनमें पूर्व विधायक-आरवाईए के राष्ट्रीय अध्यक्ष अजीत सिंह, भाकपा-माले नेता व पूर्व विधायक महबूब आलम, पूर्व विधायक शिव प्रकाश रंजन, जेएनयू छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष धनंजय और पटना यूनिवर्सिटी आइसा की छात्र नेता सबा आफरीन शामिल थीं। पूर्णिया के कला भवन में ऑल इंडिया स्टूडेंट एसोसिएशन (आइसा) और रिवोल्यूशनरी यूथ एसोसिएशन (आरवाईए) के संयुक्त तत्वावधान में ‘जेन जी राइजिंग’ के बैनर तले एक छात्र युवा संसद का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य 6 सितंबर को पटना में होने वाली राज्यस्तरीय छात्र युवा संसद के लिए सीमांचल के युवाओं और छात्रों को एकजुट करना और आमंत्रित करना था। इस छात्र-युवा संसद में सैकड़ों की संख्या में जेन जी और जेन अल्फा के छात्र-युवाओं ने भाग लिया। इसमें स्कूल से लेकर विश्वविद्यालय तक की बदहाल शिक्षा व्यवस्था, संसाधनों की कमी, सत्र की अनियमितता और नई शिक्षा नीति 2020 के कारण उत्पन्न हुई समस्याओं पर गंभीर चर्चा हुई। छात्र सड़कों पर उतरते हैं, तो सरकार को झुकना पड़ता है- अजीत सिंह
डुमरांव विधानसभा से पूर्व विधायक और आर वाई एस के राष्ट्रीय अध्यक्ष अजीत सिंह ने कहा कि सीमांचल का इलाका दशकों से उपेक्षा और पलायन का शिकार रहा है। सरकारें सरकारी नौकरियों को खत्म कर आउटसोर्सिंग कंपनियों के हवाले कर रही हैं। उन्होंने कहा कि देश भर में जेन जी युवा शिक्षा, परीक्षा सुधार और सम्मानजनक रोजगार के लिए आंदोलनरत हैं। जब जनता और छात्र सड़कों पर उतरते हैं, तो सरकार को झुकना पड़ता है। उन्होंने सीमांचल के युवाओं से 6 सितंबर को पटना पहुंचकर अपनी ताकत दिखाने की अपील की।
‘सवाल पूछने के अधिकार को खत्म करने की साजिश’
पटना यूनिवर्सिटी की छात्र संघ नेता सबा आफरीन ने केंद्र-राज्य सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि लोकतांत्रिक विरोध और सवाल पूछने की जगह को खत्म करने की साजिश की जा रही है। उन्होंने लगातार हो रहे पेपर लीक, छात्रों की संस्थागत आत्महत्याओं और बुनियादी शैक्षणिक सुविधाओं के अभाव को प्रमुख मुद्दा बताया। सबा ने कहा कि छात्रों को हासिए पर धकेलने और अपमानित करने के खिलाफ देश के युवा अब सड़क पर उतर रहे हैं। उन्होंने कहा कि छात्र-युवा जंतर-मंतर से लेकर हर शिक्षण संस्थान तक अपने अधिकारों के लिए लड़ रहे हैं और 6 सितंबर को पटना में आयोजित संसद में शिक्षा-रोजगार के असली मुद्दों को मजबूती से उठाया जाएगा। ‘राजनीति कर असल मुद्दों को भटकाया जा रहा’
भाकपा माले के पूर्व विधायक और विधायक दल के पूर्व नेता महबूब आलम ने सीमांचल में शिक्षा के पिछड़ेपन और बढ़ते पलायन पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि सीमांचल अमन-पसंद इलाका है, लेकिन इसे हमेशा बुनियादी सुविधाओं से महरूम रखा गया। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे अपने अभिभावकों के साथ स्कूलों में जाएं और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा व व्यवस्था की निगरानी करें। महबूब आलम ने कहा कि चिकन नेक या नफरत की राजनीति कर असल मुद्दों शिक्षा, स्वास्थ्य, भूमि सुधार और रोजगार से भटकाने की कोशिश की जा रही है। भाकपा-माले छात्रों-युवाओं के इस ऐतिहासिक आंदोलन के साथ पूरी मजबूती से खड़ी है।
‘छात्रों और युवाओं के सवालों को संगठित करेगा’
भाकपा माले जिला सचिव मोख्तार आलम ने कहा कि जेन जी राइजिंग अभियान बिहार के हर जिले में छात्रों और युवाओं के सवालों को संगठित करेगा। इन सवालों को आगामी 6 सितंबर को पटना में आयोजित होने वाली छात्र-युवा संसद में आइसा की राष्ट्रीय अध्यक्ष कॉमरेड नेहा बोरा की ओर से उठाया जाएगा और बिहार की शिक्षा व्यवस्था में बदलाव के लिए आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा। कार्यक्रम में कई प्रमुख हस्तियां और छात्र प्रतिनिधि उपस्थित रहे। इनमें पूर्व विधायक-आरवाईए के राष्ट्रीय अध्यक्ष अजीत सिंह, भाकपा-माले नेता व पूर्व विधायक महबूब आलम, पूर्व विधायक शिव प्रकाश रंजन, जेएनयू छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष धनंजय और पटना यूनिवर्सिटी आइसा की छात्र नेता सबा आफरीन शामिल थीं।

