‘रांची सदर अस्पताल में भर्ती हुए छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो’, 9 दिन से भूख हड़ताल के बाद बिगड़ी तबीयत

‘रांची सदर अस्पताल में भर्ती हुए छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो’, 9 दिन से भूख हड़ताल के बाद बिगड़ी तबीयत

Jharkhand Student Protest and Devendra Nath Mahto: झारखंड में प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों के खिलाफ चल रहे JPSC-JSSC छात्र आंदोलन के बीच छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो की तबीयत बिगड़ गई। 9 दिन से भूख हड़ताल पर बैठे महतो को रांची के सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया है। वह विधानसभा घेराव के लिए निकले छात्रों के मार्च में भी शामिल हुए थे।

इमरजेंसी वार्ड में चल रहा इलाज

रांची सदर अस्पताल की मेडिकल ऑफिसर नैनी प्रिया ने बताया कि देवेंद्र नाथ महतो का इलाज इमरजेंसी वार्ड में किया जा रहा है। महतो के सहयोगी पंकज कुमार ने दावा किया कि विधानसभा के पास पुलिस की लाठीचार्ज में वह घायल हुए थे। महतो की तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें एंबुलेंस से अस्पताल ले जाया गया। वह पिछले नौ दिनों से भूख हड़ताल पर थे।

विधानसभा के गेट नंबर-1 के बाहर जुटे थे छात्र

प्रदर्शनकारी छात्रों ने बताया कि वे विधानसभा के गेट नंबर-1 के बाहर जमा हुए थे। उनका कहना है कि वे शांतिपूर्ण तरीके से सरकार के जवाब का इंतजार कर रहे थे। प्रदर्शनकारियों के मुताबिक, इसी दौरान पुलिस ने उन्हें रोकने के लिए कार्रवाई शुरू की। छात्रों ने आरोप लगाया कि पुलिस ने लाठीचार्ज किया, जिसमें कई युवा घायल हुए। उनके मुताबिक, सिर, हाथ और चेहरे समेत शरीर के कई हिस्सों पर चोटें आई हैं।

अधिकारियों के अनुसार, झारखंड विधानसभा के पास हुई झड़प में कई प्रदर्शनकारी और चार पुलिसकर्मी घायल हुए हैं।

पुलिस ने वाटर कैनन और आंसू गैस का भी किया इस्तेमाल

प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए पुलिस ने जगह-जगह बैरिकेड लगाए थे। छात्रों के विधानसभा के पास पहुंचने के बाद स्थिति बिगड़ गई। इसके बाद पुलिस ने पानी की बौछार की और आंसू गैस के गोले दागे। इसके बाद लाठीचार्ज भी किया गया। घायल प्रदर्शनकारी शिवम ने आरोप लगाया कि छात्र विधानसभा के बाहर सरकार के जवाब का इंतजार कर रहे थे। उनके मुताबिक, पुलिस ने बिना किसी चेतावनी या बातचीत के लाठीचार्ज शुरू कर दिया।

शिवम ने बताया कि उनके पीठ पर चोट लगी। उन्होंने दावा किया कि दूसरे युवाओं को भी सीने और हाथ पर चोटें आई हैं। उनके मुताबिक, करीब 100 युवाओं को लाठियां लगीं और कई प्रदर्शनकारी गंभीर दर्द में हैं।

सोचा था जन्मदिन पर मांगें पूरी होने का गिफ्ट मिलेगा

प्रदर्शनकारियों ने कहा कि वे मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के 51वें जन्मदिन के दिन विधानसभा पहुंचे थे। उन्हें उम्मीद थी कि सरकार उनकी मांगों पर कोई फैसला करेगी। एक प्रदर्शनकारी ने कहा कि उन्हें मुख्यमंत्री के जन्मदिन पर मांगें पूरी होने का तोहफा मिलने की उम्मीद थी, लेकिन बदले में लाठीचार्ज, आंसू गैस और पानी की बौछार का सामना करना पड़ा। छात्रों का कहना है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, वे अपना आंदोलन जारी रखेंगे।

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