सीएम योगी गुरुवार को लोकभवन में पुलिस और पीएसी में नौकरी पाने वाले कुल 470 खेल प्रतिभाओं को नियुक्ति पत्र बांटे। इनमें नागरिक पुलिस के 43 दरोगा, 295 सिपाही और पीएसी के 132 सिपाही शामिल हैं। कार्यक्रम में डिप्टी सीएम केशव मौर्य, खेल एवं युवा मामलों के मंत्री गिरीश यादव, अपर मुख्य सचिव गृह संजय प्रसाद और डीपीजी राजीव कृष्णा भी मौजूद हैं। कार्यक्रम से पहले सीएम योगी का डीजीपी ने रामरथ स्मृति चिह्न देकर स्वागत किया। इस मौके पर सीएम योगी ने कहा- आपको लाइक्स चाहिए या वास्तविक लाइफ चाहिए। प्रैक्ट्रिस मत छोड़ना, भारत आपका इंतजार कर रहा है। योगी बोले- आपकी यह यात्रा जर्सी से वर्दी की शुरू हुई सीएम योगी ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा- मैं आप सभी युवा खिलाड़ियों को यूपी पुलिस का हिस्सा बनने के लिए शुभकामनाएं देता हूं। आपकी यह यात्रा जर्सी से वर्दी की यात्रा शुरू हुई है। इसका अभिनंदन करने के लिए एक डिप्टी सीएम और मंत्री के साथ मैं खुद आया हूं। योगी ने कहा- जर्सी में जो काम करते थे, जो परिणाम लाए हैं, सरकार वर्दी में भी उसी तरह की अपेक्षा करती है। जर्सी में आपने अनुशासन, टीम वर्क के महत्व को समझा। शक्ति और सामर्थ्य की सही दिशा दी। समय की कीमत को पहचाना। आपकी दिनचर्या सुबह 4 बजे से शुरू होती है। सम विषम परिस्थिति में भीषण सर्दी, बरसात या संसाधन का अभाव होता है, तो भी आप प्रैक्टिस करते हैं। सीएम ने कहा- चुनौती को आपने चुनौती नहीं माना। पारिवारिक समस्या को समस्या नहीं माना। अपने परिश्रम को समाधान की ओर लेकर गए। यह काम यूपी पूलिस का हिस्सा बनने का बाद आपको करना है। मैं देख रहा था कि 470 में 303 पुरुष और 167 महिलाएं हैं। उपनिरीक्षक में 43 पुरुष और 30 महिलाएं है। मैं पूछना चाहता हूं कि जो नियुक्ति पत्र मिला है, उस प्रक्रिया में किसी ने कोई पैसा मांगा। गर्दन हिलाकर नहीं आवाज दो। कहीं से कोई सिफारिश कराने की जरूरत हुई। याद रखना ये न सरकार की कृपा है ना मेरी अनुकंपा है। यह आपके मेहनत के पसीने का परिणाम है। योगी ने कहा- 2017 में हमारे यहां सीधी भर्ती से खिलाड़ी भर्ती करने का कोई नियम नहीं था। हम मजबूर थे। लेकिन, फिर हमने सीधी भर्ती से खिलाड़ियों को नौकरी देना शुरू किया। अब तक 1000 खिलाड़ियों को सीधी भर्ती से नौकरी दे चुके हैं। 470 को आज दे रहे हैं, 500 और खिलाड़ी को नियुक्ति पत्र देने की तैयारी है। जापान में एशियन गेम्स चल रहे थे तो हम देखते हैं कि हमारा खिलाड़ी उस मोर्चे पर खड़ा है तो हम मैच देखते हैं, जीत का जितना महत्व है उतना ही महत्व उस खिलाड़ी है जो हार कर फिर खड़ा होता है फिर मेडल लाने के लिए तैयार है। यूपी की एक बेटी ने गोल्ड मेडल जीता उसने कहा कि मेरा निशाना यूपी सरकार के डिप्टी एसपी पद पर था। हमने अब तक यूपी पुलिस में ऐसे 7 खिलाड़ी को जिन्होंने ऑलंपिक, कॉमनवैल्थ या एशियाई खेलों में मैडल प्राप्त किया है उन्हे डिप्टी एसपी का पद दिया है। यूपी के हॉकी खिलाड़ी ललित उपाध्याय, राज कुमार पाल को नीती बदलकर डिप्टी एसपी का पद दिया। राज कुमार पाल का परिवार बहुत गरीब पाल था, ओलंपिक में पद जीता तो राजकुमार को डिप्टी एसपी का पद दिया। केशव बोले- जब खिलाड़ी पदक जीतकर तिरंगा लहराते हैं, तो सीना चौड़ा हो जाता है डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा- आज देश-प्रदेश का मान बढ़ाने वाले खिलाड़ियों को नियुक्ति पत्र देने का सुअवसर है। इनमें से कई खिलाड़ी देश-प्रदेश के लिए पदक जीतते हैं। जब पदक जीतकर तिरंगा लहराते हैं, तो हमारा सीना चौड़ा हो जाता है। खेल प्रतिभा दिखाने के कारण ऐसे लोगों को पुलिस सेवा में आने का अवसर मिला है। इस अवसर को और अच्छे अवसर में बदलने का मौका है। जनता की सुरक्षा और सेवा का अवसर है। आपका खेल खत्म नहीं हुआ है, खेल अभी जारी है। केशव ने कहा- 2017 से पहले खिलाड़ियों पर ध्यान नहीं दिया जाता था केशव ने कहा- 2017 से पहले विपक्षी दलों की सरकारों के समय कानून व्यवस्था ध्वस्त रहती थी। लेकिन, आज देश में यूपी की चुस्त-दुरुस्त कानून-व्यवस्था की चर्चा है। यह गौरव की बात है। जहां कानून व्यवस्था चुस्त-दुरुस्त होती है, तो प्रदेश का विकास होता है। पहले भी सरकारों ने खेल और खिलाड़ियों पर उतना ध्यान नहीं दिया, इसलिए हमें पदक नहीं मिलते थे। गांवों में प्रतिभाशाली खिलाड़ी हैं। अगर उन्हें मौका मिल जाए, तो वे दुनिया के किसी भी खिलाड़ी को पछाड़ सकते हैं। आज कोच के साथ पुष्टाहार की व्यवस्था की जा रही है। खिलाड़ी के लिए सरकारी भर्ती में दो प्रतिशत कोटा दिया है। डीजीपी बोले- खेल और पुलिस में गहरा संबंध सबसे पहले डीजीपी राजीव कृष्ण ने कार्यक्रम को संबोधित किया। उन्होंने कहा- सीएम के नेतृत्व ने खेल प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने और सम्मानजक अवसर देने का महत्वपूर्ण काम किया है। आज का आयोजन उसी का उदाहरण है। आज 470 प्रतिभाशाली खिलाड़ी यूपी पुलिस का हिस्सा बनने जा रहे हैं। यह केवल भर्ती का आंकड़ा नहीं है, बल्कि खेल प्रतिभाओं के सम्मान और उन्हें जनसेवा से जोड़ने का उदाहण है। खेल और पुलिस में गहरा संबंध है। पुलिस और खेल से अनुशासन, व्यायाम, आचरण, अभ्यास और धैर्य सीखने को मिलता है। आज आपकी मेहनत को नई पहचान मिल रही है। आपकी पहचान खिलाड़ी के साथ यूपी पुलिस के रूप में होगी। डीजीपी ने कहा- यह पहल बताती है कि यूपी में प्रतिभा और मेहनत को उचित मंच मिलता है। खिलाड़ियों को आउट ऑफ टर्न प्रमोशन भी दिए गए हैं। यूपी पुलिस के खिलाड़ियों ने एक दशक में कुल 1105 पदक अर्जित किए हैं। हॉकी खिलाड़ी ललित उपाध्याय, दीप्ती शर्मा ने पद हासिल किए हैं। खेल मंत्री बोले- सरकार ने 17 खिलाड़ियों को सीधी नौकरी दी खेल मंत्री गिरीश यादव ने कहा- पीएम मोदी के मार्गदर्शन और सीएम योगी के नेतृत्व में खिलाड़ियों का चेहरा खिलखिला उठता है। सीएम ने खिलाड़ियों के लिए ऐतिहासिक फैसले किए हैं। उनकी मांगों को भी पूरा किया है। खिलाड़ियों के लिए विशेष रूप गारंटी दी है कि हमारा जो भी खिलाड़ी पदक जीतकर आएगा, उसे नौकरी देंगे। 9 साल में जो भी पदक जीतकर आया, उसे सरकारी नौकरी और नकद पुरस्कार भी मिला है। पुरस्कार राशि भी दो से तीन गुना बढ़ाई गई है। खिलाड़ियों को सीधी भर्ती दी जा रही है। आज 17 खिलाड़ियों को सीधी नौकरी दी जा चुकी है। 7 खिलाड़ियों को डिप्टी एसपी बनाया गया है। जिला पंचायतराज अधिकारी समेत अन्य पदों पर नौकरी दी है। मंत्री ने कहा- पहले खिलाड़ी पैसे की कमी में अपनी प्रतिभा निखार नहीं पाते थे। उनके लिए एकलव्य क्रीड़ा कोष बनाया गया है। अब तक 500 से ज्यादा खिलाड़ियों को इस कोष से मदद दी गई है। गिरीश यादव ने कहा कि विकासखंड स्तर पर भी मिनी स्टेडियम बनाया जा रहा है। पहली बार यूपी में खेल यूनिवर्सिटी बनाई गई है। उसका पीएम नरेंद्र मोदी जल्द लोकार्पण करेंगे। हर कमिश्नरी स्तर पर खेल महाविद्यालय भी खोले जाएंगे। योगी ने लिखा- नई खेल संस्कृति बदलाव की तस्वीर है सीएम योगी ने एक्स पर पोस्ट कर कहा- मैदान में मेधा, उपलब्धि पर सम्मान और प्रतिभा को राष्ट्र सेवा का अवसर देना ही नए उत्तर प्रदेश की नई खेल संस्कृति है। इसी संस्कृति को आगे बढ़ाते हुए पुलिस विभाग में कुशल खिलाड़ी कोटे के तहत चयनित 470 खिलाड़ियों को नियुक्ति पत्र दिए गए। सीएम ने कहा कि खिलाड़ियों के लिए खुल रहे सरकारी सेवा के ये द्वार उस बदलाव की तस्वीर हैं, जो प्रदेश ने साल-2017 के बाद देखा है। इससे पहले खेल कोटा उपेक्षित था। भर्तियों में प्रतिभा से अधिक सिफारिश और पहुंच की चर्चा होती थी।

