मोहाली के लालड़ू में मोटरसाइकिल सवारों द्वारा मोबाइल फोन छीनने के मामले में पुलिस को अदालत में झटका लगा है। अदालत ने सबूतों के अभाव में दोनों आरोपियों बोधराज निवासी लालड़ू मंडी और विशाल को बरी कर दिया। मामले में सबसे अहम बात यह रही कि मोबाइल छीनने की शिकायत करने वाली महिला और उसके बेटे ने अदालत में आरोपियों की पहचान करने से ही इनकार कर दिया। वहीं, पुलिस यह भी साबित नहीं कर सकी कि बरामद मोबाइल फोन शिकायतकर्ता का था। अदालत ने कहा कि सरकारी पक्ष आरोपियों के खिलाफ आईपीसी की धारा 379-बी और 411 तथा मोटर व्हीकल एक्ट की धारा 181 के तहत आरोप साबित करने में असफल रहा। शिकायतकर्ता सीमा देवी ने अदालत में कहा कि आरोपियों के नाम उसे पुलिस ने बताए थे। घटना के समय उसने किसी आरोपी को मौके पर नहीं देखा था। उसने यह भी आरोप लगाया कि पुलिस ने खाली कागजों पर उसके हस्ताक्षर करवाए थे। वह पंजाबी पढ़ना-लिखना भी नहीं जानती। घटना के समय उसके साथ मौजूद बेटे शौर्य कुमार ने भी आरोपियों की पहचान नहीं की। मोबाइल विशाल से मिला, लेकिन मालिकाना हक का सबूत नहीं पुलिस ने दावा किया था कि आरोपी विशाल के कब्जे से छीना गया मोबाइल फोन बरामद हुआ है। इसके लिए रिकवरी मेमो भी अदालत में पेश किया गया, लेकिन मोबाइल का बिल लालन कुमार के नाम पर था। शिकायतकर्ता सीमा देवी यह साबित नहीं कर सकी कि उसने मोबाइल लालन कुमार से खरीदा था। न ही इस संबंध में कोई अन्य दस्तावेज पेश किया गया। ऐसे में अदालत ने माना कि मोबाइल पर शिकायतकर्ता का मालिकाना हक साबित नहीं हुआ। बिना लाइसेंस बाइक चलाने का आरोप भी नहीं टिका पुलिस ने आरोप लगाया था कि बोधराज बिना वैध ड्राइविंग लाइसेंस के मोटरसाइकिल चला रहा था। हालांकि, अदालत में ऐसा कोई ठोस सबूत पेश नहीं किया गया, जिससे यह साबित हो सके कि घटना के समय मोटरसाइकिल बोधराज ही चला रहा था। पुलिसकर्मियों की गवाही भी आरोपियों को मोबाइल छीनने की घटना से जोड़ने के लिए पर्याप्त नहीं मानी गई। 2023 में दर्ज हुआ था केस लालड़ू पुलिस ने 26 अप्रैल 2023 को बोधराज और विशाल के खिलाफ आईपीसी की धारा 379-बी, 411 और 34 तथा मोटर व्हीकल एक्ट की धारा 181 के तहत केस दर्ज किया था। शिकायतकर्ता सीमा देवी के अनुसार, 25 अप्रैल 2023 को वह अपने बेटे शौर्य कुमार के साथ लालड़ू मंडी के आईटीआई चौक के पास स्थित नौगजा पीर में माथा टेकने गई थी। सुबह करीब 11 बजे घर लौटते समय महाराणा प्रताप भवन के सामने उसका बेटा उससे आगे चल रहा था। इसी दौरान मोटरसाइकिल पर सवार दो व्यक्ति आए और पीछे बैठे व्यक्ति ने उसके बेटे के हाथ से मोबाइल छीन लिया। इसके बाद दोनों मौके से फरार हो गए थे। अदालत ने सभी तथ्यों और गवाहों के बयानों पर विचार करने के बाद दोनों आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया।

