दरभंगा में भाकपा माले ने मोनू सहनी सुसाइड केस को लेकर पुलिस प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। पार्टी ने दावा किया है कि पुलिस प्रताड़ना से परेशान होकर मोनू ने आत्महत्या की। मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है। साथ ही आरोपी पुलिसकर्मियों की गिरफ्तारी, पीड़ित परिवार, ग्रामीणों पर दर्ज मुकदमा वापस लेने और तत्काल 10 लाख रुपए मुआवजा देने की मांग की है। माले कार्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता में पार्टी के पोलित ब्यूरो सदस्य सह मिथिलांचल प्रभारी धीरेंद्र झा ने कहा कि पुलिस रक्षक की जगह भक्षक की भूमिका में नजर आ रही है। मधुबनी जेल में नौजवान रौशन यादव की मौत और दरभंगा के खराजपुर में मोनू सहनी की आत्महत्या पुलिस की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े करती है। दरभंगा, मधुबनी और समस्तीपुर की हालिया घटनाओं को लेकर माले का एक प्रतिनिधिमंडल जल्द ही डीजीपी से मुलाकात करेगा। सिविल ड्रेस में पहुंचने वाले तीन पुलिसकर्मियों की गिरफ्तारी की मांग धीरेंद्र झा ने आरोप लगाया कि मोनू सहनी के घर तीन पुलिसकर्मी सादे कपड़ों में हथियार लेकर पहुंचे थे। स्थानीय थाना को सूचना दिए बिना कार्रवाई की गई। पुलिसकर्मियों के पहुंचने के बाद इलाके में तनाव की स्थिति बनी और हवा में फायरिंग करते हुए उनके भागने की बात सामने आई है। परिजनों के मुताबिक पुलिसकर्मी चार लाख रुपए की मांग कर रहे थे। बार-बार धमकी दी जा रही थी। इसी कथित वसूली के दबाव के बीच मोनू ने घर में छिपकर आत्महत्या कर ली। मामले की निष्पक्ष जांच के लिए उन तीनों पुलिसकर्मियों को गिरफ्तार किया जाना चाहिए, जो घटना के दौरान वहां पहुंचे थे। साथ ही यह भी जांच होनी चाहिए कि डीआईयू की कार्रवाई की अगुवाई कौन कर रहा था। स्थानीय थाना को इसकी जानकारी क्यों नहीं दी गई। 10 लाख रुपए मुआवजा और मुकदमा वापस लेने की मांग वहीं, माले के जिला सचिव बैद्यनाथ यादव ने कहा कि पुलिस-प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठ रहे हैं। इस घटना के बावजूद अगर सरकार कार्रवाई नहीं करती है तो इससे पुलिस के बेलगाम होने का संदेश जाएगा।
सरकार से पीड़ित परिवार को तत्काल 10 लाख रुपए का मुआवजा देने की मांग की। साथ ही बहादुरपुर थाना कांड संख्या 255/2026 में पीड़ित परिवार और ग्रामीणों पर दर्ज मुकदमा वापस लेने की मांग की गई। बैद्यनाथ यादव ने चेतावनी दी कि अगर 25 अगस्त तक पार्टी की मांगों को पूरा नहीं किया गया तो 27 अगस्त को भाकपा माले और खेग्रामस की ओर से जिले के सभी प्रखंडों में सीएम का पुतला दहन किया जाएगा। शिक्षा और रोजगार के मुद्दे पर आंदोलन को समर्थन प्रेस कॉन्फ्रेंस में आरवाईए के राज्य उपाध्यक्ष संदीप कुमार चौधरी भी मौजूद रहे। उन्होंने कहा कि दरभंगा विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित छात्र युवा संसद की सफलता से स्पष्ट है कि मिथिला में शिक्षा, परीक्षा और रोजगार के मुद्दे पर आंदोलन के लिए छात्र और युवा तैयार हो रहे हैं। आइसा और इंकलाबी नौजवान सभा की ओर से चलाए जा रहे ‘स्कूलों को ठीक करो’ आंदोलन को भाकपा माले मजबूती देने का काम करेगी। शिक्षा व्यवस्था में सुधार, परीक्षा में पारदर्शिता और युवाओं के लिए रोजगार के सवालों को लेकर आने वाले दिनों में आंदोलन को तेज किया जाएगा। दरभंगा में भाकपा माले ने मोनू सहनी सुसाइड केस को लेकर पुलिस प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। पार्टी ने दावा किया है कि पुलिस प्रताड़ना से परेशान होकर मोनू ने आत्महत्या की। मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है। साथ ही आरोपी पुलिसकर्मियों की गिरफ्तारी, पीड़ित परिवार, ग्रामीणों पर दर्ज मुकदमा वापस लेने और तत्काल 10 लाख रुपए मुआवजा देने की मांग की है। माले कार्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता में पार्टी के पोलित ब्यूरो सदस्य सह मिथिलांचल प्रभारी धीरेंद्र झा ने कहा कि पुलिस रक्षक की जगह भक्षक की भूमिका में नजर आ रही है। मधुबनी जेल में नौजवान रौशन यादव की मौत और दरभंगा के खराजपुर में मोनू सहनी की आत्महत्या पुलिस की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े करती है। दरभंगा, मधुबनी और समस्तीपुर की हालिया घटनाओं को लेकर माले का एक प्रतिनिधिमंडल जल्द ही डीजीपी से मुलाकात करेगा। सिविल ड्रेस में पहुंचने वाले तीन पुलिसकर्मियों की गिरफ्तारी की मांग धीरेंद्र झा ने आरोप लगाया कि मोनू सहनी के घर तीन पुलिसकर्मी सादे कपड़ों में हथियार लेकर पहुंचे थे। स्थानीय थाना को सूचना दिए बिना कार्रवाई की गई। पुलिसकर्मियों के पहुंचने के बाद इलाके में तनाव की स्थिति बनी और हवा में फायरिंग करते हुए उनके भागने की बात सामने आई है। परिजनों के मुताबिक पुलिसकर्मी चार लाख रुपए की मांग कर रहे थे। बार-बार धमकी दी जा रही थी। इसी कथित वसूली के दबाव के बीच मोनू ने घर में छिपकर आत्महत्या कर ली। मामले की निष्पक्ष जांच के लिए उन तीनों पुलिसकर्मियों को गिरफ्तार किया जाना चाहिए, जो घटना के दौरान वहां पहुंचे थे। साथ ही यह भी जांच होनी चाहिए कि डीआईयू की कार्रवाई की अगुवाई कौन कर रहा था। स्थानीय थाना को इसकी जानकारी क्यों नहीं दी गई। 10 लाख रुपए मुआवजा और मुकदमा वापस लेने की मांग वहीं, माले के जिला सचिव बैद्यनाथ यादव ने कहा कि पुलिस-प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठ रहे हैं। इस घटना के बावजूद अगर सरकार कार्रवाई नहीं करती है तो इससे पुलिस के बेलगाम होने का संदेश जाएगा।
सरकार से पीड़ित परिवार को तत्काल 10 लाख रुपए का मुआवजा देने की मांग की। साथ ही बहादुरपुर थाना कांड संख्या 255/2026 में पीड़ित परिवार और ग्रामीणों पर दर्ज मुकदमा वापस लेने की मांग की गई। बैद्यनाथ यादव ने चेतावनी दी कि अगर 25 अगस्त तक पार्टी की मांगों को पूरा नहीं किया गया तो 27 अगस्त को भाकपा माले और खेग्रामस की ओर से जिले के सभी प्रखंडों में सीएम का पुतला दहन किया जाएगा। शिक्षा और रोजगार के मुद्दे पर आंदोलन को समर्थन प्रेस कॉन्फ्रेंस में आरवाईए के राज्य उपाध्यक्ष संदीप कुमार चौधरी भी मौजूद रहे। उन्होंने कहा कि दरभंगा विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित छात्र युवा संसद की सफलता से स्पष्ट है कि मिथिला में शिक्षा, परीक्षा और रोजगार के मुद्दे पर आंदोलन के लिए छात्र और युवा तैयार हो रहे हैं। आइसा और इंकलाबी नौजवान सभा की ओर से चलाए जा रहे ‘स्कूलों को ठीक करो’ आंदोलन को भाकपा माले मजबूती देने का काम करेगी। शिक्षा व्यवस्था में सुधार, परीक्षा में पारदर्शिता और युवाओं के लिए रोजगार के सवालों को लेकर आने वाले दिनों में आंदोलन को तेज किया जाएगा।

