मोतिहारी आर्य समाज में शताब्दी समारोह का दूसरा दिन:वैदिक मंत्रोच्चार के साथ डॉ. ओमव्रत शास्त्री ने कराया देव यज्ञ

मोतिहारी आर्य समाज में शताब्दी समारोह का दूसरा दिन:वैदिक मंत्रोच्चार के साथ डॉ. ओमव्रत शास्त्री ने कराया देव यज्ञ

मोतिहारी में आर्य समाज के शताब्दी समारोह के दूसरे दिन मंदिर परिसर वैदिक मंत्रोच्चार और यज्ञ से गूंज उठा। यहां देव यज्ञ का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। दिल्ली से आए प्रसिद्ध वैदिक विद्वान डॉ. ओमव्रत शास्त्री के आचार्यत्व में वैदिक मंत्रोच्चार के साथ यज्ञ शुरू हुआ। वैदिक जीवन-पद्धति का अहम आधार इस दौरान जीविका आर्या, नैन्सी आर्या, आराध्या आर्या, अपर्णा आर्या और शालिनी आर्या समेत अन्य कन्याओं ने वेदपाठ किया। श्रद्धालुओं ने यज्ञ में आहुति देकर राष्ट्र, समाज और विश्व के कल्याण की कामना की। इस मौके पर डॉ. ओमव्रत शास्त्री ने कहा कि यज्ञ सिर्फ धार्मिक कर्मकांड नहीं, बल्कि वैदिक जीवन-पद्धति का अहम आधार है। उन्होंने बताया कि वैदिक संस्कारों को जीवन का हिस्सा बनाकर ही राष्ट्र निर्माण में योगदान दिया जा सकता है। बड़ी संख्या में मौजूद रहे श्रद्धालु उन्होंने पर्यावरण संरक्षण के लिए भी यज्ञ के महत्व पर जोर दिया और कहा कि इससे वातावरण शुद्ध होता है। वहीं, सहारनपुर से आईं आचार्या संगीता आर्या और आचार्य प्रताप वैदिक ने भजनों के जरिए श्रद्धालुओं को ईश्वर से जुड़ने और महर्षि दयानंद सरस्वती के विचारों को अपनाने का संदेश दिया। उनके भजनों पर श्रद्धालु भक्ति में लीन हो गए। इस समारोह में बिहार के अलग-अलग क्षेत्रों के साथ नेपाल से भी आर्य समाज के प्रतिनिधि और कार्यकर्ता पहुंचे थे। इस दौरान आर्य समाज मोतिहारी के प्रधान धर्मवर्धन प्रसाद आर्य और मंत्री देवेशचन्द्र आर्य समेत बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे। वैदिक मंगलकामना और पूर्णाहुति के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ। मोतिहारी में आर्य समाज के शताब्दी समारोह के दूसरे दिन मंदिर परिसर वैदिक मंत्रोच्चार और यज्ञ से गूंज उठा। यहां देव यज्ञ का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। दिल्ली से आए प्रसिद्ध वैदिक विद्वान डॉ. ओमव्रत शास्त्री के आचार्यत्व में वैदिक मंत्रोच्चार के साथ यज्ञ शुरू हुआ। वैदिक जीवन-पद्धति का अहम आधार इस दौरान जीविका आर्या, नैन्सी आर्या, आराध्या आर्या, अपर्णा आर्या और शालिनी आर्या समेत अन्य कन्याओं ने वेदपाठ किया। श्रद्धालुओं ने यज्ञ में आहुति देकर राष्ट्र, समाज और विश्व के कल्याण की कामना की। इस मौके पर डॉ. ओमव्रत शास्त्री ने कहा कि यज्ञ सिर्फ धार्मिक कर्मकांड नहीं, बल्कि वैदिक जीवन-पद्धति का अहम आधार है। उन्होंने बताया कि वैदिक संस्कारों को जीवन का हिस्सा बनाकर ही राष्ट्र निर्माण में योगदान दिया जा सकता है। बड़ी संख्या में मौजूद रहे श्रद्धालु उन्होंने पर्यावरण संरक्षण के लिए भी यज्ञ के महत्व पर जोर दिया और कहा कि इससे वातावरण शुद्ध होता है। वहीं, सहारनपुर से आईं आचार्या संगीता आर्या और आचार्य प्रताप वैदिक ने भजनों के जरिए श्रद्धालुओं को ईश्वर से जुड़ने और महर्षि दयानंद सरस्वती के विचारों को अपनाने का संदेश दिया। उनके भजनों पर श्रद्धालु भक्ति में लीन हो गए। इस समारोह में बिहार के अलग-अलग क्षेत्रों के साथ नेपाल से भी आर्य समाज के प्रतिनिधि और कार्यकर्ता पहुंचे थे। इस दौरान आर्य समाज मोतिहारी के प्रधान धर्मवर्धन प्रसाद आर्य और मंत्री देवेशचन्द्र आर्य समेत बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे। वैदिक मंगलकामना और पूर्णाहुति के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।  

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