मुजफ्फरपुर में मशरूम क्लस्टर का खेल!:लखपति दीदी बनने निकलीं, कर्जदार हो गईं; 6 महिलाएं भूख हड़ताल पर

मुजफ्फरपुर में मशरूम क्लस्टर का खेल!:लखपति दीदी बनने निकलीं, कर्जदार हो गईं; 6 महिलाएं भूख हड़ताल पर

मुजफ्फरपुर में मशरूम क्लस्टर के नाम पर सैकड़ों जीविका दीदियों के नाम पर लोन लिए जाने और राशि उन तक नहीं पहुंचने का मामला सामने आया है। लखपति दीदी बनाने का सपना दिखाया गया, लेकिन अब कर्ज के बोझ तले दबने का आरोप है। महिलाओं का आरोप है कि मशरूम की खेती के नाम पर सिर्फ 10 अधूरी झोपड़ियां खड़ी की गई। न मशरूम उगा और न रोजगार मिला, लेकिन बैंक से कर्ज वसूली के नोटिस जरूर पहुंच रहे हैं। न्याय की मांग को लेकर छह जीविका दीदियों ने 11 अगस्त से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू कर दी है। महिलाओं का कहना है कि 3 साल से वे अधिकारियों के चक्कर लगा रही हैं, लेकिन हर बार सिर्फ आश्वासन मिला। लोन नहीं लिया, फिर भी कर्ज चढ़ गया भूख हड़ताल पर बैठीं कामिनी देवी का आरोप है कि मशरूम क्लस्टर के लिए लोन लेने की बात कही गई थी। उन्हें बताया गया था कि क्लस्टर की देखरेख के बदले 16 हजार रुपए मिलेंगे, जबकि दो अन्य लोगों को 8-8 हजार रुपए दिए जाएंगे। उनका दावा है कि उन्होंने लोन की राशि में से एक रुपए भी नहीं लिया, इसके बावजूद उनके नाम पर कर्ज चढ़ गया। कामिनी देवी के अनुसार, क्लस्टर के नाम पर केवल 10 झोपड़ियां बनाई गई और काम अधूरा छोड़ दिया गया। इन झोपड़ियों में बिजली के मीटर भी लगा दिए गए। अब बिजली बिल और बैंक के नोटिस ने उनकी परेशानी बढ़ा दी है। बैंक के नोटिस से घर में भी बढ़ा विवाद बोचहां की विशाल सीएलएफ से जुड़ी खुशबू देवी ने भी इसी तरह की शिकायत की। उनका कहना है कि लोन को लेकर उन्हें दो बार बैंक का नोटिस मिल चुका है। पति से भी विवाद की स्थिति बनी रहती है। उनका सवाल है कि जब पैसा उनके हाथ में आया ही नहीं तो कर्ज चुकाने की जिम्मेदारी उन पर क्यों है? महिलाओं का कहना है कि उन्होंने जिलाधिकारी, डीडीसी और अन्य अधिकारियों से लेकर पटना तक शिकायत की, लेकिन अब तक समस्या का समाधान नहीं हुआ। 10 अगस्त तक क्लस्टर शुरू करने का मिला था भरोसा जीविका दीदियों का आरोप है कि उन्हें भरोसा दिया गया था कि 10 अगस्त तक तीन मशरूम क्लस्टर शुरू हो जाएंगे और महिलाओं को रोजगार मिलेगा। लेकिन उनके अनुसार, तीन साल बाद भी एक भी क्लस्टर ठीक से संचालित नहीं हो रहा है। बोचहां में एक क्लस्टर शुरू होने की बात कही गई, लेकिन वहां भी स्थिति संतोषजनक नहीं है। महिलाओं का कहना है कि सरकार की ओर से उन्हें लखपति दीदी बनाने का सपना दिखाया गया था, लेकिन आज स्थिति ऐसी है कि वे लखपति नहीं, कर्जदार बन गई हैं। डीपीएम से बातचीत बेनतीजा, डीडीसी के साथ बैठक भी नहीं बनी बात मंगलवार शाम जीविका की डीपीएम अनिशा भूख हड़ताल पर बैठीं महिलाओं से बातचीत करने पहुंचीं। महिलाओं ने उनकी बात मानने से इनकार करते हुए आंदोलन जारी रखने की बात कही। रात करीब 8 बजे डीडीसी निशांत सिहरा के साथ भी बैठक हुई, लेकिन महिलाओं के अनुसार इसका कोई समाधान नहीं निकला। इसके बाद डीएम के साथ अधिकारियों की बैठक चलने की बात सामने आई। जीविका डीपीएम अनिशा ने बताया कि मामले को लेकर बैठक चल रही है। महिलाओं का आरोप- तीन साल से सिर्फ आश्वासन भूख हड़ताल पर बैठीं महिलाओं का कहना है कि पिछले तीन साल से वे अपनी समस्या लेकर अधिकारियों के पास जा रही हैं। हर बार उन्हें कार्रवाई और क्लस्टर शुरू होने का भरोसा दिया गया, लेकिन जमीन पर स्थिति नहीं बदली। अब छह महिलाओं ने अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू कर दी है। उनका कहना है कि जब तक उनके नाम पर लिए गए कर्ज, क्लस्टर की राशि और पूरे मामले की जांच कर समाधान नहीं किया जाता, आंदोलन जारी रहेगा। उनका सवाल है कि इतनी बैठकों और इतने आश्वासनों के बाद भी यदि क्लस्टर शुरू नहीं हुआ तो जिम्मेदार एजेंसी पर अब तक सीधी कार्रवाई क्यों नहीं हुई? 110 महिलाएं के बैंक में खाते खुलवाए मशरूम क्लस्टर के नाम पर जीविका दीदियों को लोन दिलाने की प्रक्रिया में 110 महिलाओं के बिहार ग्रामीण बैंक में खाते खुलवाए गए। इसके बाद रोजगार शुरू कराने के नाम पर प्रत्येक महिला के नाम करीब 3.25 लाख रुपए का लोन स्वीकृत कराया गया। इस हिसाब से कुल राशि करीब 3.57 करोड़ रुपए बैठती है। जीविका दीदियों का आरोप है कि लोन की रकम उनके खाते में आने के बजाय ग्रेविटी एग्रो एंड एनर्जी एजेंसी के निदेशक आशुतोष मंगलम के खाते में मंगवा ली गई। महिलाओं का कहना है कि उन्हें न तो लोन की राशि मिली और न ही उसके अनुरूप रोजगार शुरू हुआ। अब बैंक की ओर से लोन चुकाने के लिए नोटिस भेजे जा रहे हैं, जिससे वे आर्थिक संकट में फंस गई हैं। वहीं, जिस जमीन पर मशरूम क्लस्टर तैयार किया जाना था, उसके रैयत भी किराये की मांग कर रहे हैं। यानी लखपति बनने की उम्मीद में निकलीं महिलाएं अब बैंक के कर्ज के साथ जमीन के किराये के दबाव में दोहरे संकट में हैं। मुजफ्फरपुर में मशरूम क्लस्टर के नाम पर सैकड़ों जीविका दीदियों के नाम पर लोन लिए जाने और राशि उन तक नहीं पहुंचने का मामला सामने आया है। लखपति दीदी बनाने का सपना दिखाया गया, लेकिन अब कर्ज के बोझ तले दबने का आरोप है। महिलाओं का आरोप है कि मशरूम की खेती के नाम पर सिर्फ 10 अधूरी झोपड़ियां खड़ी की गई। न मशरूम उगा और न रोजगार मिला, लेकिन बैंक से कर्ज वसूली के नोटिस जरूर पहुंच रहे हैं। न्याय की मांग को लेकर छह जीविका दीदियों ने 11 अगस्त से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू कर दी है। महिलाओं का कहना है कि 3 साल से वे अधिकारियों के चक्कर लगा रही हैं, लेकिन हर बार सिर्फ आश्वासन मिला। लोन नहीं लिया, फिर भी कर्ज चढ़ गया भूख हड़ताल पर बैठीं कामिनी देवी का आरोप है कि मशरूम क्लस्टर के लिए लोन लेने की बात कही गई थी। उन्हें बताया गया था कि क्लस्टर की देखरेख के बदले 16 हजार रुपए मिलेंगे, जबकि दो अन्य लोगों को 8-8 हजार रुपए दिए जाएंगे। उनका दावा है कि उन्होंने लोन की राशि में से एक रुपए भी नहीं लिया, इसके बावजूद उनके नाम पर कर्ज चढ़ गया। कामिनी देवी के अनुसार, क्लस्टर के नाम पर केवल 10 झोपड़ियां बनाई गई और काम अधूरा छोड़ दिया गया। इन झोपड़ियों में बिजली के मीटर भी लगा दिए गए। अब बिजली बिल और बैंक के नोटिस ने उनकी परेशानी बढ़ा दी है। बैंक के नोटिस से घर में भी बढ़ा विवाद बोचहां की विशाल सीएलएफ से जुड़ी खुशबू देवी ने भी इसी तरह की शिकायत की। उनका कहना है कि लोन को लेकर उन्हें दो बार बैंक का नोटिस मिल चुका है। पति से भी विवाद की स्थिति बनी रहती है। उनका सवाल है कि जब पैसा उनके हाथ में आया ही नहीं तो कर्ज चुकाने की जिम्मेदारी उन पर क्यों है? महिलाओं का कहना है कि उन्होंने जिलाधिकारी, डीडीसी और अन्य अधिकारियों से लेकर पटना तक शिकायत की, लेकिन अब तक समस्या का समाधान नहीं हुआ। 10 अगस्त तक क्लस्टर शुरू करने का मिला था भरोसा जीविका दीदियों का आरोप है कि उन्हें भरोसा दिया गया था कि 10 अगस्त तक तीन मशरूम क्लस्टर शुरू हो जाएंगे और महिलाओं को रोजगार मिलेगा। लेकिन उनके अनुसार, तीन साल बाद भी एक भी क्लस्टर ठीक से संचालित नहीं हो रहा है। बोचहां में एक क्लस्टर शुरू होने की बात कही गई, लेकिन वहां भी स्थिति संतोषजनक नहीं है। महिलाओं का कहना है कि सरकार की ओर से उन्हें लखपति दीदी बनाने का सपना दिखाया गया था, लेकिन आज स्थिति ऐसी है कि वे लखपति नहीं, कर्जदार बन गई हैं। डीपीएम से बातचीत बेनतीजा, डीडीसी के साथ बैठक भी नहीं बनी बात मंगलवार शाम जीविका की डीपीएम अनिशा भूख हड़ताल पर बैठीं महिलाओं से बातचीत करने पहुंचीं। महिलाओं ने उनकी बात मानने से इनकार करते हुए आंदोलन जारी रखने की बात कही। रात करीब 8 बजे डीडीसी निशांत सिहरा के साथ भी बैठक हुई, लेकिन महिलाओं के अनुसार इसका कोई समाधान नहीं निकला। इसके बाद डीएम के साथ अधिकारियों की बैठक चलने की बात सामने आई। जीविका डीपीएम अनिशा ने बताया कि मामले को लेकर बैठक चल रही है। महिलाओं का आरोप- तीन साल से सिर्फ आश्वासन भूख हड़ताल पर बैठीं महिलाओं का कहना है कि पिछले तीन साल से वे अपनी समस्या लेकर अधिकारियों के पास जा रही हैं। हर बार उन्हें कार्रवाई और क्लस्टर शुरू होने का भरोसा दिया गया, लेकिन जमीन पर स्थिति नहीं बदली। अब छह महिलाओं ने अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू कर दी है। उनका कहना है कि जब तक उनके नाम पर लिए गए कर्ज, क्लस्टर की राशि और पूरे मामले की जांच कर समाधान नहीं किया जाता, आंदोलन जारी रहेगा। उनका सवाल है कि इतनी बैठकों और इतने आश्वासनों के बाद भी यदि क्लस्टर शुरू नहीं हुआ तो जिम्मेदार एजेंसी पर अब तक सीधी कार्रवाई क्यों नहीं हुई? 110 महिलाएं के बैंक में खाते खुलवाए मशरूम क्लस्टर के नाम पर जीविका दीदियों को लोन दिलाने की प्रक्रिया में 110 महिलाओं के बिहार ग्रामीण बैंक में खाते खुलवाए गए। इसके बाद रोजगार शुरू कराने के नाम पर प्रत्येक महिला के नाम करीब 3.25 लाख रुपए का लोन स्वीकृत कराया गया। इस हिसाब से कुल राशि करीब 3.57 करोड़ रुपए बैठती है। जीविका दीदियों का आरोप है कि लोन की रकम उनके खाते में आने के बजाय ग्रेविटी एग्रो एंड एनर्जी एजेंसी के निदेशक आशुतोष मंगलम के खाते में मंगवा ली गई। महिलाओं का कहना है कि उन्हें न तो लोन की राशि मिली और न ही उसके अनुरूप रोजगार शुरू हुआ। अब बैंक की ओर से लोन चुकाने के लिए नोटिस भेजे जा रहे हैं, जिससे वे आर्थिक संकट में फंस गई हैं। वहीं, जिस जमीन पर मशरूम क्लस्टर तैयार किया जाना था, उसके रैयत भी किराये की मांग कर रहे हैं। यानी लखपति बनने की उम्मीद में निकलीं महिलाएं अब बैंक के कर्ज के साथ जमीन के किराये के दबाव में दोहरे संकट में हैं।  

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