मुख्यमंत्री ने चेताया, झारखंड करेगा आंदोलन:संसद से पास खान एवं खनिज विकास और विनियमन संशोधन बिल का झारखंड सरकार ने किया विरोध

मुख्यमंत्री ने चेताया, झारखंड करेगा आंदोलन:संसद से पास खान एवं खनिज विकास और विनियमन संशोधन बिल का झारखंड सरकार ने किया विरोध

संसद से पारित एमएमडीआर (खान एवं खनिज विकास और विनियमन) संशोधन बिल को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने काला बिल बताया है। उन्होंने इसके खिलाफ बड़े आंदोलन का ऐलान किया है। उन्होंने कहा कि खनिज सेस रोककर केंद्र ने झारखंड के अधिकारों पर कुठाराघात किया है। राज्य के हाथ-पैर काटने का काम किया है। इस कानून के खिलाफ झारखंड ऐसा आंदोलन करेगा, जिसे पूरा देश देखेगा। इस मुद्दे पर उन्होंने गुरुवार को झामुमो के सांसदों, मंत्रियों, विधायकों और जिलों के पार्टी पदाधिकारियों के साथ ऑनलाइन बैठक की। उनसे राय-मशविरा कर देशव्यापी आंदोलन की तैयारी शुरू कर दी। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा-खनिज झारखंड का, जमीन झारखंड की तो हमारे हक का फैसला दिल्ली क्यों करेगी। लोकसभा और राज्यसभा में जल्दीबाजी में यह बिल पास कराकर केंद्र सरकार ने झारखंड और झारखंडियों के साथ अन्याय किया है। यह झारखंड के आर्थिक हितों के खिलाफ है। इससे राज्य के विकास और भविष्य पर बड़ा कुठाराघात होगा। झारखंड यह सौतेला व्यवहार नहीं सहेगा। इसी बीच झामुमो के केंद्रीय महासचिव विनोद पांडेय ने चेताया कि केंद्र हमें 1980 के दशक के उग्र आंदोलन की ओर लौटने पर मजबूर न करे। अगर राज्य के हक पर डाला डाला गया तो जन-जागरण और धरना-प्रदर्शन के साथ आर्थिक नाकेबंदी की जाएगी। झारखंड से खनिज का एक ढेला भी बाहर नहीं जाने दिया जाएगा। गौरतलब है कि इस कानून के लागू होने के बाद राज्य सरकारें खनिज और खनिजयुक्त जमीन पर अतिरिक्त टैक्स या सेस नहीं लगा सकेंगी। मंईयां सम्मान और अबुआ आवास जैसी योजनाएं प्रभावित होंगी मुख्यमंत्री ने कहा कि खनिज सेस से मिलने वाले राजस्व पर असर पड़ने से सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी योजनाएं प्रभावित होंगी। मंईयां सम्मान योजना, अबुआ आवास योजना, पेंशन, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी योजनाएं बंद होने के कगार पर पहुंच जाएगी। झामुमो इस कानून का पुरजोर विरोध करता है। केंद्र सरकार ने इस कानून को वापस नहीं लिया तो हर जिले, प्रखंड, पंचायत और शहर में इसका विरोध किया जाएगा। झारखंड को उसका हक नहीं मिला तो राज्य निर्णायक और ऐतिहासिक फैसले लेने से पीछे नहीं हटेगा। झारखंड ने विकास की कीमत चुकाई, अब हक भी मिले मुख्यमंत्री ने कहा है कि झारखंड दशकों से देश को कोयला, लोहा, बॉक्साइट और यूरेनियम दे रहा है। इसके बदले यहां के लोगों को विस्थापन, पर्यावरण प्रदूषण, जंगलों के नुकसान और आजीविका छिनने की कीमत चुकानी पड़ी। राज्य में खनन का बड़ा हिस्सा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों द्वारा किया जाता है। ऐसे में खनन से पैदा आर्थिक मूल्य का न्यायसंगत हिस्सा स्थानीय विकास पर खर्च होना चाहिए। राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और लोकसभा के नेता प्रतिपक्ष को लिखा पत्र इस विधेयक के खिलाफ मुख्यमंत्री ने केंद्र के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को पत्र लिखकर हस्तक्षेप की मांग की है। इसमें लिखा है कि विधेयक में जोड़ी गई धारा 9डी राज्यों के खनिज भूमि पर टैक्स या सेस लगाने के संवैधानिक अधिकार को कमजोर करती है। इससे संघीय ढांचे और राज्यों की वित्तीय स्वायत्तता पर सीधा असर पड़गा। उन्होंने कहा कि अगर संशोधन वापस नहीं हुआ तो सुप्रीम कोर्ट जाने के साथ कानूनी और संवैधानिक विकल्प अपनाया जाएगा राष्ट्रपति को लिखा… यह सिर्फ राजस्व नहीं, राज्यों की वित्तीय स्वायत्तता और संघीय ढांचे का मामला राष्ट्रपति को लिखे पत्र में हेमंत ने कहा है कि यह संशोधन सिर्फ राजस्व का विषय नहीं है, बल्कि राज्यों की विधायी एवं वित्तीय स्वायत्तता, संघीय ढांचे, आदिवासी समुदाय और खनन प्रभावित क्षेत्र के अधिकारों से जुड़ा प्रश्न है। इसलिए संविधान में उपलब्ध सभी विकल्पों पर विचार करें, ताकि इन्हें न्यायसंगत महत्व मिल सके। मुख्यमंत्री ने 25 जुलाई 2024 के सुप्रीम कोर्ट की नौ जजों की संविधान पीठ के ‘मिनरल एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी बनाम सेल’ फैसले का हवाला दिया है। उन्होंने कहा कि संविधान की सातवीं अनुसूची की राज्य सूची की प्रविष्टि 49 के तहत राज्यों को खनिज युक्त भूमि पर टैक्स लगाने का अधिकार है। इसी आधार पर झारखंड विधानसभा ने ‘झारखंड मिनरल बेयरिंग लैंड सेस एक्ट, 2024’ पारित किया था। प्रधानमंत्री को लिखा… विधेयक पर पुनर्विचार करें, खनिज युक्त भूमि को इससे बाहर रखा जाए प्रधानमंत्री को भेजे पत्र में हेमंत ने विधेयक की धारा 2, 3, 4 और 5 पर पुनर्विचार करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि धारा 9डी को केवल खनिज अधिकारों से जुड़े विषयों तक सीमित किया जाए। खनिज युक्त भूमि को इससे बाहर रखा जाए। धारा 2 और 3 के जरिए राज्यों की भूमि पर संघ के नियंत्रण का विस्तार नहीं किया जाए। मुख्यमंत्री ने चेतावनी दी है कि संशोधन वापस नहीं हुआ तो झारखंड सरकार सुप्रीम कोर्ट जाने समेत सभी कानूनी और संवैधानिक विकल्प अपनाएगी। राहुल गांधी से कहा- केंद्र के स्तर पर उठाएं मुद्दा सीएम ने राहुल गांधी से केंद्र के साथ वार्ता करने और मुद्दे को उचित मंच पर उठाने का अनुरोध किया। पत्र में उन्होंने झारखंड की वित्तीय निर्भरता का आंकड़ा भी रखा है। संसद से पारित एमएमडीआर (खान एवं खनिज विकास और विनियमन) संशोधन बिल को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने काला बिल बताया है। उन्होंने इसके खिलाफ बड़े आंदोलन का ऐलान किया है। उन्होंने कहा कि खनिज सेस रोककर केंद्र ने झारखंड के अधिकारों पर कुठाराघात किया है। राज्य के हाथ-पैर काटने का काम किया है। इस कानून के खिलाफ झारखंड ऐसा आंदोलन करेगा, जिसे पूरा देश देखेगा। इस मुद्दे पर उन्होंने गुरुवार को झामुमो के सांसदों, मंत्रियों, विधायकों और जिलों के पार्टी पदाधिकारियों के साथ ऑनलाइन बैठक की। उनसे राय-मशविरा कर देशव्यापी आंदोलन की तैयारी शुरू कर दी। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा-खनिज झारखंड का, जमीन झारखंड की तो हमारे हक का फैसला दिल्ली क्यों करेगी। लोकसभा और राज्यसभा में जल्दीबाजी में यह बिल पास कराकर केंद्र सरकार ने झारखंड और झारखंडियों के साथ अन्याय किया है। यह झारखंड के आर्थिक हितों के खिलाफ है। इससे राज्य के विकास और भविष्य पर बड़ा कुठाराघात होगा। झारखंड यह सौतेला व्यवहार नहीं सहेगा। इसी बीच झामुमो के केंद्रीय महासचिव विनोद पांडेय ने चेताया कि केंद्र हमें 1980 के दशक के उग्र आंदोलन की ओर लौटने पर मजबूर न करे। अगर राज्य के हक पर डाला डाला गया तो जन-जागरण और धरना-प्रदर्शन के साथ आर्थिक नाकेबंदी की जाएगी। झारखंड से खनिज का एक ढेला भी बाहर नहीं जाने दिया जाएगा। गौरतलब है कि इस कानून के लागू होने के बाद राज्य सरकारें खनिज और खनिजयुक्त जमीन पर अतिरिक्त टैक्स या सेस नहीं लगा सकेंगी। मंईयां सम्मान और अबुआ आवास जैसी योजनाएं प्रभावित होंगी मुख्यमंत्री ने कहा कि खनिज सेस से मिलने वाले राजस्व पर असर पड़ने से सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी योजनाएं प्रभावित होंगी। मंईयां सम्मान योजना, अबुआ आवास योजना, पेंशन, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी योजनाएं बंद होने के कगार पर पहुंच जाएगी। झामुमो इस कानून का पुरजोर विरोध करता है। केंद्र सरकार ने इस कानून को वापस नहीं लिया तो हर जिले, प्रखंड, पंचायत और शहर में इसका विरोध किया जाएगा। झारखंड को उसका हक नहीं मिला तो राज्य निर्णायक और ऐतिहासिक फैसले लेने से पीछे नहीं हटेगा। झारखंड ने विकास की कीमत चुकाई, अब हक भी मिले मुख्यमंत्री ने कहा है कि झारखंड दशकों से देश को कोयला, लोहा, बॉक्साइट और यूरेनियम दे रहा है। इसके बदले यहां के लोगों को विस्थापन, पर्यावरण प्रदूषण, जंगलों के नुकसान और आजीविका छिनने की कीमत चुकानी पड़ी। राज्य में खनन का बड़ा हिस्सा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों द्वारा किया जाता है। ऐसे में खनन से पैदा आर्थिक मूल्य का न्यायसंगत हिस्सा स्थानीय विकास पर खर्च होना चाहिए। राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और लोकसभा के नेता प्रतिपक्ष को लिखा पत्र इस विधेयक के खिलाफ मुख्यमंत्री ने केंद्र के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को पत्र लिखकर हस्तक्षेप की मांग की है। इसमें लिखा है कि विधेयक में जोड़ी गई धारा 9डी राज्यों के खनिज भूमि पर टैक्स या सेस लगाने के संवैधानिक अधिकार को कमजोर करती है। इससे संघीय ढांचे और राज्यों की वित्तीय स्वायत्तता पर सीधा असर पड़गा। उन्होंने कहा कि अगर संशोधन वापस नहीं हुआ तो सुप्रीम कोर्ट जाने के साथ कानूनी और संवैधानिक विकल्प अपनाया जाएगा राष्ट्रपति को लिखा… यह सिर्फ राजस्व नहीं, राज्यों की वित्तीय स्वायत्तता और संघीय ढांचे का मामला राष्ट्रपति को लिखे पत्र में हेमंत ने कहा है कि यह संशोधन सिर्फ राजस्व का विषय नहीं है, बल्कि राज्यों की विधायी एवं वित्तीय स्वायत्तता, संघीय ढांचे, आदिवासी समुदाय और खनन प्रभावित क्षेत्र के अधिकारों से जुड़ा प्रश्न है। इसलिए संविधान में उपलब्ध सभी विकल्पों पर विचार करें, ताकि इन्हें न्यायसंगत महत्व मिल सके। मुख्यमंत्री ने 25 जुलाई 2024 के सुप्रीम कोर्ट की नौ जजों की संविधान पीठ के ‘मिनरल एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी बनाम सेल’ फैसले का हवाला दिया है। उन्होंने कहा कि संविधान की सातवीं अनुसूची की राज्य सूची की प्रविष्टि 49 के तहत राज्यों को खनिज युक्त भूमि पर टैक्स लगाने का अधिकार है। इसी आधार पर झारखंड विधानसभा ने ‘झारखंड मिनरल बेयरिंग लैंड सेस एक्ट, 2024’ पारित किया था। प्रधानमंत्री को लिखा… विधेयक पर पुनर्विचार करें, खनिज युक्त भूमि को इससे बाहर रखा जाए प्रधानमंत्री को भेजे पत्र में हेमंत ने विधेयक की धारा 2, 3, 4 और 5 पर पुनर्विचार करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि धारा 9डी को केवल खनिज अधिकारों से जुड़े विषयों तक सीमित किया जाए। खनिज युक्त भूमि को इससे बाहर रखा जाए। धारा 2 और 3 के जरिए राज्यों की भूमि पर संघ के नियंत्रण का विस्तार नहीं किया जाए। मुख्यमंत्री ने चेतावनी दी है कि संशोधन वापस नहीं हुआ तो झारखंड सरकार सुप्रीम कोर्ट जाने समेत सभी कानूनी और संवैधानिक विकल्प अपनाएगी। राहुल गांधी से कहा- केंद्र के स्तर पर उठाएं मुद्दा सीएम ने राहुल गांधी से केंद्र के साथ वार्ता करने और मुद्दे को उचित मंच पर उठाने का अनुरोध किया। पत्र में उन्होंने झारखंड की वित्तीय निर्भरता का आंकड़ा भी रखा है।  

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