मिर्जापुर में छात्र-छात्राओं के साथ ‘विचार गोष्ठी’ का आयोजन:प्राचीन समुद्री इतिहास और निषाद समाज की नाव निर्माण कला पर हुई मंथन

मिर्जापुर में छात्र-छात्राओं के साथ ‘विचार गोष्ठी’ का आयोजन:प्राचीन समुद्री इतिहास और निषाद समाज की नाव निर्माण कला पर हुई मंथन

मिर्जापुर में मंगलवार को डैफोडिल्स पब्लिक स्कूल में प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के सदस्य संजीव कुमार सान्याल की मौजूदगी में ‘विचार गोष्ठी’ का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मिर्जापुर के व्यापारिक इतिहास, प्राचीन समुद्री परंपरा और निषाद समाज की पारंपरिक नाव निर्माण कला पर विस्तार से चर्चा हुई। वक्ताओं ने विद्यार्थियों से देश की समृद्ध सांस्कृतिक एवं ऐतिहासिक विरासत से जुड़ने का आह्वान किया। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि संजीव कुमार सान्याल, नगर पालिकाध्यक्ष श्याम सुंदर केशरी, विद्यालय की निदेशिका अपराजिता सिंह और निदेशक अमरदीप सिंह ने मां सरस्वती एवं मां विंध्यवासिनी के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर किया। इसके बाद स्काउट एवं गाइड के विद्यार्थियों ने अनुशासित परेड प्रस्तुत की। छात्र-छात्राओं ने संस्कृत श्लोक, समूह कजरी गायन समेत विभिन्न सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं। भारत के समुद्री इतिहास पर चर्चा मुख्य सत्र में ‘आईएनएसवी कौण्डिन्य प्लवते यश’ विषय पर चर्चा हुई। संजीव सान्याल ने भारत के प्राचीन समुद्री इतिहास और नौवहन परंपरा पर प्रकाश डाला। उन्होंने आईएनएसवी कौण्डिन्य की ऐतिहासिक यात्रा को प्रेरणादायी बताते हुए कहा कि भारत का गौरवशाली इतिहास वर्तमान और आने वाली पीढ़ियों को आत्मविश्वास और राष्ट्र निर्माण की प्रेरणा देता है। नारघाट के व्यापारिक महत्व की जानकारी दी नगर पालिकाध्यक्ष श्याम सुंदर केशरी ने मिर्जापुर के इतिहास, नारघाट के व्यापारिक महत्व और निषाद समाज की पारंपरिक नाव निर्माण कला के बारे में जानकारी दी। कार्यक्रम में रामबली द्वारा तैयार की गई पारंपरिक नाव का प्रदर्शन भी किया गया। खास बात यह रही कि इस नाव के निर्माण में धातु का इस्तेमाल नहीं किया गया था। मल्हार गीत और पाल वाली नाव ने स्थानीय लोक संस्कृति और परंपरा को भी प्रदर्शित किया। कार्यक्रम स्थल पर जिले की सांस्कृतिक विरासत पर आधारित प्रदर्शनी भी लगाई गई। इस दौरान आचार्य अगस्त द्विवेदी और गुरुकुल के बटुकों को सम्मानित किया गया। पद्मश्री कजरी गायिका उर्मिला श्रीवास्तव समेत कई गणमान्य लोग मौजूद रहे। परंपरा और उद्यमिता को विकास से जोड़ने पर जोर अपराजिता सिंह ने कहा कि कौण्डिन्य ने समुद्री यात्राओं के माध्यम से भारत की कीर्ति दूर देशों तक पहुंचाई। उन्होंने कहा कि प्रतिभा, परंपरा और उद्यमिता को विकास की नई धाराओं से जोड़ने की जरूरत है। कार्यक्रम के समापन पर अतिथियों को स्मृति चिह्न और अंगवस्त्रम भेंट कर सम्मानित किया गया।

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