मिर्जापुर में हिंदीश्री साहित्य संस्थान के सौजन्य से अनगढ़ रोड स्थित सृष्टि राज के आवास पर काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। इसमें गोरखपुर से आए प्रसिद्ध कवि एवं आशु संचालक राजेश राज और उनकी पत्नी नीलम श्रीवास्तव मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुईं। नगर के कवियों और कवयित्रियों ने अंगवस्त्र और स्मृति चिह्न देकर अतिथियों का स्वागत किया। कवियों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से मर्यादा, सदाचार, सामाजिक संवेदना और जीवन मूल्यों का संदेश दिया। कार्यक्रम का शुभारंभ इला जायसवाल ने मां सरस्वती की वंदना से किया। मुख्य अतिथि राजेश राज ने कहा कि हर व्यक्ति को अपने भीतर राम के गुणों को जागृत रखना चाहिए और रावण रूपी बुराइयों को दबाकर रखना चाहिए। उन्होंने अपनी पंक्तियां सुनाईं— दीप तुलसी की तरह एक जलाए रखिए,
अपने मानस में उजाले को बसाए रखिए।
राम-रावण सदा हर दिल में रहा करते हैं,
राम जागें सदा, रावण को सुलाए रखिए। उनकी रचना पर श्रोताओं ने तालियां बजाकर उत्साह बढ़ाया। आनंद अमित ने दीपावली पर आर्थिक तंगी से जूझते व्यक्ति की पीड़ा को अपनी पंक्तियों में व्यक्त किया— रोशन मेरा घर कर देना दीवाली में अबकी चंदा,
दीपक जला नहीं पाऊंगा कंगाली में अबकी चंदा। अनिल यादव ने सामाजिक दिखावे और चेहरों पर सजी मुस्कान को अपनी रचना के माध्यम से प्रस्तुत किया। वहीं, मुख्य अतिथि नीलम श्रीवास्तव ने कहा कि इस तरह की काव्य गोष्ठियां सुखद अनुभव देने के साथ साहित्यिक संवाद को भी बढ़ावा देती हैं। नंदिनी वर्मा ने युवाओं को आत्मबल और स्वाभिमान का संदेश देते हुए पढ़ा— ऐ मनुज, तू अपनी शक्ति को जरा पहचान ले,
बाजुओं में बल है, फिर तू क्यों भला एहसान ले। विजय श्रीवास्तव ने मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के आदर्शों का वर्णन करते हुए अपनी रचना प्रस्तुत की। वहीं, इला जायसवाल ने मां सरस्वती की स्तुति में काव्यपाठ किया। कार्यक्रम के अंत में कवयित्री सृष्टि राज ने अतिथियों, कवियों और उपस्थित साहित्यप्रेमियों के प्रति आभार व्यक्त किया। गोष्ठी में सावित्री कुमारी, यामिनी, मयंक सहित अन्य साहित्यप्रेमी मौजूद रहे।

