जदयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष सह राज्यसभा सांसद संजय कुमार झा सोमवार देर शाम दरभंगा पहुंचे। कबराघाट स्थित मिथिला संस्कृत शोध संस्थान का निरीक्षण किया। उन्होंने संस्थान में संरक्षित दुर्लभ पांडुलिपियों का अवलोकन किया और विकास कार्यों की जानकारी ली। संजय झा ने कहा कि मिथिला संस्कृत शोध संस्थान मिथिला का गौरव है। यहां करीब 1400 वर्ष पुरानी दुर्लभ पांडुलिपियां संरक्षित हैं। इन पांडुलिपियों की लिखावट और ऐतिहासिक महत्व देखने योग्य है। भविष्य में इन्हें संग्रहालय के रूप में विकसित कर दुनिया भर के लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बनाया जा सकता है। दुर्लभ पांडुलिपियों के संरक्षण और डिजिटलीकरण की दिशा में तेजी से काम किया जा रहा है। आने वाले करीब 10 दिनों में डिजिटलीकरण का काम शुरू हो जाएगा। इसके लिए भारत सरकार की ओर से मशीन भेजी जा रही है। आधुनिक तकनीक और एआई की मदद से संस्थान में मौजूद दस्तावेजों को डिजिटल करने के साथ उनके अनुवाद की दिशा में भी काम किया जाएगा। ‘छात्रों को ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सटी जाने का मिलेगा मौका’ राज्यसभा सांसद संजय झा ने आगे कहा कि मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के प्रयास से ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से भी सहयोग की दिशा में पहल हुई है। आने वाले समय में ऑक्सफोर्ड के छात्र यहां आकर पांडुलिपियों का अध्ययन करेंगे। यहां के छात्रों को भी वहां जाने का अवसर मिलेगा। संस्थान का प्रकाशन दुनिया भर में पहुंचाने की दिशा में भी काम होगा। पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि संस्थान को राष्ट्रीय स्तर का प्रतिष्ठित संस्थान बनाने की दिशा में काम चल रहा है। कनेक्टिविटी बेहतर होने से शोध संस्थान को और लाभ मिलेगा। बिहार में इतनी समृद्ध धरोहर बहुत कम स्थानों पर है। बचे काम तेज से कराने के निर्देश इसके अलावा सोमवार को संजय झा ने रभंगा एयरपोर्ट पर निर्माणाधीन नए टर्मिनल भवन और अन्य यात्री सुविधाओं की प्रगति का स्थल निरीक्षण किया। अधिकारियों के साथ बैठक कर इसकी विस्तृत समीक्षा की। शेष कार्यों को तेजी से पूरा कराने के निर्देश दिया। जदयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष सह राज्यसभा सांसद संजय कुमार झा सोमवार देर शाम दरभंगा पहुंचे। कबराघाट स्थित मिथिला संस्कृत शोध संस्थान का निरीक्षण किया। उन्होंने संस्थान में संरक्षित दुर्लभ पांडुलिपियों का अवलोकन किया और विकास कार्यों की जानकारी ली। संजय झा ने कहा कि मिथिला संस्कृत शोध संस्थान मिथिला का गौरव है। यहां करीब 1400 वर्ष पुरानी दुर्लभ पांडुलिपियां संरक्षित हैं। इन पांडुलिपियों की लिखावट और ऐतिहासिक महत्व देखने योग्य है। भविष्य में इन्हें संग्रहालय के रूप में विकसित कर दुनिया भर के लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बनाया जा सकता है। दुर्लभ पांडुलिपियों के संरक्षण और डिजिटलीकरण की दिशा में तेजी से काम किया जा रहा है। आने वाले करीब 10 दिनों में डिजिटलीकरण का काम शुरू हो जाएगा। इसके लिए भारत सरकार की ओर से मशीन भेजी जा रही है। आधुनिक तकनीक और एआई की मदद से संस्थान में मौजूद दस्तावेजों को डिजिटल करने के साथ उनके अनुवाद की दिशा में भी काम किया जाएगा। ‘छात्रों को ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सटी जाने का मिलेगा मौका’ राज्यसभा सांसद संजय झा ने आगे कहा कि मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के प्रयास से ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से भी सहयोग की दिशा में पहल हुई है। आने वाले समय में ऑक्सफोर्ड के छात्र यहां आकर पांडुलिपियों का अध्ययन करेंगे। यहां के छात्रों को भी वहां जाने का अवसर मिलेगा। संस्थान का प्रकाशन दुनिया भर में पहुंचाने की दिशा में भी काम होगा। पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि संस्थान को राष्ट्रीय स्तर का प्रतिष्ठित संस्थान बनाने की दिशा में काम चल रहा है। कनेक्टिविटी बेहतर होने से शोध संस्थान को और लाभ मिलेगा। बिहार में इतनी समृद्ध धरोहर बहुत कम स्थानों पर है। बचे काम तेज से कराने के निर्देश इसके अलावा सोमवार को संजय झा ने रभंगा एयरपोर्ट पर निर्माणाधीन नए टर्मिनल भवन और अन्य यात्री सुविधाओं की प्रगति का स्थल निरीक्षण किया। अधिकारियों के साथ बैठक कर इसकी विस्तृत समीक्षा की। शेष कार्यों को तेजी से पूरा कराने के निर्देश दिया।

