महाराष्ट्र के मंत्री छगन भुजबल को बड़ी राहत, ACB के कलीना लाइब्रेरी केस में NCP नेता समेत सभी आरोपियों को किया बरी

महाराष्ट्र के मंत्री छगन भुजबल को बड़ी राहत, ACB के कलीना लाइब्रेरी केस में NCP नेता समेत सभी आरोपियों को किया बरी

मुंबई की एक स्पेशल कोर्ट ने, जो MPs और MLAs से जुड़े मामलों की सुनवाई करती है, महाराष्ट्र के मंत्री और NCP नेता छगन भुजबल को भ्रष्टाचार के एक मामले में बरी कर दिया है। यह मामला मुंबई यूनिवर्सिटी के कलीना कैंपस में सेंट्रल लाइब्रेरी के कंस्ट्रक्शन कॉन्ट्रैक्ट से जुड़ा था। यह केस एंटी-करप्शन ब्यूरो (ACB) ने 2015 में तब दर्ज किया था, जब भुजबल महाराष्ट्र के पब्लिक वर्क्स डिपार्टमेंट के मंत्री थे। कोर्ट ने गुरुवार को भुजबल और दूसरे आरोपियों को बरी कर दिया। हालांकि, इस फैसले का विस्तृत आदेश अभी उपलब्ध नहीं था। 
कलिना लाइब्रेरी केस क्या है?
ACB ने जून 2015 में मुंबई यूनिवर्सिटी के कलिना कैंपस में सेंट्रल लाइब्रेरी बनाने का कॉन्ट्रैक्ट देने में कथित गड़बड़ियों के सिलसिले में यह केस दर्ज किया था। उस समय PWD मंत्री रहे भुजबल पर जांच एजेंसी ने आरोप लगाया था कि उन्हें इस कॉन्ट्रैक्ट के बदले कथित तौर पर रिश्वत मिली थी। इसके बाद ACB ने इस मामले में चार्जशीट दाखिल की। ​​उस समय एजेंसी के आरोपों के मुताबिक, भुजबल से जुड़े एक ट्रस्ट को किए गए पेमेंट का संबंध लाइब्रेरी प्रोजेक्ट का कॉन्ट्रैक्ट देने से था। आरोपियों ने इन आरोपों से इनकार किया था। यह मामला उन भ्रष्टाचार के मामलों में से एक था जो भुजबल के कार्यकाल के दौरान पब्लिक वर्क्स डिपार्टमेंट (PWD) द्वारा संभाले गए कॉन्ट्रैक्ट्स में कथित गड़बड़ियों की व्यापक जांच से सामने आए थे।

इसे भी पढ़ें: Maharashtra Drought: सूखा प्रबंधन पर 3 दिन में पहली अधिसूचना जारी करेगी सरकार, बोले CM Devendra Fadnavis
दूसरे आरोपी कौन थे?

यह मामला भुजबल और उस समय PWD से जुड़े कई सरकारी अधिकारियों के खिलाफ दर्ज किया गया था। आरोपियों में गजानन सावंत (तत्कालीन सब-डिविजनल इंजीनियर), हरीश पाटिल (तत्कालीन एग्जीक्यूटिव इंजीनियर), अनिलकुमार गायकवाड़ (तत्कालीन सुपरिटेंडिंग इंजीनियर), संजय सोलंकी (तत्कालीन अंडर-सेक्रेटरी) और MS शाह (तत्कालीन कंस्ट्रक्शन डिपार्टमेंट सेक्रेटरी) शामिल थे। दूसरे आरोपियों के खिलाफ कार्यवाही भी स्पेशल कोर्ट में लंबित थी। ताजा आदेश के साथ, इस मामले के सभी आरोपियों को बरी कर दिया गया है। 

इसे भी पढ़ें: इधर विपक्ष चुनाव आयोग पर हमला करता रह गया, उधर भाजपा ने बड़ा खेल कर दिया, जारी हो गयी BJP Pradesh Prabharis List

एक मामला जो सालों तक पेंडिंग रहा

कलीना लाइब्रेरी का मामला भुजबल की उन लंबी कानूनी लड़ाइयों का हिस्सा रहा है, जो PWD मंत्री के तौर पर उनके कार्यकाल में दिए गए कॉन्ट्रैक्ट से जुड़े आरोपों की वजह से शुरू हुई थीं। ACB ने 2016 में एक डिटेल्ड चार्जशीट दाखिल की थी, जिसमें लाइब्रेरी बनाने का कॉन्ट्रैक्ट देने में गड़बड़ी का आरोप लगाया गया था। एजेंसी का आरोप था कि भुजबल से जुड़े एक ट्रस्ट को किए गए पेमेंट, प्रोजेक्ट में शामिल डेवलपर को दिए गए फायदों से जुड़े थे। इन कथित लेन-देन और कॉन्ट्रैक्ट देने के तरीके पर बाद में स्पेशल कोर्ट में सुनवाई हुई।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *