CEC अकेले फैसले नहीं ले सकते, Himanta Biswa Sarma बोले- Election Commission सामूहिक संस्था है

CEC अकेले फैसले नहीं ले सकते, Himanta Biswa Sarma बोले- Election Commission सामूहिक संस्था है

गुरुवार को असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने वोटर लिस्ट के ‘स्पेशल इंटेंसिव रिविजन’ (SIR) को लेकर हो रहे विवादों के बीच मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार का बचाव किया। उन्होंने कहा कि CEC की आलोचना विपक्ष की हताशा को दिखाती है, और उन्होंने विपक्ष को दिमागी नक्सली करार दिया। एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में सरमा ने ज़ोर देकर कहा कि चुनाव आयोग के फ़ैसले सामूहिक रूप से लिए जाते हैं और CEC अन्य चुनाव आयुक्तों की भागीदारी के बिना अकेले कोई फ़ैसला नहीं ले सकते।

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हिमंत बिस्वा सरमा ने समझाया कि जब मुख्य चुनाव आयुक्त या अन्य चुनाव आयुक्त अल्पमत में हों, तो चुनाव आयोग कोई फ़ैसला नहीं ले सकता। चुनाव आयोग के हर फ़ैसले को बहुमत से पारित या लिया जाना चाहिए, क्योंकि यह एक सामूहिक संस्था है। उन्होंने आगे कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) को ऐसे व्यक्ति के तौर पर दिखाना जो एकतरफा फ़ैसले लेते हैं, उस संवैधानिक ढांचे के ख़िलाफ़ है जिसके तहत चुनाव आयोग काम करता है।

सरमा ने कहा कि इसलिए, देश भर में यह संदेश देना कि मुख्य चुनाव आयुक्त ने अकेले ही फ़ैसले लिए हैं, संवैधानिक व्यवस्था के हिसाब से सही नहीं है। फ़ैसले लेने से पहले चर्चा करना अलग बात है, लेकिन चुनाव आयोग का कोई भी फ़ैसला आम सहमति या बहुमत की राय से ही लिया जाना चाहिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि विपक्ष का मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) पर ध्यान केंद्रित करना एक तरह का राजनीतिक अभियान है।

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उन्होंने कहा कि इसीलिए मुख्य चुनाव आयुक्त को निशाना बनाना एक राजनीतिक अभियान है। मुझे नहीं लगता कि मुख्य चुनाव आयुक्त, दूसरे चुनाव आयुक्तों से सलाह लिए बिना कोई फ़ैसला ले सकते हैं। इसलिए, मुख्य चुनाव आयुक्त को निशाना बनाना सिर्फ़ विपक्ष और ‘दिमागी नक्सलियों’ की हताशा को दिखाता है। ये टिप्पणियां ऐसे समय में आई हैं जब चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी द्वारा 10 महीने की अवधि में मतदाता सूची प्रक्रियाओं और SIR से जुड़े मुद्दों पर कम से कम 14 बार औपचारिक रूप से आपत्ति जताने की खबरों के बाद राजनीतिक विवाद बढ़ गया है।

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