मधेपुरा में 50 टीबी मरीजों को पोषण किट बांटे:टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत जनसहयोग से मिली सहायता

मधेपुरा में 50 टीबी मरीजों को पोषण किट बांटे:टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत जनसहयोग से मिली सहायता

मधेपुरा में प्रधानमंत्री टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत शनिवार को 50 टीबी मरीजों को पोषण किट वितरित की गईं। यह कार्यक्रम जिलाधिकारी के निर्देश पर जिला प्रशासन के सहयोग से झल्लू बाबू सभागार में आयोजित किया गया, जिसमें निःक्षय मित्रों के माध्यम से मरीजों को किट उपलब्ध कराई गईं। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य टीबी मरीजों को नियमित उपचार के साथ आवश्यक पोषण सहायता प्रदान करना और बीमारी के प्रति जन जागरूकता बढ़ाना है। सिविल सर्जन विजय कुमार ने बताया कि टीबी के इलाज में दवाओं के साथ-साथ पर्याप्त और पौष्टिक आहार भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। मरीजों को नियमित दवा लेने, पौष्टिक भोजन करने और चिकित्सकों के परामर्श का पालन करने के लिए प्रेरित किया गया। जिला प्रशासन ने निःक्षय मित्रों, स्वयंसेवी संस्थाओं और आम लोगों से टीबी मरीजों के उपचार एवं पोषण में सहयोग के लिए आगे आने की अपील की है। अधिकारियों ने जोर दिया कि सामुदायिक सहभागिता से टीबी-मुक्त भारत अभियान को और अधिक मजबूती मिलेगी। डीपीएम प्रिंस ने जानकारी दी कि टीबी उन्मूलन के लिए बीमारी की समय पर पहचान, नियमित उपचार, पोषण संबंधी सहयोग और जनभागीदारी आवश्यक है। जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग जिले में टीबी-मुक्त भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए लगातार जागरूकता और सहयोगात्मक गतिविधियां संचालित कर रहे हैं। मधेपुरा में प्रधानमंत्री टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत शनिवार को 50 टीबी मरीजों को पोषण किट वितरित की गईं। यह कार्यक्रम जिलाधिकारी के निर्देश पर जिला प्रशासन के सहयोग से झल्लू बाबू सभागार में आयोजित किया गया, जिसमें निःक्षय मित्रों के माध्यम से मरीजों को किट उपलब्ध कराई गईं। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य टीबी मरीजों को नियमित उपचार के साथ आवश्यक पोषण सहायता प्रदान करना और बीमारी के प्रति जन जागरूकता बढ़ाना है। सिविल सर्जन विजय कुमार ने बताया कि टीबी के इलाज में दवाओं के साथ-साथ पर्याप्त और पौष्टिक आहार भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। मरीजों को नियमित दवा लेने, पौष्टिक भोजन करने और चिकित्सकों के परामर्श का पालन करने के लिए प्रेरित किया गया। जिला प्रशासन ने निःक्षय मित्रों, स्वयंसेवी संस्थाओं और आम लोगों से टीबी मरीजों के उपचार एवं पोषण में सहयोग के लिए आगे आने की अपील की है। अधिकारियों ने जोर दिया कि सामुदायिक सहभागिता से टीबी-मुक्त भारत अभियान को और अधिक मजबूती मिलेगी। डीपीएम प्रिंस ने जानकारी दी कि टीबी उन्मूलन के लिए बीमारी की समय पर पहचान, नियमित उपचार, पोषण संबंधी सहयोग और जनभागीदारी आवश्यक है। जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग जिले में टीबी-मुक्त भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए लगातार जागरूकता और सहयोगात्मक गतिविधियां संचालित कर रहे हैं।  

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