नालंदा यूनिवर्सिटी कैंपस में शनिवार को भारत का 80वां स्वतंत्रता दिवस पूरे हर्षोल्लास और गरिमा के साथ मनाया गया। विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर सचिन चतुर्वेदी ने राष्ट्रीय ध्वज फहराया। समारोह में 35 देशों के विद्यार्थियों सहित विश्वविद्यालय के तमाम शिक्षक, अधिकारी, कर्मचारी और साझेदार शामिल हुए। अलग-अलग देशों और संस्कृतियों से आए विद्यार्थियों की इस सहभागिता ने भारत के इस राष्ट्रीय पर्व को एक अनूठे वैश्विक उत्सव में तब्दील कर दिया। वैश्विक पटल पर नालंदा का बढ़ता कदम स्वतंत्रता दिवस समारोह को संबोधित करते हुए कुलपति प्रोफेसर सचिन चतुर्वेदी ने विश्वविद्यालय की शानदार अकादमिक प्रगति का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि नालंदा विश्वविद्यालय ने अब एक हजार विद्यार्थियों की संख्या का ऐतिहासिक आंकड़ा पार कर लिया है। वर्तमान में यहां 35 देशों के छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं, जबकि इस वर्ष 72 देशों से प्रवेश के लिए आवेदन प्राप्त हुए थे। यह विश्वविद्यालय की बढ़ती वैश्विक साख का सीधा प्रमाण है। कुलपति ने युवाओं को संबोधित करते हुए उन्हें भारत के भविष्य का वास्तुकार करार दिया। उन्होंने विद्यार्थियों से अपील की कि वे खुद को केवल किताबी और अकादमिक गतिविधियों तक सीमित न रखें, बल्कि विश्वविद्यालय के प्रशासन, संचालन और व्यापक सामाजिक जिम्मेदारियों में भी अपनी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करें। प्राचीन परंपरा और ‘विकसित भारत @2047’ का संगम ‘विकसित भारत @2047’ के विजन पर प्रकाश डालते हुए प्रोफेसर चतुर्वेदी ने स्पष्ट किया कि भारत की इस विकास यात्रा का लाभ ‘ग्लोबल साउथ’ के हमारे साझेदार देशों तक भी पहुंचना चाहिए। उन्होंने इस आधुनिक दृष्टिकोण को नालंदा की प्राचीन और सभ्यतागत विरासत से जोड़ा। कुलपति ने याद दिलाया कि सदियों पहले नालंदा में ज्ञान भौगोलिक सीमाओं से परे जाकर साझा और विकसित होता था। ज्ञान के माध्यम से पूरी दुनिया को जोड़ने और आपसी सहभागिता की यह भावना समकालीन वैश्वीकरण की अवधारणा से बहुत पहले ही नालंदा की परंपरा का अभिन्न हिस्सा रही है। भविष्य की अकादमिक रूपरेखा और ‘लीप 2.0’ तेजी से बदलती वैश्विक परिस्थितियों के लिए छात्रों को तैयार करने के मकसद से विश्वविद्यालय ने कई नई अकादमिक प्राथमिकताओं की घोषणा की है। कुलपति ने जानकारी दी कि परिसर में साइंस एंड टेक्नोलॉजी पॉलिसी स्टडीज, डेटा साइंस एंड एआई और संस्कृत के नए कार्यक्रमों के साथ-साथ 27 अल्पकालिक और 54 वैकल्पिक पाठ्यक्रम शुरू किए जा रहे हैं। इसके अलावा, शोध क्लस्टरों के माध्यम से अंतर-विषयक अकादमिक सहयोग, विदेशी विश्वविद्यालयों के साथ सेमेस्टर एक्सचेंज और छात्रों के नेतृत्व में अकादमिक जर्नल को बढ़ावा दिया जाएगा। समाज के साथ परिसर के जुड़ाव को मजबूत करने के लिए ‘लीप 2.0’ की भी घोषणा की गई, जिसके तहत इस वर्ष 40 लाख रुपये का बजट रखा गया है। इसका मुख्य उद्देश्य छात्रों को सहयोग देने के साथ-साथ उनमें सामाजिक जिम्मेदारी की भावना विकसित करना है। विश्वविद्यालयों की भूमिका पर अंतरराष्ट्रीय दिग्गजों का मंथन स्वतंत्रता दिवस समारोह के दूसरे हिस्से में “विश्व न्याय, शांति और सतत विकास : विश्वविद्यालयों की भूमिका” विषय पर एक विशेष उच्च स्तरीय पैनल चर्चा का आयोजन किया गया। प्रोफेसर सचिन चतुर्वेदी की अध्यक्षता में हुए इस विमर्श में येल विश्वविद्यालय के ग्लोबल जस्टिस प्रोग्राम के फाउंडिंग डायरेक्टर प्रोफेसर थॉमस पोगे, नॉर्वे के पूर्व पर्यावरण एवं अंतरराष्ट्रीय विकास मंत्री एरिक सोलहाइम, नई दिल्ली स्थित जेएनयू के स्कूल ऑफ इंटरनेशनल रिलेशंस के डीन प्रोफेसर अमिताभ मट्टू और बीएचयू वाराणसी की प्रोफेसर अंजू शरण उपाध्याय जैसी अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय हस्तियों ने भाग लिया। इस दौरान बदलती वैश्विक व्यवस्था में न्याय, शांति और स्थिरता स्थापित करने में शिक्षण संस्थानों की अहम भूमिका पर विस्तार से मंथन किया गया। समारोह का शानदार समापन विदेशी विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत किए गए विविध सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ हुआ, जिसने स्वतंत्रता दिवस के इस जश्न में सांस्कृतिक विविधता के रंग भर दिए। नालंदा यूनिवर्सिटी कैंपस में शनिवार को भारत का 80वां स्वतंत्रता दिवस पूरे हर्षोल्लास और गरिमा के साथ मनाया गया। विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर सचिन चतुर्वेदी ने राष्ट्रीय ध्वज फहराया। समारोह में 35 देशों के विद्यार्थियों सहित विश्वविद्यालय के तमाम शिक्षक, अधिकारी, कर्मचारी और साझेदार शामिल हुए। अलग-अलग देशों और संस्कृतियों से आए विद्यार्थियों की इस सहभागिता ने भारत के इस राष्ट्रीय पर्व को एक अनूठे वैश्विक उत्सव में तब्दील कर दिया। वैश्विक पटल पर नालंदा का बढ़ता कदम स्वतंत्रता दिवस समारोह को संबोधित करते हुए कुलपति प्रोफेसर सचिन चतुर्वेदी ने विश्वविद्यालय की शानदार अकादमिक प्रगति का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि नालंदा विश्वविद्यालय ने अब एक हजार विद्यार्थियों की संख्या का ऐतिहासिक आंकड़ा पार कर लिया है। वर्तमान में यहां 35 देशों के छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं, जबकि इस वर्ष 72 देशों से प्रवेश के लिए आवेदन प्राप्त हुए थे। यह विश्वविद्यालय की बढ़ती वैश्विक साख का सीधा प्रमाण है। कुलपति ने युवाओं को संबोधित करते हुए उन्हें भारत के भविष्य का वास्तुकार करार दिया। उन्होंने विद्यार्थियों से अपील की कि वे खुद को केवल किताबी और अकादमिक गतिविधियों तक सीमित न रखें, बल्कि विश्वविद्यालय के प्रशासन, संचालन और व्यापक सामाजिक जिम्मेदारियों में भी अपनी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करें। प्राचीन परंपरा और ‘विकसित भारत @2047’ का संगम ‘विकसित भारत @2047’ के विजन पर प्रकाश डालते हुए प्रोफेसर चतुर्वेदी ने स्पष्ट किया कि भारत की इस विकास यात्रा का लाभ ‘ग्लोबल साउथ’ के हमारे साझेदार देशों तक भी पहुंचना चाहिए। उन्होंने इस आधुनिक दृष्टिकोण को नालंदा की प्राचीन और सभ्यतागत विरासत से जोड़ा। कुलपति ने याद दिलाया कि सदियों पहले नालंदा में ज्ञान भौगोलिक सीमाओं से परे जाकर साझा और विकसित होता था। ज्ञान के माध्यम से पूरी दुनिया को जोड़ने और आपसी सहभागिता की यह भावना समकालीन वैश्वीकरण की अवधारणा से बहुत पहले ही नालंदा की परंपरा का अभिन्न हिस्सा रही है। भविष्य की अकादमिक रूपरेखा और ‘लीप 2.0’ तेजी से बदलती वैश्विक परिस्थितियों के लिए छात्रों को तैयार करने के मकसद से विश्वविद्यालय ने कई नई अकादमिक प्राथमिकताओं की घोषणा की है। कुलपति ने जानकारी दी कि परिसर में साइंस एंड टेक्नोलॉजी पॉलिसी स्टडीज, डेटा साइंस एंड एआई और संस्कृत के नए कार्यक्रमों के साथ-साथ 27 अल्पकालिक और 54 वैकल्पिक पाठ्यक्रम शुरू किए जा रहे हैं। इसके अलावा, शोध क्लस्टरों के माध्यम से अंतर-विषयक अकादमिक सहयोग, विदेशी विश्वविद्यालयों के साथ सेमेस्टर एक्सचेंज और छात्रों के नेतृत्व में अकादमिक जर्नल को बढ़ावा दिया जाएगा। समाज के साथ परिसर के जुड़ाव को मजबूत करने के लिए ‘लीप 2.0’ की भी घोषणा की गई, जिसके तहत इस वर्ष 40 लाख रुपये का बजट रखा गया है। इसका मुख्य उद्देश्य छात्रों को सहयोग देने के साथ-साथ उनमें सामाजिक जिम्मेदारी की भावना विकसित करना है। विश्वविद्यालयों की भूमिका पर अंतरराष्ट्रीय दिग्गजों का मंथन स्वतंत्रता दिवस समारोह के दूसरे हिस्से में “विश्व न्याय, शांति और सतत विकास : विश्वविद्यालयों की भूमिका” विषय पर एक विशेष उच्च स्तरीय पैनल चर्चा का आयोजन किया गया। प्रोफेसर सचिन चतुर्वेदी की अध्यक्षता में हुए इस विमर्श में येल विश्वविद्यालय के ग्लोबल जस्टिस प्रोग्राम के फाउंडिंग डायरेक्टर प्रोफेसर थॉमस पोगे, नॉर्वे के पूर्व पर्यावरण एवं अंतरराष्ट्रीय विकास मंत्री एरिक सोलहाइम, नई दिल्ली स्थित जेएनयू के स्कूल ऑफ इंटरनेशनल रिलेशंस के डीन प्रोफेसर अमिताभ मट्टू और बीएचयू वाराणसी की प्रोफेसर अंजू शरण उपाध्याय जैसी अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय हस्तियों ने भाग लिया। इस दौरान बदलती वैश्विक व्यवस्था में न्याय, शांति और स्थिरता स्थापित करने में शिक्षण संस्थानों की अहम भूमिका पर विस्तार से मंथन किया गया। समारोह का शानदार समापन विदेशी विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत किए गए विविध सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ हुआ, जिसने स्वतंत्रता दिवस के इस जश्न में सांस्कृतिक विविधता के रंग भर दिए।


