मधुबनी में रविवार को बेल्ट्रॉन कर्मियों ने राज्यकर्मी का दर्जा, सेवा सुरक्षा और सेवा समायोजन की मांग को लेकर धरना-प्रदर्शन किया। बिहार राज्य डाटा इंट्री ऑपरेटर संयुक्त मोर्चा के बैनर तले जिला मुख्यालय के तय धरनास्थल पर यह प्रदर्शन हुआ। इसमें जिले के सरकारी विभागों, कार्यालयों और पंचायतों में काम करने वाले सैकड़ों डाटा इंट्री ऑपरेटर और अन्य बेल्ट्रॉन कर्मी शामिल हुए। संयुक्त मोर्चा के आह्वान पर राज्य के सभी जिलों में एक साथ धरना-प्रदर्शन और रोड मार्च किया गया। 20 हजार कर्मी तीन दशक से कर रहे काम कर्मियों ने राज्य सरकार से उन्हें राज्यकर्मी का दर्जा देने और सूचना प्रौद्योगिकी विभाग को बेल्ट्रॉन कर्मियों का नोडल विभाग घोषित करने की मांग की। वक्ताओं ने कहा कि करीब 20 हजार कर्मी लगभग तीन दशकों से अलग-अलग सरकारी विभागों में काम कर रहे हैं। इसके बावजूद उन्हें स्थायी सेवा सुरक्षा और सरकारी कर्मचारियों जैसी सुविधाएं नहीं मिली हैं। उन्होंने मांगों पर जल्द लिखित आदेश जारी करने की अपील की। बोले- सरकारी कामों को डिजिटल करने में हमारी भूमिका संयुक्त मोर्चा के जिला अध्यक्ष नितिश कुमार झा ने कहा कि बेल्ट्रॉन कर्मी सरकारी व्यवस्था का हिस्सा हैं। सरकारी कामों को डिजिटल करने, ऑनलाइन सेवाएं चलाने और विभागों के रोजमर्रा के काम में उनकी भूमिका है। उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय के आदेश और बिहार के महाधिवक्ता के पत्र के आधार पर सरकार से जल्द नीतिगत फैसला लेने की मांग की। जिला उपाध्यक्ष रामरतन कुमार ने कहा कि आंदोलन किसी व्यक्ति या प्रशासन के खिलाफ नहीं, बल्कि कर्मियों के सम्मान, अधिकार और सुरक्षित भविष्य के लिए है। संयुक्त मोर्चा प्रदेश के हर बेल्ट्रॉन कर्मी की आवाज को एक मंच देना चाहता है। मांगें नहीं मानीं तो कार्य बहिष्कार की चेतावनी जिला सचिव निविन कुमार पाल ने कहा कि तीन दशकों तक लगातार सेवा देने के बाद भी कर्मियों की सेवा नियमित नहीं हुई है। वहीं, जिला महासचिव रमन कुमार ने कहा कि सरकार के डिजिटल और ऑनलाइन कार्यों को जिम्मेदारी से पूरा करने वाले कर्मियों का सेवा समायोजन नहीं होना चिंता का विषय है। उन्होंने सरकार से मांगों पर जल्द सकारात्मक पहल करने की अपील की। कर्मियों ने चेतावनी दी कि सरकार ने जल्द निर्णय नहीं लिया तो चरणबद्ध आंदोलन के साथ कार्य बहिष्कार किया जाएगा। मधुबनी में रविवार को बेल्ट्रॉन कर्मियों ने राज्यकर्मी का दर्जा, सेवा सुरक्षा और सेवा समायोजन की मांग को लेकर धरना-प्रदर्शन किया। बिहार राज्य डाटा इंट्री ऑपरेटर संयुक्त मोर्चा के बैनर तले जिला मुख्यालय के तय धरनास्थल पर यह प्रदर्शन हुआ। इसमें जिले के सरकारी विभागों, कार्यालयों और पंचायतों में काम करने वाले सैकड़ों डाटा इंट्री ऑपरेटर और अन्य बेल्ट्रॉन कर्मी शामिल हुए। संयुक्त मोर्चा के आह्वान पर राज्य के सभी जिलों में एक साथ धरना-प्रदर्शन और रोड मार्च किया गया। 20 हजार कर्मी तीन दशक से कर रहे काम कर्मियों ने राज्य सरकार से उन्हें राज्यकर्मी का दर्जा देने और सूचना प्रौद्योगिकी विभाग को बेल्ट्रॉन कर्मियों का नोडल विभाग घोषित करने की मांग की। वक्ताओं ने कहा कि करीब 20 हजार कर्मी लगभग तीन दशकों से अलग-अलग सरकारी विभागों में काम कर रहे हैं। इसके बावजूद उन्हें स्थायी सेवा सुरक्षा और सरकारी कर्मचारियों जैसी सुविधाएं नहीं मिली हैं। उन्होंने मांगों पर जल्द लिखित आदेश जारी करने की अपील की। बोले- सरकारी कामों को डिजिटल करने में हमारी भूमिका संयुक्त मोर्चा के जिला अध्यक्ष नितिश कुमार झा ने कहा कि बेल्ट्रॉन कर्मी सरकारी व्यवस्था का हिस्सा हैं। सरकारी कामों को डिजिटल करने, ऑनलाइन सेवाएं चलाने और विभागों के रोजमर्रा के काम में उनकी भूमिका है। उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय के आदेश और बिहार के महाधिवक्ता के पत्र के आधार पर सरकार से जल्द नीतिगत फैसला लेने की मांग की। जिला उपाध्यक्ष रामरतन कुमार ने कहा कि आंदोलन किसी व्यक्ति या प्रशासन के खिलाफ नहीं, बल्कि कर्मियों के सम्मान, अधिकार और सुरक्षित भविष्य के लिए है। संयुक्त मोर्चा प्रदेश के हर बेल्ट्रॉन कर्मी की आवाज को एक मंच देना चाहता है। मांगें नहीं मानीं तो कार्य बहिष्कार की चेतावनी जिला सचिव निविन कुमार पाल ने कहा कि तीन दशकों तक लगातार सेवा देने के बाद भी कर्मियों की सेवा नियमित नहीं हुई है। वहीं, जिला महासचिव रमन कुमार ने कहा कि सरकार के डिजिटल और ऑनलाइन कार्यों को जिम्मेदारी से पूरा करने वाले कर्मियों का सेवा समायोजन नहीं होना चिंता का विषय है। उन्होंने सरकार से मांगों पर जल्द सकारात्मक पहल करने की अपील की। कर्मियों ने चेतावनी दी कि सरकार ने जल्द निर्णय नहीं लिया तो चरणबद्ध आंदोलन के साथ कार्य बहिष्कार किया जाएगा।

