महिला समूहों के उत्पादों के लिए बाजार पर चर्चा:लखनऊ में सहकार भारती के सम्मेलन में 25 स्वयं सहायता समूहों ने लगाए स्टॉल

महिला समूहों के उत्पादों के लिए बाजार पर चर्चा:लखनऊ में सहकार भारती के सम्मेलन में 25 स्वयं सहायता समूहों ने लगाए स्टॉल

महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ने और उनके उत्पादों के लिए बाजार उपलब्ध कराने पर सहकार भारती के प्रदेश महिला सम्मेलन में जोर दिया गया। रविवार को चौधरी चरण सिंह सभागार, सहकारिता भवन में सम्मेलन में प्रदेश के अलग-अलग जिलों से आईं महिला प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। करीब 25 स्वयं सहायता समूहों ने अपने उत्पादों के स्टॉल लगाए। मुख्य अतिथि राज्यमंत्री प्रतिभा शुक्ला ने मां भारती और सहकार भारती के संस्थापक लक्ष्मणराव इनामदार के चित्र पर माल्यार्पण कर कार्यक्रम की शुरुआत की। प्रतिभा शुक्ला ने कहा कि कोई काम छोटा नहीं होता और हर बड़े काम की शुरुआत छोटे स्तर से होती है। महिलाओं को परिवार में संस्कारों का माहौल बनाने के साथ स्वावलंबन की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने कहा कि सहकार भारती इस दिशा में काम कर रही है। जमीनी स्तर तक लाभ पहुंचाने को कहा उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य, शिक्षा और पर्यावरण के क्षेत्र में काम करने वाले उद्यमियों को प्रोत्साहित करने की जरूरत है। इससे सामाजिक विकास और राष्ट्रप्रेम की भावना मजबूत होगी। प्रदेश सरकार प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना, आयुष्मान योजना, मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना और कौशल विकास जैसी योजनाओं के जरिए लोगों को लाभ पहुंचा रही है। उन्होंने सहकार भारती से इन योजनाओं का लाभ जमीनी स्तर तक पहुंचाने में सहयोग करने को कहा। मातृशक्ति सभी के हित में काम करने वाली शक्ति हैं विशिष्ट अतिथि और राष्ट्र सेविका समिति की अवध प्रांत कार्यवाहिका यशोधरा ने कहा कि मातृशक्ति का अर्थ सभी के हित में काम करने वाली शक्ति है। नारी परिवार, समाज, राष्ट्र और विश्व के कल्याण में भूमिका निभाती है। उन्होंने कहा कि महिलाओं को संस्कृति और प्रकृति का ध्यान रखते हुए परिवार को संस्कारों से जोड़ना चाहिए। प्रदेश अध्यक्ष अरुण कुमार सिंह ने कहा कि अमूल डेयरी में 36 लाख और लिज्जत पापड़ में 45 हजार महिलाएं जुड़ी हैं। उन्होंने कहा कि इससे महिला शक्ति और सामूहिक प्रयासों की क्षमता का अंदाजा लगाया जा सकता है।

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