वेतन वृद्धि रोकने और मांगों पर सरकार की चुप्पी से नाराज डाटा एंट्री ऑपरेटरों ने रविवार को भागलपुर समाहरणालय गेट पर प्रदर्शन किया। उन्होंने कहा कि पहले उनकी समस्याएं सुलझाई जाएं, फिर डिजिटल बिहार का सपना दिखाया जाए। मांगें पूरी नहीं हुईं तो पटना से लेकर सड़क तक आंदोलन करेंगे। बिहार राज्य डाटा एंट्री ऑपरेटर संयुक्त मोर्चा की भागलपुर इकाई के बैनर तले हुए प्रदर्शन में ऑपरेटरों ने सरकार के खिलाफ नारे लगाए। ऑपरेटरों की प्रमुख मांग है कि उन्हें राज्यकर्मी का दर्जा दिया जाए। उनका कहना है कि वे 1997 से पंचायत, प्रखंड, जिला मुख्यालय और सचिवालय के सरकारी दफ्तरों में काम कर रहे हैं। उनके मुताबिक, सरकारी योजनाओं, विभागीय आंकड़ों, ऑनलाइन आवेदनों, प्रमाणपत्रों और दूसरे कामों को डिजिटल तरीके से चलाने में उनकी भूमिका रही है। इतने साल काम करने के बाद भी उन्हें नियमित सरकारी कर्मचारियों जैसी सुविधाएं और सम्मान नहीं मिला है। समस्याओं की अनदेखी क्यों की जा रही है? प्रदर्शन के दौरान कर्मियों ने सवाल उठाया कि जब सरकार डिजिटल बिहार बनाने की बात करती है, तो उस व्यवस्था को जमीन पर उतारने वाले कर्मचारियों की समस्याओं की अनदेखी क्यों की जा रही है? ऑपरेटरों का कहना था कि जिन लोगों ने वर्षों तक सरकारी विभागों को डिजिटल बनाने में अपना खून-पसीना बहाया, आज उन्हीं के भविष्य पर अनिश्चितता बनी हुई है।
मजदूर की मजदूरी बढ़ती है, लेकिन हमारा वेतन क्यों नहीं?
प्रदर्शन में जिला प्रवक्ता गौरव कुमार झा ने सरकार पर नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि वर्ष 1997 से लगातार पंचायत स्तर, प्रखंड स्तर, जिला मुख्यालय और सचिवालय तक डाटा एंट्री ऑपरेटर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। पहले जहां सरकारी कार्यालयों में अधिकांश काम कागजों पर होता था, वहीं आज डिजिटल व्यवस्था का विस्तार हुआ है। इस बदलाव में डाटा एंट्री ऑपरेटरों का बहुत बड़ा योगदान है।
उन्होंने वेतन विसंगति का मुद्दा उठाते हुए कहा कि समय के साथ मजदूरों की मजदूरी तक बढ़ती है, लेकिन बेल्ट्रॉन के माध्यम से काम करने वाले कर्मियों के साथ उचित व्यवहार नहीं किया जा रहा है। उनका आरोप है कि 10 प्रतिशत वेतन वृद्धि को भी रोक दिया गया है। ऐसे में वर्षों से काम कर रहे कर्मचारियों के सामने आर्थिक और भविष्य की चिंता खड़ी हो गई है। न्यायालय के आदेश के पालन में देरी का लगाया आरोप
प्रदर्शनकारियों ने न्यायालय के आदेश को लागू करने में बिहार सरकार पर टालमटोल करने का भी आरोप लगाया। गौरव कुमार झा ने कहा कि न्यायालय के आदेश के अनुसार जिन कर्मचारियों का काम स्थायी प्रकृति का है और जिन्हें कार्यालय खुलने के दौरान नियमित रूप से उपस्थित रहकर काम करना पड़ता है, उन्हें आउटसोर्सिंग के माध्यम से रखने के बजाय उचित सेवा व्यवस्था में लाया जाना चाहिए।
उन्होंने आरोप लगाया कि न्यायालय के आदेश के बावजूद पिछले तीन महीने से सरकार कर्मचारियों का डाटा मांगे जाने की बात कहकर मामले को टाल रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब सरकार इन कर्मचारियों से लगातार काम ले रही है और उन्हें वेतन भी दे रही है, तो फिर उनके सेवा संबंधी आंकड़े जुटाने में इतनी देरी क्यों हो रही है?
बड़े आंदोलन की चेतावनी समाहरणालय गेट पर प्रदर्शन कर रहे कर्मियों ने कहा कि आज उन्होंने सरकारी कामकाज को बाधित किए बिना अपनी मांगों को सरकार तक पहुंचाने का प्रयास किया है। यदि उनकी मांगों पर जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा।
गौरव कुमार झा ने चेतावनी देते हुए कहा कि पटना में बैठे संयुक्त मोर्चा के शीर्ष पदाधिकारियों से निर्देश मिलते ही कर्मचारी सड़क पर उतरकर बड़ा आंदोलन करेंगे। उन्होंने कहा कि इस बार कर्मी केवल आश्वासन से संतुष्ट होने वाले नहीं हैं। उनकी एकमात्र मांग है कि वर्षों से सेवा दे रहे सभी डाटा एंट्री ऑपरेटरों को राज्यकर्मी का दर्जा दिया जाए और वेतन संबंधी विसंगतियों को दूर किया जाए। वेतन वृद्धि रोकने और मांगों पर सरकार की चुप्पी से नाराज डाटा एंट्री ऑपरेटरों ने रविवार को भागलपुर समाहरणालय गेट पर प्रदर्शन किया। उन्होंने कहा कि पहले उनकी समस्याएं सुलझाई जाएं, फिर डिजिटल बिहार का सपना दिखाया जाए। मांगें पूरी नहीं हुईं तो पटना से लेकर सड़क तक आंदोलन करेंगे। बिहार राज्य डाटा एंट्री ऑपरेटर संयुक्त मोर्चा की भागलपुर इकाई के बैनर तले हुए प्रदर्शन में ऑपरेटरों ने सरकार के खिलाफ नारे लगाए। ऑपरेटरों की प्रमुख मांग है कि उन्हें राज्यकर्मी का दर्जा दिया जाए। उनका कहना है कि वे 1997 से पंचायत, प्रखंड, जिला मुख्यालय और सचिवालय के सरकारी दफ्तरों में काम कर रहे हैं। उनके मुताबिक, सरकारी योजनाओं, विभागीय आंकड़ों, ऑनलाइन आवेदनों, प्रमाणपत्रों और दूसरे कामों को डिजिटल तरीके से चलाने में उनकी भूमिका रही है। इतने साल काम करने के बाद भी उन्हें नियमित सरकारी कर्मचारियों जैसी सुविधाएं और सम्मान नहीं मिला है। समस्याओं की अनदेखी क्यों की जा रही है? प्रदर्शन के दौरान कर्मियों ने सवाल उठाया कि जब सरकार डिजिटल बिहार बनाने की बात करती है, तो उस व्यवस्था को जमीन पर उतारने वाले कर्मचारियों की समस्याओं की अनदेखी क्यों की जा रही है? ऑपरेटरों का कहना था कि जिन लोगों ने वर्षों तक सरकारी विभागों को डिजिटल बनाने में अपना खून-पसीना बहाया, आज उन्हीं के भविष्य पर अनिश्चितता बनी हुई है।
मजदूर की मजदूरी बढ़ती है, लेकिन हमारा वेतन क्यों नहीं?
प्रदर्शन में जिला प्रवक्ता गौरव कुमार झा ने सरकार पर नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि वर्ष 1997 से लगातार पंचायत स्तर, प्रखंड स्तर, जिला मुख्यालय और सचिवालय तक डाटा एंट्री ऑपरेटर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। पहले जहां सरकारी कार्यालयों में अधिकांश काम कागजों पर होता था, वहीं आज डिजिटल व्यवस्था का विस्तार हुआ है। इस बदलाव में डाटा एंट्री ऑपरेटरों का बहुत बड़ा योगदान है।
उन्होंने वेतन विसंगति का मुद्दा उठाते हुए कहा कि समय के साथ मजदूरों की मजदूरी तक बढ़ती है, लेकिन बेल्ट्रॉन के माध्यम से काम करने वाले कर्मियों के साथ उचित व्यवहार नहीं किया जा रहा है। उनका आरोप है कि 10 प्रतिशत वेतन वृद्धि को भी रोक दिया गया है। ऐसे में वर्षों से काम कर रहे कर्मचारियों के सामने आर्थिक और भविष्य की चिंता खड़ी हो गई है। न्यायालय के आदेश के पालन में देरी का लगाया आरोप
प्रदर्शनकारियों ने न्यायालय के आदेश को लागू करने में बिहार सरकार पर टालमटोल करने का भी आरोप लगाया। गौरव कुमार झा ने कहा कि न्यायालय के आदेश के अनुसार जिन कर्मचारियों का काम स्थायी प्रकृति का है और जिन्हें कार्यालय खुलने के दौरान नियमित रूप से उपस्थित रहकर काम करना पड़ता है, उन्हें आउटसोर्सिंग के माध्यम से रखने के बजाय उचित सेवा व्यवस्था में लाया जाना चाहिए।
उन्होंने आरोप लगाया कि न्यायालय के आदेश के बावजूद पिछले तीन महीने से सरकार कर्मचारियों का डाटा मांगे जाने की बात कहकर मामले को टाल रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब सरकार इन कर्मचारियों से लगातार काम ले रही है और उन्हें वेतन भी दे रही है, तो फिर उनके सेवा संबंधी आंकड़े जुटाने में इतनी देरी क्यों हो रही है?
बड़े आंदोलन की चेतावनी समाहरणालय गेट पर प्रदर्शन कर रहे कर्मियों ने कहा कि आज उन्होंने सरकारी कामकाज को बाधित किए बिना अपनी मांगों को सरकार तक पहुंचाने का प्रयास किया है। यदि उनकी मांगों पर जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा।
गौरव कुमार झा ने चेतावनी देते हुए कहा कि पटना में बैठे संयुक्त मोर्चा के शीर्ष पदाधिकारियों से निर्देश मिलते ही कर्मचारी सड़क पर उतरकर बड़ा आंदोलन करेंगे। उन्होंने कहा कि इस बार कर्मी केवल आश्वासन से संतुष्ट होने वाले नहीं हैं। उनकी एकमात्र मांग है कि वर्षों से सेवा दे रहे सभी डाटा एंट्री ऑपरेटरों को राज्यकर्मी का दर्जा दिया जाए और वेतन संबंधी विसंगतियों को दूर किया जाए।

